PU Student Council Election (चंडीगढ़) : पंजाब यूनिवर्सिटी कैंपस स्टूडेंट्स काउंसिल के चुनावों की शुरुआत 1977 में हुई थी। अब तक कुल 33 चुनाव हुए, 33 प्रेसिडेंट बने लेकिन सिर्फ एक ही विमन प्रेजिडेंट चुनी गई है। वे थीं एसएफएस की कनुप्रिया। 2018 में उन्होंने पांच मेल कैंडिडेट्स को हराकर चुनाव जीता था। जूलॉजी विभाग की कनुप्रिया को 2802 वोट मिले थे और 719 के मार्जिन से उन्होंने जीत हासिल की थी।
इस बार प्रेसिडेंट पद पर 3 विमन कैंडिडेट्स हैं। इनमें सोपु की अरदास, सोई की सीरत और एएसएफ की नवनीत कौर शामिल हैं। वहीं पिछले साल भी 3 कैंडिडेट्स जिनमें एबीवीपी की अर्पिता मलिक, पीएसयू ललकार से साराह शर्मा और एएसएफ की अल्का ने चुनाव लड़ा था। दूसरी ओर काउंसिल में अन्य चार पदों पर चुने गए करीब 125 रिप्रेजेंटेटिव्स में से 25 विमन रिप्रेजेंटेटिव्स रही हैं।
पीयू में कुल स्टूडेंट्स की करीब 60% संख्या हमेशा लड़कियों की रही है। लेकिन पीयू स्टूडेंट्स काउंसिल चुनावों में यह भागीदारी पांचवां हिस्सा यानी 20 प्रतिशत ही रही है। जबकि यहां बात हमेशा विमन एम्पावरमेंट की होती है।
एबीवीपी ने इस बार अपने मैनिफेस्टो में विमन स्टूडेंट्स को एम्पावर करने के लिए डीआर सीटों की पर्मानेंट रिजर्वेशन की बात की है। एबीवीपी ने पिछले साल अर्पिता मलिक को अध्यक्ष पद का उम्मीदवार बनाया था, तब अपने मैनिफेस्टो में काउंसिल में एक सीट पर महिला रिजर्वेशन की बात की थी।
सोच को बदलने जरूरत
पीएसयू ललकार की साराह कहती हैं कि बेशक यूनिवर्सिटी में लड़कियों की संख्या अधिक है, लेकिन आज भी सोच यही है कि लड़कियां लीड नहीं कर सकतीं। इसलिए यूनिवर्सिटी के अंदर लड़कियों को पॉलिटिक्स में जगह नहीं दी जाती। काउंसिल चुनावों में लड़ने वाली स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशंस को भी बाहर से पॉलिटिकल पार्टियों संचालित करती जाती हैं। पीयू भी उससे अछूता नहीं रहता।
फीमेल्स को हमेशा डमी कैंडिडेट की तरह यूज किया जाता है। दूसरी ओर सोई की सीरत कहती हैं कि विमन को चुनाव लड़ने के लिए आगे आना चाहिए। मैं प्रेजिडेंट के लिए तो कंटेस्ट कर ही रही हूं। एक ऐसी लीडर बनकर उभरना चाहती हूं जिससे गर्ल्स इंस्पिरेशन लें और पीयू काउंसिल चुनावों में आए आएं।
पिछले तीन सालों का आंकड़ा
पिछले तीन सालों के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2022 में 14,984 वोटर्स में 9,450 लड़कियां थीं और दो महिला उम्मीदवार प्रेसिडेंट पद के लिए थीं। 2023 में 15,693 वोटर्स में 9,930 लड़कियां थीं और एक महिला उम्मीदवार थी। 2024 में 15,854 वोटर्स में 10,100 लड़कियां हैं और तीन महिला उम्मीदवार मैदान में हैं। कोविड के कारण 2020 और 2021 में PUCSC चुनाव नहीं हुए थे।
वाइस प्रेजिडेंट – जॉइंट सेक्रेटरी को तवज्जो
एसएफएस ने पहली बार 2014 में पहली बार किसी विमन को प्रेजिडेंशियल कैंडिडेट घोषित किया तो नेशनल पार्टी एनएसयूआई ने 2016 में। विमन स्टूडेंट्स के समाजीकरण और राजनीतिकरण को प्रोत्साहित करने के लिए कैंपस में नारीवादी स्वायत्त बुनियादी ढांचे की सख्त जरूरत है।
पदों के लिए प्राथमिकता के संदर्भ में, प्रेजिडेंट की भूमिका को सबसे चुनौतीपूर्ण माना जाता है और आमतौर पर प्रमुख दलों द्वारा इसका विरोध किया जाता है। नई पार्टियां टॉप पदों से बचती हैं, इसके बजाय वाइस प्रेजिडेंट या जॉइंट सेक्रेटरी के लिए फीमेल कैंडिडेट्स को मैदान में उतारना पसंद करती हैं।
पीयूसीएससी : 1977 से अब तक
कुल 33 चुनाव हुए, चार पदों पर 125 स्टूडेंट रिप्रेजेंटेटिव्स चुने गए। इनमें 25 विमन रिप्रेजेंटेटिव्स चुनी गईं। प्रेसिडेंट के पद पर एक विमन चुनी गई और वाइस प्रेसिडेंट के पद पर 20। इसके अलावा सेक्रेटरी के पद पर 3 जॉइंट सेक्रेटरी के पद पर 1 महिला अब तक चुनी गई है।












