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Self-Driving Car Training: चंडीगढ़ में इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स को मिलेगी सेल्फ-ड्राइविंग कार की ट्रेनिंग

On: सितम्बर 16, 2025 9:25 पूर्वाह्न
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Self-Driving Car Training Chandigarh : सेल्फ-ड्राइविंग कार का सपना अब भारत में सच होने की राह पर है! अमेरिका, चीन, जापान जैसे देशों में सेल्फ-ड्राइविंग कारें सड़कों पर दौड़ रही हैं, लेकिन भारत की सड़कों का हाल सबको पता है गड्ढे, स्पीड ब्रेकर और सड़क पर घूमते जानवर। इन सबके बीच अब एक साउथ कोरियन कंपनी भारत में कमाल करने जा रही है।

पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) के नेतृत्व में पीआई आरएएचआई (IIT रोपड़ रीजनल एक्सेलरेटर फॉर होलिस्टिक इनोवेशन) और नॉर्दर्न रीजन साइंस एंड टेक्नोलॉजी क्लस्टर ने साउथ कोरिया की कंपनी एचएल क्लेमूव इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के साथ सोमवार को एक खास एमओयू साइन किया। इसका मकसद है भारत में सस्टेनेबल मोबिलिटी, ऑटोमेटेड ड्राइविंग और ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देना।

भारत की सड़कों के लिए खास तैयारी

पीआई आरएएचआई के डायरेक्टर प्रो. रजत संधीर ने बताया कि ये कंपनी दुनिया की टॉप-5 में शामिल है, जो सेल्फ-ड्राइविंग कार सॉल्यूशंस देती है। साउथ कोरिया में ये पहले ही सेल्फ-ड्राइविंग कारों का जादू दिखा चुकी है। भारत में ये कंपनी चार कंपनियों को सेंसर-बेस्ड कैमरा, रडार और सिस्टम्स के सॉल्यूशंस दे रही है। लेकिन भारत का ट्रैफिक और सड़कों की चुनौतियां बिल्कुल अलग हैं।

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यहां गड्ढों से लेकर स्पीड ब्रेकर और सड़क पर अचानक आने वाले जानवरों तक, सब कुछ है। इन चुनौतियों को ध्यान में रखकर कंपनी भारत में काम कर रही है। खास बात ये है कि देश में अब तक किसी भी इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट या यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट्स को सेल्फ-ड्राइविंग कार की ट्रेनिंग नहीं दी जा रही थी।

Self-Driving Car Training: संजीव शर्मा की अनोखी रिसर्च

सेल्फ-ड्राइविंग कार की दुनिया में भोपाल के संजीव शर्मा भी पीछे नहीं हैं। वो कई सालों से इस टेक्नोलॉजी पर रिसर्च कर रहे हैं। उनका मकसद है ऐसी कार बनाना जो बिना ड्राइवर के सुरक्षित मंजिल तक पहुंचे। संजीव ने 2011 में मोशन प्लानिंग और डिसीजन मेकिंग पर रिसर्च शुरू की। वो इजराइल गए, जहां ट्रैफिक से भरी सड़कों पर तेज रफ्तार मोबाइल रोबोट्स के लिए डिसीजन मेकिंग सॉफ्टवेयर बनाया जा रहा था।

2012-14 तक वो कनाडा में रहे और फिर भारत लौटकर भोपाल में अपना स्टार्टअप स्वायत रोबोट्स शुरू किया। उनकी कंपनी अब तक भारतीय सड़कों पर 80 से ज्यादा डेमो कर चुकी है। कंपनी का दावा है कि अगर भारत की भीड़भाड़ वाली सड़कों पर ड्राइवरलेस कार चल सकती है, तो दुनिया में कहीं भी चल सकती है।

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यूआईईटी के स्टूडेंट्स को मिलेगा मौका

इस एमओयू पर पीयू की वीसी और पीआई आरएएचआई की चेयरपर्सन प्रो. रेनु विग और एचएल क्लेमूव के बेंगलुरु टेक सेंटर के वाइस प्रेसिडेंट क्वान सन यू ने हस्ताक्षर किए। इसके तहत पहले यूआईईटी (यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी) की फैकल्टी को ट्रेनिंग दी जाएगी। फिर इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स को इसका फायदा मिलेगा।

स्टूडेंट्स बेंगलुरु में कंपनी के इंडिया टेक सेंटर में जाकर प्रैक्टिकल अनुभव लेंगे। साथ ही जॉइंट प्रोजेक्ट्स पर भी काम होगा। प्रो. विग ने कहा कि ये एमओयू भारत की सड़कों के लिए अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी को अपनाने का रास्ता खोलेगा। ये पीयू और आसपास के स्टूडेंट्स को भविष्य के लिए ज्यादा रोजगार-योग्य और इंडस्ट्री के लिए तैयार करेगा।

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अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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