Toy train will run from Kalka to Tara Devi only till June 12, railway bridge built in Shimla Summerhill will be repaired: शिमला वर्ल्ड हेरिटेज ट्रैक कालका-शिमला रेलवे लाइन पर चलने वाली टॉय ट्रेन 12 जून तक कालका से तारादेवी स्टेशन तक ही चलेगी। शिमला के पास समरहिल में बने रेलवे पुल की मरम्मत की जाएगी, जिसके चलते दो सप्ताह तक यहां से कोई भी ट्रेन पहाड़ों की ओर नहीं जाएगी।
इससे शिमला जाने वाले सैलानियों को परेशानी होगी, लेकिन पुल की मरम्मत के चलते यह आवश्यक था। इसके अलावा 28-29 जून को भी कोई भी टॉय ट्रेन शिमला तक नहीं जाएगी।
सीनियर डीओएम, अंबाला डिविजन ने कालका-शिमला रेलवे के सभी अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं। इसमें सभी स्टेशन मास्टर और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को 30 मई से 12 जून तक नए शेड्यूल के हिसाब से आवश्यक तैयारियां करने को कहा गया है।
इसमें बताया गया है कि कालका-शिमला ट्रैक पर चलने वाली 7 गाड़ियां किस समय पर कालका से चलेंगी और कब तारा देवी पहुंचेंगी। सभी ट्रेन तारा देवी से ही कालका वापस आएंगी। यही शेड्यूल 28 व 29 जून को भी फॉलो किया जाएगा।
यात्रियों की सुविधा के लिए एचआरटीसी की बसों को लगाया
उत्तर रेलवे अंबाला मंडल ने कालका-शिमला रेलमार्ग पर जरूरी काम के चलते 14 दिन तक कालका से तारा देवी के बीच टॉय ट्रेन चलाने का फैसला लिया है। इसके चलते ट्रेनों के टाइम टेबल के अनुसार दो-दो एचआरटीसी की बसों को तारा देवी से शिमला के बीच चलाने का फैसला लिया गया है। दोनों के बीच की दूरी का किराया 22 रुपए होगा। बस यात्रियों को आईएसबीटी शिमला छोड़ेगी।
यात्रियों को दिक्कत नहीं होगी
पुल को स्ट्रेंथन कर रहे हैं बारिशों से पहले इस पुल को स्ट्रेंथन करने के लिए टॉयट्रेन को कालका से तारा देवी के बीच चलाया जा रहा है। तारा देवी से शिमला के लिए 15-20 मिनट का रास्ता ही रह जाता है. इसलिए यात्रियों को दिक्कत नहीं होगी। वहां से शिमला के बीच ट्रांसपोर्टेशन की व्यवस्था भी की जाएगी। -हिमांशु, सीनियर डि विजनल ऑपरेशन मैनेजर
अगस्त 2023 में बने पुल का पुनर्निर्माण यूनेस्को ने ठीक नहीं माना, इसलिए दोबारा बनेगा
9 जुलाई 2023 को भारी बारिश से जगह-जगह लैंड स्लाइड हुई थी। करीब 300 जगहों से ट्रैक प्रभावित हुआ था। 14 अगस्त को शिमला में हुई बारिश से समरहिल के पास पुल नंबर 800 की पूरी पटरी बह गई थी। उस दौरान शिमला- कालका रेलमार्ग पूरी तरह बंद हो गया था। इस ट्रैक की मरम्मत के लिए 20 करोड़ रुपये खर्च हुआ था।
इसके लिए पूरी तरह से लोहे के गाडर पर ट्रैक को खड़ा किया गया था। दिल्ली से आई विशेषज्ञों की टीम ने इसे बनाया था। तब रेलवे बोर्ड ने दिया था। हाल ही में यूनेस्को की टीम ने कालका-शिमला हेरिटेज ट्रैक का दौरा किया था।
इस दौरान टीम सदस्यों ने इस पुल के आनन-फानन में पुल की मरम्मत करके ट्रैक को बहाल कर पुनर्निमाण को यूनेस्को के मानदंडों के तहत नहीं पाया और रेलवे बोर्ड को इस संबंध में आवश्यक निर्देश दिए गए। इसके बाद नॉर्दर्न रेलवे के अंबाला डिविजन ने समरहिल के इस रेलवे पुल की फिर से मरम्मत करने का फैसला लिया।













