HighCourt: Question on removal of victim from witness list in Karnal rape case, report sought from special court: पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने करनाल के एक दुष्कर्म मामले में चौंकाने वाला खुलासा होने पर कड़ा रुख अपनाया है। 2020 में 16 वर्षीय नाबालिग के साथ दुष्कर्म के आरोपी विजय की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि पीड़िता को अभियोजन पक्ष की गवाह सूची से हटा दिया गया है।
इस पर हैरानी जताते हुए कोर्ट ने विशेष पोक्सो अदालत से स्पष्टीकरण मांगा है। यह मामला न केवल कानूनी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाता है, बल्कि नाबालिग पीड़िताओं के न्याय के अधिकार को भी रेखांकित करता है। आइए, इस मामले की पूरी जानकारी समझते हैं।
करनाल दुष्कर्म मामला: क्या है विवाद? HighCourt
करनाल के निवासी विजय पर 2020 में 16 साल की नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म का आरोप है। विजय ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की, जिसमें उसके वकील ने दावा किया कि यह मामला झूठा है और आरोपी पिछले चार साल आठ महीने से जेल में बंद है।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट का ध्यान इस तथ्य पर गया कि पीड़िता को अभियोजन पक्ष की गवाह सूची से हटा दिया गया है, और यह फैसला विशेष पोक्सो अदालत के जिम्नी आदेश में दर्ज है। हाईकोर्ट ने इसे असामान्य और चिंताजनक बताते हुए इस कदम के पीछे की परिस्थितियों की जांच का आदेश दिया है।
हाईकोर्ट की टिप्पणी: पीड़िता का बयान क्यों जरूरी?
हाईकोर्ट ने साफ किया कि दुष्कर्म जैसे गंभीर मामले में पीड़िता का बयान दर्ज करना निष्पक्ष और अंतिम सुनवाई के लिए बेहद जरूरी है। कोर्ट ने इस बात पर हैरानी जताई कि आखिर किन कारणों से पीड़िता को गवाहों की सूची से हटाया गया।
हाईकोर्ट ने करनाल की फास्ट ट्रैक विशेष अदालत (पोक्सो) के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश को निर्देश दिया कि वे इस मामले में विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें। इस रिपोर्ट में यह स्पष्ट करना होगा कि किन तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर पीड़िता को गवाह के रूप में हटाया गया। यह कदम न केवल मामले की गंभीरता को दर्शाता है, बल्कि न्याय प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की हाईकोर्ट की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करता है।
पहले के निर्देश और सुनवाई की प्रगति
इस साल जनवरी में हाईकोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई के दौरान कहा था कि पीड़िता की उम्र घटना के समय 16 वर्ष से कम थी, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
साथ ही, आरोपी के लंबे समय तक हिरासत में रहने को देखते हुए कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को अभियोजन पक्ष की गवाही को जल्द पूरा करने का निर्देश दिया था। इसके बावजूद, गवाह सूची से पीड़िता को हटाने का फैसला हाईकोर्ट के लिए आश्चर्यजनक रहा। अब इस मामले की अगली सुनवाई 27 मई 2025 को होगी, जिसमें विशेष अदालत की रिपोर्ट का इंतजार रहेगा।
नाबालिग पीड़िताओं के लिए न्याय का महत्व
यह मामला नाबालिग पीड़िताओं के लिए न्याय सुनिश्चित करने की चुनौतियों को उजागर करता है। पोक्सो एक्ट के तहत ऐसे मामलों में पीड़िता का बयान महत्वपूर्ण होता है,
क्योंकि यह मामले की सच्चाई को सामने लाने में मदद करता है। हाईकोर्ट का यह कदम न केवल इस मामले में पारदर्शिता लाएगा, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए भी एक मिसाल कायम करेगा। यह समाज को यह संदेश देता है कि नाबालिगों के खिलाफ अपराधों को गंभीरता से लिया जाएगा।
जनता और कानूनी विशेषज्ञों के लिए सलाह
इस मामले से समाज और कानूनी प्रणाली को यह सीख मिलती है कि दुष्कर्म जैसे संवेदनशील मामलों में पीड़िता की आवाज को दबाया नहीं जाना चाहिए।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि पीड़िता को गवाह सूची से हटाने जैसे कदमों के पीछे ठोस कारण होने चाहिए, और इन्हें पारदर्शी तरीके से दर्ज करना जरूरी है। जनता को सलाह दी जाती है कि वे ऐसे मामलों में जागरूक रहें और बच्चों को यौन शोषण से बचाने के लिए सामुदायिक स्तर पर कदम उठाएं। अगर कोई ऐसी घटना सामने आती है, तो तुरंत पुलिस या पोक्सो हेल्पलाइन से संपर्क करें।
भविष्य में क्या?
हाईकोर्ट की इस कार्रवाई से उम्मीद है कि करनाल दुष्कर्म मामले में न्याय प्रक्रिया और मजबूत होगी। विशेष अदालत की रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट यह तय करेगा कि पीड़िता को गवाह सूची में वापस शामिल किया जाए या अन्य कदम उठाए जाएं। यह मामला न केवल कानूनी दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक न्याय और नाबालिगों की सुरक्षा के लिए भी एक मील का पत्थर साबित हो सकता है।











