Minor Marriage: 13 year old girl marries 45 year old man in Nuh, father of 5 children absconding: नाबालिग निकाह (Minor Marriage) का एक सनसनीखेज मामला हरियाणा के नूंह जिले से सामने आया है। यहां एक 13 साल की बच्ची की शादी 45 साल के व्यक्ति से करा दी गई,
जो पहले से शादीशुदा और पांच बच्चों का पिता है। यह निकाह गांव के मदरसे में एक मौलवी ने संपन्न कराया। जब बच्ची के चाचा को इसकी भनक लगी, तो आरोपी बच्ची को लेकर फरार हो चुका था। इस घटना ने न केवल स्थानीय समुदाय को झकझोर दिया, बल्कि बाल विवाह (Child Marriage) के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जरूरत को भी उजागर किया है।
हादसे की पूरी कहानी Minor Marriage
नूंह के गांव महू चोपड़ा में एक 13 साल की बच्ची का निकाह 45 साल के रज्जाक नामक व्यक्ति से कराया गया। बच्ची के चाचा के अनुसार, बच्ची का पिता नशे का आदी है और उसने अपनी बेटी का निकाह रज्जाक से कर दिया। रज्जाक, जो पहले से दो बार शादी कर चुका है और पांच बच्चों का पिता है,
इस अपराध में मुख्य आरोपी है। निकाह को गांव के मदरसे में मौलवी ने संपन्न कराया, जो अब इस मामले में सह-आरोपी है। बच्ची के चाचा ने गांव के लोगों के साथ मिलकर बच्ची की तलाश शुरू की, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला।
पुलिस कार्रवाई और जांच
बच्ची के चाचा ने फिरोजपुर झिरका थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें बच्ची के पिता, रज्जाक और मौलवी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई। पुलिस ने नाबालिग निकाह (Minor Marriage) के इस मामले को गंभीरता से लिया और जांच शुरू कर दी।
पुलिस अब आरोपी रज्जाक और बच्ची की तलाश में जुटी है। यह मामला बाल विवाह निषेध अधिनियम (Child Marriage Prohibition Act) के तहत गंभीर अपराध माना जा रहा है। पुलिस का कहना है कि वे जल्द से जल्द बच्ची को बरामद करने और दोषियों को सजा दिलाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
समाज और कानून के लिए सबक
यह घटना समाज में बाल विवाह (Child Marriage) की गंभीर समस्या को उजागर करती है। नाबालिग निकाह (Minor Marriage) न केवल कानूनी अपराध है, बल्कि यह बच्चियों के भविष्य को भी खतरे में डालता है। बच्ची के चाचा ने बताया कि परिवार की आर्थिक तंगी और पिता की नशे की लत ने इस अपराध को बढ़ावा दिया।
इस मामले ने सामाजिक जागरूकता (Social Awareness) और सख्त कानूनी कार्रवाई की जरूरत को रेखांकित किया है। स्थानीय समुदाय और प्रशासन को मिलकर ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए कदम उठाने होंगे। यह घटना हमें याद दिलाती है कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा हम सबकी जिम्मेदारी है।












