Panchkula news 29 accused acquitted in dera sacha sauda violence case: पंचकूला की सड़कों पर 2017 में भड़की हिंसा की आग आज भी लोगों के जेहन में ताजा है। डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत सिंह उर्फ राम रहीम की सजा के बाद उपजी इस हिंसा ने पूरे हरियाणा को हिलाकर रख दिया था। लेकिन अब, इस मामले में एक नया मोड़ आया है। पंचकूला की जिला अदालत ने 29 आरोपियों को बरी कर दिया है, जिसने न केवल कानूनी हलकों में बल्कि आम लोगों के बीच भी चर्चा का माहौल बना दिया है। आखिर क्या थी इस हिंसा की कहानी और क्यों कोर्ट ने इतना बड़ा फैसला सुनाया? आइए, इसकी पूरी सैर करते हैं।
Panchkula news: हिंसा की वह काली रात
25 अगस्त 2017 का दिन पंचकूला के इतिहास में एक दुखद अध्याय के रूप में दर्ज है। उस दिन सीबीआई की विशेष अदालत ने डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत सिंह को दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराया था। इस फैसले के बाद उनके अनुयायियों की भीड़ ने पंचकूला की सड़कों पर उत्पात मचाया। आगजनी, तोड़फोड़ और सुरक्षाबलों पर हमले की घटनाओं ने शहर को अशांति की आग में झोंक दिया। इस हिंसा में कई लोग घायल हुए, सरकारी संपत्ति को भारी नुकसान हुआ और कानून-व्यवस्था की स्थिति चरमरा गई।
इसी हिंसा के सिलसिले में 29 लोगों पर दंगा, आगजनी और सुरक्षाबलों पर हमले जैसे गंभीर आरोप लगे थे। ये लोग पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली से थे। लेकिन अब, करीब आठ साल बाद, अदालत ने इन सभी को बरी कर दिया है। यह फैसला न केवल उन लोगों के लिए राहत की सांस लाया है, जिनके सिर पर ये आरोप थे, बल्कि इसने उस रात की सच्चाई पर भी नए सवाल खड़े किए हैं।
29 लोग बरी, लेकिन क्यों?
पंचकूला की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अजय कुमार की अदालत ने 9 अप्रैल 2025 को यह फैसला सुनाया। कोर्ट का कहना था कि अभियोजन पक्ष इन 29 लोगों को हिंसा में शामिल साबित करने में नाकाम रहा। गवाहों के बयानों में भी कोई ठोस सबूत नहीं मिला। सहायक कमांडेंट संतोष पंडित, जिन्होंने हिंसा के दौरान हमले की शिकायत दर्ज की थी, ने कोर्ट में कहा कि भीड़ इतनी ज्यादा थी कि वे किसी की पहचान नहीं कर पाए।
अन्य गवाह, जैसे एएसआई संदीप, वेद प्रकाश और जसमेर सिंह, भी आरोपियों को पहचानने में असफल रहे। कोर्ट ने माना कि बिना पुख्ता सबूतों के इन लोगों को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। इसलिए, संदेह का लाभ देते हुए सभी 29 आरोपियों को बरी कर दिया गया।
पहले भी हो चुकी है बरखास्तगी
यह पहला मौका नहीं है जब इस मामले में आरोपियों को राहत मिली हो। पहले भी कई लोग अलग-अलग FIRs के तहत बरी किए जा चुके हैं। हालांकि, कुछ मामले अभी भी कोर्ट में चल रहे हैं। इस हिंसा से जुड़े तीन आरोपियों की मौत भी हो चुकी है, जिसने इस केस को और जटिल बना दिया है।
उस दिन क्या हुआ था?
25 अगस्त 2017 को पंचकूला के सेक्टर-2 में हालात तब बेकाबू हो गए, जब गुरमीत सिंह के समर्थकों की भीड़ ने सुरक्षाबलों पर हमला कर दिया। सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के 40 जवान वहां कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात थे। लेकिन भीड़ ने उन पर पथराव किया और हिंसा भड़क उठी। इस हमले में एक जवान, धर्मेंद्र सिंह, घायल हो गए थे।
सेक्टर-5 थाने में इसके बाद कई धाराओं के तहत मामला दर्ज हुआ, जिसमें दंगा, सरकारी संपत्ति को नुकसान और सुरक्षाबलों पर हमला जैसे संगीन आरोप शामिल थे। लेकिन कोर्ट में जब ये मामला पहुंचा, तो अभियोजन पक्ष कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सका।













