Sensational scam in Manesar Municipal Corporation in Haryana, Fake payments and bribes worth crores: हरियाणा के गुरुग्राम में मानेसर नगर निगम (MCM) में एक बड़ा घोटाला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सफाई ठेके में अनियमितताओं और रिश्वतखोरी के आरोपों ने निगम को सुर्खियों में ला दिया है। ठेका कंपनी ने नगर निगम आयुक्त सहित वरिष्ठ अधिकारियों पर भुगतान रोकने, अनुचित जुर्माना लगाने और 3 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगने जैसे संगीन आरोप लगाए हैं। इस मामले में आयुक्त रेणु सोगन का तबादला हो चुका है, और जांच तेज हो गई है।
सफाई ठेके में अनियमितताओं का खुलासा Scam in Manesar Municipal Corporation
मानेसर नगर निगम में सफाई का ठेका संभाल रही दिल्ली की आकांक्षा इंटरप्राइजेज ने मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) को शिकायत भेजकर निगम के काले कारनामों का पर्दाफाश किया है। कंपनी का दावा है कि निगम अधिकारियों ने चार महीनों तक 8.5 करोड़ रुपये से अधिक के भुगतान को जानबूझकर रोका।
शिकायत में कहा गया है कि बिलों की मंजूरी के लिए शुरू में 24 लाख रुपये, फिर प्रशासनिक स्वीकृति के लिए 24 लाख रुपये और लंबित बिलों को पास करने के लिए 3 करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी गई। कंपनी के प्रतिनिधि शीशपाल सिंह राणा ने दस्तावेजी सबूतों के साथ यह भी आरोप लगाया कि अधिकारियों ने धमकी दी कि रिश्वत न देने पर उनका व्यवसाय बर्बाद कर दिया जाएगा।
आयुक्त का तबादला, जांच शुरू
शिकायत के बाद निगम आयुक्त रेणु सोगन को मुख्यालय तलब किया गया, और मंगलवार शाम को उनका तबादला कर दिया गया। ठेका कंपनी और आयुक्त को अपना पक्ष रखने के लिए चंडीगढ़ मुख्यालय बुलाया गया है।
इस बीच, निगम अधिकारियों ने कंपनी के आरोपों को झूठा बताते हुए इसे बदनामी का प्रयास करार दिया। उनका कहना है कि आकांक्षा इंटरप्राइजेज ठेके की शर्तों के अनुसार मैनपावर और मशीनरी की जरूरतें पूरी करने में विफल रही, जिसके चलते 4.3 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया।
विधायक की शिकायत ने खोली पोल
पटौदी की विधायक बिमला चौधरी ने कई बार निगम से सफाई कार्य की खराब स्थिति की शिकायत की थी। 11 अप्रैल को लिखे पत्र में उन्होंने आकांक्षा इंटरप्राइजेज पर नियमानुसार कार्रवाई और SWM पोर्टल के माध्यम से भुगतान की मांग की थी।
इसके बाद निगम ने जांच में पाया कि कंपनी ने 2023 से दिसंबर 2024 तक 1,997 सफाई कर्मचारियों के नाम पर करीब 90 करोड़ रुपये का भुगतान लिया, जबकि वास्तव में एक-चौथाई मैनपावर ही तैनात थी। इस आधार पर 4.5 करोड़ रुपये का चालान भी जारी किया गया।
फर्जी भुगतान और मैनपावर में गड़बड़ी
जांच में खुलासा हुआ कि जुलाई 2024 से फरवरी 2025 तक आकांक्षा इंटरप्राइजेज ने हर महीने 100% मैनपावर का भुगतान लिया, जबकि वास्तव में कर्मचारियों की संख्या कहीं कम थी।
निगम आयुक्त ने इस मामले में लापरवाही बरतने वाले कर्मचारियों को शो-कॉज नोटिस जारी किए और उच्च अधिकारियों से सख्त कार्रवाई की मांग की। विधायक ने भी SWM पोर्टल के जरिए पारदर्शी भुगतान की वकालत की थी, ताकि ऐसी अनियमितताओं पर रोक लग सके।
दोनों पक्षों के दावे
आकांक्षा इंटरप्राइजेज का कहना है कि उनका काम संतोषजनक रहा है, और इसीलिए उनका ठेका बढ़ाया गया था। कंपनी का दावा है कि निगम ने भ्रष्ट इरादों से उनके भुगतान रोके और रिश्वत की मांग की।
दूसरी ओर, आयुक्त रेणु सोगन ने आरोपों को निराधार बताया और कहा कि कंपनी की खराब सेवाओं और मैनपावर की कमी के कारण जुर्माना लगाया गया। सभी दस्तावेज सरकारी पोर्टल पर उपलब्ध हैं, और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा उनकी समीक्षा की जाती है।
पारदर्शिता की जरूरत
यह घोटाला मानेसर नगर निगम में प्रशासनिक लापरवाही और भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों को उजागर करता है। आम नागरिकों को स्वच्छता सेवाओं का लाभ नहीं मिल रहा, जबकि करोड़ों रुपये का खेल चल रहा है। सरकार से अपेक्षा है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो, और भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोकने के लिए सख्त नीतियां बनें।













