Haryana Women Safety Crime Data : हरियाणा में सरकारी फाइलों और पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक महिलाओं के खिलाफ दर्ज अपराधों के मामलों में पिछले कुछ वर्षों के दौरान तेजी से गिरावट आई है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) और हरियाणा पुलिस के ताजा आंकड़े पहली नजर में सुधार की तस्वीर दिखाते हैं। लेकिन औद्योगिक नगरी फरीदाबाद (faridabad crime against women) के बस अड्डों, कॉलेज परिसरों और बाजारों में छात्राओं और कामकाजी महिलाओं से बात करने पर यह स्पष्ट होता है कि जमीनी हालात इन कागजी दावों से काफी जुदा हैं।
आंकड़ों में राहत, जमीन पर खौफ
एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार हरियाणा (haryana police crime statistics) में वर्ष 2020 में महिलाओं के खिलाफ लगभग 13 हजार मामले दर्ज किए गए थे। यह संख्या 2021 में बढ़कर 16,658 और 2022 में 16,743 तक जा पहुंची थी, जहां महिला अपराध दर 118.7 प्रति लाख आबादी दर्ज की गई थी। वर्ष 2023 में दर्ज मामलों में कुछ कमी आई और यह संख्या 15,758 रही, जिसमें दुष्कर्म के 1,772 मामले शामिल थे।
अदालतों में धीमी सजा की दर
एनसीआरबी (ncrb haryana report) के 2023 के आंकड़े दर्शाते हैं कि उस वर्ष 6,006 मामलों में कानूनी सुनवाई पूरी हुई, लेकिन महज 818 मामलों में ही आरोपियों को सजा मिल सकी। यह केवल 13.6 प्रतिशत की मामूली दोषसिद्धि दर को दर्शाता है। वहीं 2022 में भी पुलिस चार्जशीट दर 57.2 प्रतिशत और दोषसिद्धि दर 13.2 प्रतिशत ही दर्ज की गई थी। कानूनी जानकारों का मानना है कि यह स्थिति दर्शाती है कि अदालतों में लंबी खिंचती न्यायिक प्रक्रिया न्याय पाने की राह में सबसे बड़ी बाधा बन जाती है।
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2025 में पुलिस रिकॉर्ड के आंकड़े
हरियाणा पुलिस के आंतरिक प्रशासनिक रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2024 में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 13,945 मामले दर्ज हुए थे। वर्ष 2025 में यह संख्या तेजी से घटकर 8,723 रह गई, जबकि केस निस्तारण दर लगभग 98 प्रतिशत बताई गई। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार दुष्कर्म के मामले 2021 के 1,716 से घटकर 2025 में 1,033 रह गए, जबकि अपहरण के मामले 2,958 से गिरकर 1,249 पर आ गए।
दर्ज मामलों में कमी का सच
विशेषज्ञों के मुताबिक एनसीआरबी और पुलिस के प्रशासनिक (haryana conviction rate women cases) आंकड़ों की तुलना सीधे तौर पर नहीं की जा सकती क्योंकि दोनों की डेटा वर्गीकरण प्रक्रिया अलग होती है। थानों में कम एफआईआर दर्ज होने का यह अर्थ कतई नहीं है कि समाज में अपराध उसी अनुपात में घट गए हैं। फरीदाबाद की युवतियों का कहना है कि परिवार की प्रतिष्ठा, समाज का दबाव, बदनामी का भय और पुलिसिया कार्रवाई के डर से अधिकांश पीड़िताएं थानों की चौखट तक पहुंच ही नहीं पातीं। #HaryanaNews #Faridabad #WomenSafety #CrimeStatistics #GroundReport











