Sampla News Flooding (सांपला) : सांपला बाईपास से लेकर रोहद टोल प्लाजा तक नेशनल हाईवे-9 पर 2 किलोमीटर में पिछले एक महीने से करीब दो फीट बरसाती पानी भरा हुआ है। जलभराव के कारण न केवल लगातार सड़क हादसे हो रहे हैं, बल्कि हाईवे से सटी कई निजी कंपनियों में भी पानी घुस चुका है, जिससे कंपनियों को अस्थाई रूप से बंद करना पड़ा है। इसका सीधा असर हजारों गरीब मजदूरों और कर्मचारियों पर पड़ा है, जिनकी रोजी-रोटी छिन गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश से हालात और बिगड़ते जा रहे हैं।
जलभराव ने बढ़ाई मुश्किलें
एनएचएआई की लापरवाही के चलते यह जलभराव हुआ है। लोगों ने आरोप लगाया कि एनएचएआई हर रोज टोल के माध्यम से करोड़ों रुपए वसूल रहा है, लेकिन सड़क की स्थिति पर कोई ध्यान नहीं दे रहा। स्थानीय निवासियों ने बताया कि उन्होंने कई बार इस गंभीर समस्या को लेकर उच्च अधिकारियों को सूचित किया है।
दो दिन पहले डीसी सचिन गुप्ता व सांपला के एसडीएम उत्सव आनंद को ज्ञापन सौंपा गया था, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि एनएचएआई केवल लाखों रुपए की टोल वसूली कर रहा है, लेकिन जल निकासी की कोई व्यवस्था नहीं की गई।
जलभराव के कारण हादसे हो रहे हैं और आसपास की निजी कंपनियां बंद हो गई हैं, जिससे हजारों लोग बेरोजगार हो गए हैं। लोगों ने कहा कि जब एनएचएआई समस्याएं हल नहीं कर सकता, तो उसे टोल वसूलने का भी कोई अधिकार नहीं है।
जल्दी होगी पानी निकासी की व्यवस्था
सांपला एसडीएम उत्सव आनंद ने कहा की रोड सेफ्टी के अंतर्गत मामला अधिकारियों के पास भेजा है। इसके अलावा एनएचएआई के अधिकारियों को निर्देश दिए है। जल्द ही इस बरसाती पानी की निकासी करवाई जाएगी। टोल कंपनी के खिलाफ उच्च अधिकारियों के पास रिपोर्ट भेजी जाएगी। निजी कंपनियों के पानी निकासी की व्यवस्था करवाई जाएगी।
2 दिन में हादसों में 36 लोग घायल
जलभराव के चलते वाहन चालक हाईवे पर गलत दिशा में गाड़ियां चलाने को मजबूर हैं, जिससे हर घंटे कोई न कोई हादसा हो रहा है। बीते दो दिनों में करीब 36 लोग घायल हो चुके हैं। इसी हाईवे से केंद्रीय मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा भी हाल ही में दिल्ली से रोहतक लौटे, लेकिन उन्होंने न तो स्थानीय लोगों से मुलाकात की और न ही एनएचएआई अधिकारियों को कोई निर्देश दिए। इससे लोगों में गुस्सा और निराशा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अब उन्हें इस समस्या के समाधान की कोई उम्मीद नहीं बची है, क्योंकि न तो प्रशासन और न ही सरकार उनकी सुन रही है।













