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Kaithal depot: कैथल डिपो की 8 बसें दिसंबर पहले हफ्ते में होंगी कंडम, जिले को 250 बस की जरूरत

On: नवम्बर 12, 2025 5:00 अपराह्न
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Kaithal depot: कैथल डिपो की 8 बसें दिसंबर पहले हफ्ते में होंगी कंडम, जिले को 250 बस की जरूरत
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कैथल (Kaithal depot)। रोडवेज बसों का फिर एक बार बेड़ा घटेगा। दिसंबर के पहले सप्ताह में आठ बसें जर्जर हो जाएगी। ये बसे अपने निर्धारित 10 साल पूरे कर लेगी। अब डिपो के पास 174 बसें है। इन आठ बसों के रूट से जाने पर संख्या 166 रह जाएगी। बस कंडम होने के बाद यात्रियों को भी परेशानी झेलनी पड़ेगी।

Kaithal depot: ऐसे कंडम घोषित होती है बस

रोडवेज कैथल के वर्कशाप मैनेजर अनिल कुमार ने बताया कि दिसंबर के महीने में आठ बसें अपने 10 वर्ष रूट पर चलने के पूरे कर लेगी। इसके बाद बस कंडम हो जाती है। यात्रियों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं आने दी जा रही है। सभी रूटों पर बसों का संचालन किया जा रहा है। किसी को बस संबंधित दिक्कत है, तो रोडवेज विभाग में संपर्क कर सकते हैं।

बता दें कि कैथल डिपो में पानीपत, झज्जर, रोहतक, भिवानी व रेवाड़ी से आई हुई लगभग 52 पुरानी बसें रूटों पर चल रही है। कई बार ये बसें रूट पर खराब हो जाती है। यात्रियों के साथ- साथ बस के चालक व परिचालक को परेशानी होती है। यात्री समय पर अपने गतव्यं पर नहीं पहुंच पाते है। अभी नई बसें आने की ओर कोई उम्मीद नहीं है।

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84 बसों की कमी

गौरतलब है कि कैथल डिपो में जनसंख्या के हिसाब से 250 बसों का बेड़ा है। आठ बस जर्जर होने के बाद डिपो में 84 बसों की कमी रह जाएगी। कैथल डिपो में फिलहाल 197 बसें विभाग चला रहा है। जिनमें से 23 बसें किलोमीटर स्कीम यानी लीज की है। बसों के कंडम होने के बाद ज्यादातर ग्रामीण रूटों पर प्रभाव पड़ेगा।

इन रूटों पर चल रही कंडम बसें

विदित रहे कि करनाल, जींद, गुहला चीका, कुरुक्षेत्र, असंध सहित रूट पर बसें चल रही है। जर्जर बस होने के कारण बीच रास्ते खराब भी हो रही है। दो दिन पहले भी एक बस असंध रूट पर खराब हो गई थी। विभाग की क्रेन बस को लेकर डिपो में आई थी। विभाग भी मरम्मत करवाकर बस चलाने की पूरा प्रयास करता है, लेकिन खटारा होने के कारण क्लीच प्लैट, इंजन सहित अन्य तकनीकी खराबी आती रहती है।

यात्री रणधीर, रामकिशन व मनोज ने बताया कि रोडवेज डिपो में पुरानी काफी बसें है। खटारा पुरानी बसें बीच रास्ते खड़ी हो जाती है। खटारा बसों की जगह नई बसें खरीदी जाए। हर महीने जिला की जनसंख्या बढ़ती है। बसों की संख्या भी बढ़नी चाहिए, ताकि यात्रियों को आने- जाने में कोई परेशानी न हो।

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गांव से शहर तक आने में विद्यार्थियों को सबसे ज्यादा परेशानी उठानी पड़ेगी। कंडम होने वाली ज्यादातर बसें गांव के रूटों पर स्कूल, कॉलेजों से लाने वाले विद्यार्थियों के लिए लगाई हुई है। बता दें कि 10 वर्ष पूरे होने के बाद बसों का निरीक्षण मुख्यालय की तकनीकी गठित टीम करती है। टीम की रिपोर्ट के बाद रूटों से बसों को हटा दिया जाता है।

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अमित गुप्ता

पत्रकारिता में पिछले 30 वर्षों का अनुभव। दैनिक भास्कर, अमर उजाला में पत्रकारिता की। दैनिक भास्कर में 20 वर्षों तक काम किया। अब अपने न्यूज पोर्टल हरियाणा न्यूज पोस्ट (Haryananewspost.com) पर बतौर संपादक काम कर रहा हूं। खबरों के साथ साथ हरियाणा के हर विषय पर पकड़। हरियाणा के खेत खलियान से राजनीति की चौपाल तक, हरियाणा सरकार की नीतियों के साथ साथ शहर के विकास की बात हो या हर विषयवस्तु पर लिखने की धाकड़ पकड़। म्हारा हरियाणा, जय हरियाणा।

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