Ambala Poster Controversy Asim Goyal alleges political conspiracy: हरियाणा के अंबाला में एक पोस्टर विवाद ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है। पूर्व राज्य मंत्री असीम गोयल पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाने वाले दो लोगों के खिलाफ उन्होंने कड़ा रुख अपनाया है। गोयल ने इसे अपने खिलाफ साजिश करार देते हुए सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। इस विवाद ने न केवल स्थानीय लोगों का ध्यान खींचा है, बल्कि सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चा बटोर रही है।
विवाद की जड़ में क्या है? Ambala Poster Controversy
अंबाला के बहबलपुर गांव के दलजीत सिंह और पंच रवि कुमार ने पूर्व राज्य मंत्री असीम गोयल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि गोयल ने अपनी सत्ता का गलत इस्तेमाल कर पुलिस प्रशासन पर दबाव बनाया। शहर के कई सार्वजनिक स्थानों पर चस्पा किए गए पोस्टरों में दोनों ने इच्छा मृत्यु या इंसाफ की मांग की है। इन पोस्टरों में गोयल का नाम प्रमुखता से उल्लेखित है। साथ ही, सोशल मीडिया पर एक पोस्ट भी वायरल हो रही है, जिसमें एक केस का जिक्र करते हुए गोयल पर प्रशासन को प्रभावित करने का आरोप लगाया गया है।
असीम गोयल का जवाब
मंगलवार को इस मामले पर असीम गोयल ने अपनी चुप्पी तोड़ी और आरोप लगाने वालों पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने दलजीत सिंह और रवि कुमार को “लोमड़ी” करार देते हुए कहा कि यह उनके खिलाफ एक सोचा-समझा राजनीतिक षड्यंत्र है। गोयल के अनुसार, कुछ लोग धनबल और बाहुबल के दम पर उनकी छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनके पास जनसमर्थन की कमी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मामला गांव के अंबेडकर भवन से जुड़ा है और यह तीन लोगों का आपसी विवाद है, जिसे कुछ लोग राजनीतिक रंग देकर उनके खिलाफ इस्तेमाल कर रहे हैं।
सरपंच का पक्ष
बहबलपुर गांव के मौजूदा सरपंच प्रतिनिधि किरपाल सिंह ने भी इस विवाद में अपनी बात रखी। उन्होंने दलजीत सिंह और रवि कुमार पर अंबेडकर भवन पर कब्जा करने की कोशिश का आरोप लगाया। किरपाल सिंह के मुताबिक, ये लोग पिछले 15 सालों से भवन को लेकर अड़चनें पैदा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पूर्व सरपंचों के कार्यकाल में भी इन लोगों ने इसी तरह की हरकतें की थीं। गांव वालों ने इस मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए अंबाला के डिप्टी कमिश्नर को पत्र लिखकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।
सियासी माहौल में तनाव
यह विवाद अब सियासी रंग ले चुका है। पोस्टरों और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए मामला आम लोगों तक पहुंच गया है, जिससे अंबाला में चर्चाओं का बाजार गर्म है। गोयल का दावा है कि यह उनके राजनीतिक विरोधियों की चाल है, जो सामने से मुकाबला करने की बजाय छिपकर साजिश रच रहे हैं। इस बीच, स्थानीय लोग इस मामले में सच्चाई जानने के लिए उत्सुक हैं और प्रशासन से निष्पक्ष जांच की उम्मीद कर रहे हैं।
आगे क्या?
यह विवाद अंबाला की सियासत में एक नया मोड़ ला सकता है। गोयल ने स्पष्ट किया है कि वे इस मामले को कानूनी और जनता के सामने पूरी मजबूती से लड़ेंगे। दूसरी ओर, गांव वालों और सरपंच की ओर से डीसी को लिखा गया पत्र इस मामले में नई जानकारी सामने ला सकता है। फिलहाल, यह देखना दिलचस्प होगा कि यह विवाद किस दिशा में बढ़ता है और क्या सच्चाई सामने आ पाती है।












