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Arbitrariness of schools in Haryana: भारी बस्तों का बोझ ढो रहे बच्चे, अभिभावक परेशान

On: अप्रैल 22, 2025 11:11 पूर्वाह्न
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Arbitrariness of schools in Haryana: भारी बस्तों का बोझ ढो रहे बच्चे, अभिभावक परेशान
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Arbitrariness of schools in Haryana Children carrying the burden of heavy bags: हरियाणा के स्कूलों में बच्चे भारी बस्तों का बोझ ढोने को मजबूर हैं, क्योंकि स्कूल बैग नीति 2020 के नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है। इस लापरवाही का खामियाजा बच्चों को कमर दर्द और कंधों की समस्याओं के रूप में भुगतना पड़ रहा है। अभिभावक भी इस स्थिति से चिंतित हैं। आइए, इस गंभीर मुद्दे को समझें और जानें कि स्कूल बैग के नियम क्या कहते हैं।

स्कूल बैग नीति की अनदेखी Arbitrariness of schools in Haryana

हरियाणा में स्कूल बैग नीति 2020 के तहत पहली से दसवीं कक्षा तक के बच्चों के लिए बस्ते का वजन तय किया गया है। इस नीति के अनुसार, बस्ते का अधिकतम वजन 5 किलोग्राम तक सीमित है, और बच्चों के गले में पानी की बोतलें लटकाने पर भी रोक है। लेकिन निजी और कुछ सरकारी स्कूल इन नियमों को हल्के में ले रहे हैं। अंबाला कैंट में दैनिक जागरण की एक जांच में खुलासा हुआ कि स्कूल छूटने के बाद पहली कक्षा के बच्चों के गले में पानी की बोतलें और अभिभावकों के हाथों में अतिरिक्त बोझ दिखाई दिया। यह स्थिति स्कूल संचालकों की लापरवाही को उजागर करती है।

बच्चों के स्वास्थ्य पर खतरा

भारी बस्तों का बोझ बच्चों के शारीरिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन रहा है। अंबाला कैंट के नागरिक अस्पताल की फिजीशियन डॉ. पल्लवी ने बताया कि करीब 30 प्रतिशत बच्चे कमर दर्द और कंधों की समस्याओं की शिकायत लेकर उनके पास आ रहे हैं। उनका कहना है कि अगर यह स्थिति जारी रही, तो भविष्य में बच्चों में ऐसी स्वास्थ्य समस्याएं और बढ़ सकती हैं। डॉ. पल्लवी ने अभिभावकों को सलाह दी कि वे बच्चों के बस्ते का वजन नियमित रूप से जांचें और स्कूलों से नीति का पालन करने की मांग करें।

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अभिभावकों की चिंता

अभिभावक भी बच्चों के भारी बस्तों को लेकर परेशान हैं। कई माता-पिता का कहना है कि स्कूलों की मनमानी के कारण उनके बच्चे हर दिन भारी बोझ ढोने को मजबूर हैं। पानी की बोतलें, अतिरिक्त किताबें, और अन्य सामान बस्ते का वजन और बढ़ा रहे हैं। अभिभावकों का मानना है कि स्कूलों को नियमों का पालन करना चाहिए, ताकि बच्चों का बचपन इस बोझ तले न दबे।

स्कूल बैग नीति के नियम

हरियाणा की स्कूल बैग नीति 2020 में बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट दिशानिर्देश दिए गए हैं। इनके अनुसार:
पहली और दूसरी कक्षा के लिए बस्ते का वजन 1.5 किलोग्राम से अधिक नहीं होना चाहिए।
तीसरी से पांचवीं कक्षा के लिए 2 से 3 किलोग्राम तक।
छठी और सातवीं कक्षा के लिए 4 किलोग्राम तक।
आठवीं और नौवीं कक्षा के लिए 4.5 किलोग्राम तक।
दसवीं कक्षा के लिए अधिकतम 5 किलोग्राम।
इन नियमों का उद्देश्य बच्चों के शारीरिक विकास को सुरक्षित रखना है, लेकिन स्कूलों की अनदेखी इसे बेकार कर रही है।

समाधान की जरूरत

यह स्थिति न केवल बच्चों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाती है। स्कूल संचालकों को इस नीति को गंभीरता से लागू करना होगा। अभिभावकों को भी जागरूक होकर स्कूलों से जवाब मांगना चाहिए। शिक्षा विभाग को नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि बच्चे बिना बोझ के अपनी पढ़ाई पर ध्यान दे सकें।

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बच्चों का भविष्य है प्राथमिकता

बच्चे देश का भविष्य हैं, और उनका स्वास्थ्य उनकी शिक्षा जितना ही महत्वपूर्ण है। हरियाणा के स्कूलों को यह समझना होगा कि नियमों की अनदेखी न केवल बच्चों को नुकसान पहुंचा रही है, बल्कि अभिभावकों का भरोसा भी तोड़ रही है। उम्मीद है कि जल्द ही इस दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे, ताकि बच्चे बस्ते के बोझ से मुक्त होकर अपने सपनों की उड़ान भर सकें।

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अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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