चंडीगढ़, 26 अप्रैल (हरियाणा न्यूज पोस्ट)। हरियाणा में अब आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं के लिए लंबा इंतजार इतिहास बनने जा रहा है। मुख्यमंत्री नायब सैनी के नेतृत्व वाली सरकार ने राज्य के एमरजेंसी एंबुलेंस नेटवर्क को नई रफ्तार देने का फैसला किया है। स्वास्थ्य विभाग के बेड़े में 296 नई अत्याधुनिक एंबुलेंस शामिल की जा रही हैं। सरकार का सीधा लक्ष्य यह है कि शहरी और ग्रामीण, दोनों क्षेत्रों में किसी भी दुर्घटना या मेडिकल इमरजेंसी की सूचना मिलने के 10 मिनट के भीतर एंबुलेंस मौके पर पहुँच जाए। यह कदम उन ‘गोल्डन ऑवर्स’ को बचाने के लिए उठाया गया है, जहाँ चंद मिनटों की देरी किसी की जान पर भारी पड़ जाती है।
लाइफ सपोर्ट सिस्टम से लैस होगा नया बेड़ा
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के निदेशक डॉ. वीरेंद्र यादव के अनुसार, इन नई एंबुलेंस को दो श्रेणियों में बांटा गया है। बेड़े में 70 ऐसी एंबुलेंस होंगी जो ‘एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट’ (ALS) सुविधाओं से युक्त होंगी। इनमें कार्डियक मॉनिटर, डिफिब्रिलेटर और ऑक्सीजन सपोर्ट जैसी मशीनें लगी होंगी, जो गंभीर हार्ट पेशेंट या ट्रामा मरीजों के लिए अस्पताल पहुँचने से पहले ‘मिनी आईसीयू’ का काम करेंगी। इसके अलावा, 167 बेसिक लाइफ सपोर्ट (BLS) एंबुलेंस की खरीद प्रक्रिया भी अंतिम चरण में है, जबकि 59 एंबुलेंस आउटसोर्सिंग के माध्यम से संचालित की जाएंगी।
तकनीक और ट्रेनिंग से मिलेगी रफ्तार
नई एंबुलेंस केवल संख्या नहीं बढ़ाएंगी, बल्कि पूरे सिस्टम को डिजिटल रूप से अपग्रेड करेंगी। इनमें रियल-टाइम जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम लगाया गया है, जिससे कंट्रोल रूम को एंबुलेंस की सटीक लोकेशन पता रहेगी। साथ ही, ऑटोमैटिक कॉल-रूटिंग सिस्टम के जरिए नजदीकी एंबुलेंस को तुरंत मैसेज मिलेगा। डॉक्टर यादव ने बताया कि एंबुलेंस चालकों, मेडिकल टेक्नीशियनों और कॉल सेंटर ऑपरेटरों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है ताकि कॉल आने से लेकर अस्पताल के बेड तक मरीज को पहुँचाने में कोई कम्युनिकेशन गैप न रहे।
सड़क हादसों में घटेगी मृत्यु दर
हरियाणा से गुजरने वाले नेशनल हाईवे और राज्य मार्गों पर होने वाले सड़क हादसों को देखते हुए यह विस्तार काफी अहम माना जा रहा है। अक्सर हादसे के बाद एंबुलेंस के घंटों न पहुँचने की खबरें आती थीं, लेकिन अब डायरेक्ट कम्युनिकेशन डिवाइस के जरिए रिस्पॉन्स टाइम को न्यूनतम स्तर पर लाया जाएगा। एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस में मौजूद दवाओं और लाइफ-सेविंग इक्विपमेंट्स की मदद से मरीज की स्थिति को मौके पर ही स्थिर (Stabilize) किया जा सकेगा, जिससे गंभीर मरीजों के बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाएगी।
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