Bhiwani News (बवानीखेड़ा) : बवानीखेड़ा में इस साल भारी बारिश और जलभराव ने कई गांवों को बाढ़ जैसी स्थिति में ला दिया। खेतों से लेकर गलियों तक पानी भर गया, और लोग परेशान हो गए। बवानीखेड़ा शहर, लोहारी जाट, सागवान, पुर और धनाना जैसे गांव जलमग्न हो गए, लेकिन इन सबके बीच बलियाली गांव एक मिसाल बनकर उभरा।
इस गांव ने पंचायत और ग्रामीणों की एकजुटता के साथ पहले से मास्टर प्लानिंग की, जिसके चलते यह बाढ़ के कहर से बचा रहा। पंचायत ने बारिश से पहले ही तालाब खाली करवाए और गांव के चारों ओर नालों व रास्तों की सफाई करवाई, जिससे पानी की निकासी आसान हो गई।
समय रहते की गई तैयारी
बलियाली पंचायत ने बारिश से पहले तालाबों को खाली करवाया ताकि वे अतिरिक्त पानी समा सकें। नालों और रास्तों की सफाई ने जलभराव को रोका। इसका नतीजा यह हुआ कि जब आसपास के गांव जैसे सागवान और लोहारी जाट बाढ़ से जूझ रहे थे, बलियाली सुरक्षित रहा। ग्रामीणों का कहना है कि अगर बाकी गांव और प्रशासन भी पहले से ऐसी योजना बनाएं, तो हर साल आने वाली बाढ़ जैसी स्थिति से बचा जा सकता है।
सरपंच सचिन सरदाना ने बताया कि पहले हर बारिश में भूरिया वाली बस्ती, कमाना जोहड़ और वाल्मीकि बस्ती डूब जाती थीं। इस बार तालाबों की गहरी खुदाई और पानी निकासी के लिए पाइप लगवाने से इन बस्तियों को बचाया गया।
ग्रामीणों की एकजुटता बनी ताकत
पिछले हफ्ते बलियाली सब-माइनर दो बार टूटी, और पानी जयमलपुरा बस्ती की ओर बढ़ने लगा। लेकिन सरपंच सचिन सरदाना की अगुवाई में पंचायत और ग्रामीणों ने तुरंत मोर्चा संभाला और माइनर को पाट दिया, जिससे बस्ती डूबने से बच गई। करीब दस दिन पहले गांव के स्टेडियम के पास वाला जोहड़ ओवरफ्लो हो गया, और पानी ओड बस्ती की ओर बढ़ने लगा।
पंचायत ने तुरंत पोकलैंड और जेसीबी मशीनें भेजीं और रातों-रात मिट्टी का बांध बनाकर पानी को रोका। ग्रामीणों के सहयोग से ओड बस्ती को बचा लिया गया। यह मॉडल अब अन्य गांवों के लिए प्रेरणा बन रहा है, जो दिखाता है कि सही योजना और एकजुटता से आपदा को टाला जा सकता है।













