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Crops burnt in Haryana: 8 जिलों में 900 एकड़ फसल जली, सरकार ने मांगी रिपोर्ट, मुआवजे की मांग तेज

On: April 20, 2025 9:40 AM
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Crops burnt in Haryana: 8 जिलों में 900 एकड़ फसल जली, सरकार ने मांगी रिपोर्ट, मुआवजे की मांग तेज
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Crops burnt in Haryana 900 acres of crops burnt in 8 districts: हरियाणा के किसानों पर दोहरी मार पड़ी है। आठ जिलों में 900 एकड़ गेहूं की फसल आग की भेंट चढ़ गई, जबकि बारिश ने मंडियों में खुले अनाज को भीगा दिया। मुख्यमंत्री नायब सैनी ने कृषि विभाग से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, और सरकार 2% नमी छूट देने पर विचार कर रही है। विपक्ष ने मुआवजे की मांग उठाई है, लेकिन मंडियों में धीमा उठान और अपर्याप्त इंतजाम किसानों की मुश्किलें बढ़ा रहे हैं। आइए, इस संकट की पूरी कहानी और इसके समाधान की दिशा को समझें।

आग का कहर: 900 एकड़ फसल राख Crops burnt in Haryana

हरियाणा के झज्जर, कुरुक्षेत्र, जींद, यमुनानगर, हिसार, सिरसा, भिवानी, और फतेहाबाद जिलों में शुक्रवार रात आंधी के कारण बिजली के तारों में शॉर्ट-सर्किट से खेतों में आग लग गई। इसने 900 एकड़ गेहूं की फसल को राख कर दिया। झज्जर में 200 एकड़ और कुरुक्षेत्र में 57 एकड़ फसल सबसे ज्यादा प्रभावित हुई। कई जगहों पर पशु भी आग की चपेट में आकर मर गए। गुस्साए किसानों ने झज्जर मफसल में सड़क जाम कर मुआवजे की मांग की। मुख्यमंत्री नायब सैनी ने कृषि विभाग को निर्देश दिए हैं कि आग की घटनाओं का समय, स्थान, और कारणों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार करें।

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बारिश ने बढ़ाई मुश्किल: नमी छूट की संभावना

पिछले दो दिनों की बूंदाबांदी ने मंडियों और खेतों में खुले गेहूं को भीगा दिया, जिससे नमी की शिकायतें बढ़ गई हैं। वर्तमान में 12% नमी छूट की अनुमति है, लेकिन सरकार भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) से अनुरोध कर 2% अतिरिक्त छूट देने पर विचार कर रही है। यह कदम किसानों को राहत दे सकता है, क्योंकि नमी के कारण अनाज की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। प्रशासन ने मंडी बोर्ड, कृषि विभाग, और खाद्य आपूर्ति विभाग को निर्देश दिए हैं कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर हर दाने की खरीद सुनिश्चित हो।

मंडियों में धीमा उठान: किसानों की चिंता

हरियाणा की 417 मंडियों में गेहूं की आवक तेज है, लेकिन उठान की रफ्तार धीमी है। शनिवार तक 52.40 लाख मीट्रिक टन (LMT) गेहूं मंडियों में आ चुका था, लेकिन केवल 16.44 LMT ही उठाया गया। 45.43 LMT गेहूं खरीद लिया गया है, और सरकार का दावा है कि 2,65,064 किसानों को 2498 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है। फिर भी, मंडी लेबर कांट्रेक्टर (MLC) और मंडी ट्रांसपोर्ट कांट्रेक्टर (MTC) की कमी के कारण उठान में देरी हो रही है। अनुमान है कि 22-24 LMT गेहूं की और आवक होगी, जिसके लिए मंडियों में तिरपाल और बारदाने की कमी चिंता का विषय है।

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विपक्ष का हमला: मुआवजे की मांग

विपक्षी पार्टियों ने सरकार पर किसानों की अनदेखी का आरोप लगाया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि मंडियां गेहूं से अटी पड़ी हैं, और किसान सड़कों पर अनाज रखने को मजबूर हैं। उन्होंने आग और बारिश से हुए नुकसान के लिए तत्काल मुआवजे की मांग की। इनेलो नेता अभय सिंह चौटाला ने चेतावनी दी कि अगर मुआवजा नहीं मिला, तो पार्टी सड़कों पर उतरेगी। उन्होंने कहा कि 30 लाख टन से ज्यादा गेहूं का उठान बाकी है, और 1000 एकड़ से ज्यादा फसल आग में जल गई। विपक्ष ने सरकार की तैयारियों पर सवाल उठाते हुए तिरपाल, बारदाने, और मौसम प्रबंधन की कमी को जिम्मेदार ठहराया।

किसानों के लिए सुझाव

अगर आप हरियाणा के किसान हैं, तो अपनी फसल की सुरक्षा के लिए कुछ कदम उठाएं। मंडी में गेहूं ले जाने से पहले नमी स्तर की जांच करें और उसे सूखा रखें। मंडी बोर्ड या कृषि विभाग से संपर्क कर तिरपाल और बारदाने की उपलब्धता सुनिश्चित करें। अगर आपकी फसल को आग या बारिश से नुकसान हुआ है, तो तुरंत स्थानीय प्रशासन को सूचित करें और मुआवजे के लिए आवेदन करें। MSP खरीद की जानकारी के लिए मंडी अधिकारियों से संपर्क रखें। अपने आसपास के किसानों को भी इन समस्याओं और समाधानों के बारे में बताएं।

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हरियाणा के किसान इस समय आग, बारिश, और मंडियों में धीमे उठान की तिहरी मार झेल रहे हैं। 900 एकड़ फसल का नुकसान और मुआवजे की मांग इस संकट की गंभीरता को दर्शाती है। यह खबर उन सभी के लिए जरूरी है, जो कृषि और किसानों की स्थिति से जुड़े हैं। यह सरकार और समाज को किसानों के प्रति अपनी जिम्मेदारी याद दिलाती है।

अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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