IAS success story, Inspiring story of two daughters of a teacher, became IAS together, SDM Saumya Mishra of Mirzapur created history: उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव से निकलकर दिल्ली में अपनी मेहनत और लगन से दो बहनों ने वह मुकाम हासिल किया, जो लाखों युवाओं का सपना होता है।
शिक्षक राघवेंद्र कुमार मिश्रा की दो बेटियों, सौम्या मिश्रा और उनकी छोटी बहन ने एक साथ IAS परीक्षा में सफलता हासिल कर न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरणा बन गईं। सौम्या मिश्रा वर्तमान में मिर्जापुर जिले में SDM के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं। यह कहानी मेहनत, पारिवारिक समर्थन और सपनों को सच करने की जिद की है।
गांव से दिल्ली तक का सफर IAS success story
उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के असोहा ब्लॉक के अजयपुर गांव में जन्मीं सौम्या और उनकी छोटी बहन का बचपन सादगी भरे माहौल में बीता। उनके पिता राघवेंद्र कुमार मिश्रा, जो दिल्ली सरकार में शिक्षक (प्रवक्ता) हैं, 1997 में अपने परिवार के साथ दिल्ली आ गए। मां रेनू मिश्रा एक गृहिणी हैं, जिन्होंने अपनी बेटियों को हमेशा प्रोत्साहित किया।
दिल्ली की चकाचौंध में बसने के बावजूद, दोनों बहनों का दिल आज भी अपने गांव की मिट्टी से जुड़ा है। सौम्या बताती हैं कि गांव का सादा माहौल और वहां की यादें उन्हें हमेशा प्रेरित करती हैं।
सौम्या मिश्रा: PCS से IAS तक का शानदार सफर
सौम्या मिश्रा की कहानी किसी प्रेरणादायक फिल्म से कम नहीं है। उन्होंने PCS 2021 की परीक्षा में अपने दूसरे प्रयास में टॉप टेन में दूसरा स्थान हासिल किया। इसके बाद उन्होंने 2021 में SDM के रूप में अपनी ट्रेनिंग पूरी की और अब मिर्जापुर जिले में SDM के रूप में कार्यरत हैं।
उनकी छोटी बहन ने भी IAS परीक्षा में शानदार प्रदर्शन किया। दोनों बहनों ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता को दिया, जिन्होंने हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया। सौम्या कहती हैं, “हमारे माता-पिता ने हमें सपने देखने की आजादी दी और उन्हें पूरा करने का आत्मविश्वास भी।”
माता-पिता: सफलता के पीछे की ताकत
राघवेंद्र और रेनू मिश्रा ने अपनी बेटियों को न केवल शिक्षा का महत्व सिखाया, बल्कि मेहनत और अनुशासन का पाठ भी पढ़ाया। एक शिक्षक के रूप में राघवेंद्र ने अपनी बेटियों को हमेशा कठिन परिश्रम और धैर्य का मूल्य समझाया।
दूसरी ओर, मां रेनू ने घर में ऐसा माहौल बनाया कि बेटियां बिना किसी दबाव के अपने लक्ष्यों की ओर बढ़ सकें। दोनों बहनों का कहना है कि उनके माता-पिता उनकी सबसे बड़ी ताकत रहे हैं।
प्रेरणा का संदेश: मेहनत और लगन से कुछ भी संभव
सौम्या और उनकी बहन की यह सफलता उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो IAS बनने का सपना देखते हैं। उनकी कहानी बताती है कि सही मार्गदर्शन, पारिवारिक समर्थन और कठिन मेहनत से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है।
सौम्या का कहना है, “सपने बड़े हों या छोटे, अगर आप मेहनत और विश्वास के साथ आगे बढ़ें, तो सफलता जरूर मिलेगी।” उनकी इस उपलब्धि ने न केवल उनके गांव अजयपुर, बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश को गौरवान्वित किया है।
निष्कर्ष: एक परिवार की जीत
यह कहानी केवल दो बहनों की नहीं, बल्कि एक पूरे परिवार की जीत है। राघवेंद्र मिश्रा की बेटियों ने साबित कर दिया कि साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले लोग भी असाधारण उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं। सौम्या मिश्रा और उनकी बहन की यह उपलब्धि युवाओं को यह विश्वास दिलाती है कि मेहनत और समर्पण से हर सपना हकीकत में बदला जा सकता है।












