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Kurukshetra News: सरस्वती नदी के सहायक मार्गों से हरियाणा बचेगा बाढ़ से, 3 किमी नक्शा तैयार!

On: सितम्बर 8, 2025 8:04 पूर्वाह्न
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Kurukshetra News: सरस्वती नदी के सहायक मार्गों से हरियाणा बचेगा बाढ़ से, 3 किमी नक्शा तैयार!
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Kurukshetra News, (कुरुक्षेत्र) : सरस्वती नदी का पुराना नदी मार्ग हरियाणा सहित उत्तर भारत को बाढ़ से बचाने का बड़ा काम करेगा। इसके लिए कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर रिसर्च ऑन सरस्वती नदी के निदेशक और जियोलॉजी विभाग के अध्यक्ष प्रो. एआर चौधरी ने 3 हजार किलोमीटर से अधिक का नक्शा तैयार किया है। इसमें सरस्वती नदी के साथ-साथ सहायक नदियां मारकंडा, छगर, टांगरी और चौतंग को भी शामिल किया गया है।

प्रो. चौधरी ने कहा कि बाढ़ नियंत्रण के लिए ये पुराने नदी मार्ग बहुत कारगर साबित हो सकते हैं। ये मार्ग जल निकासी के सुरक्षित रास्ते हैं, जो बरसात और बाढ़ के दौरान अतिरिक्त पानी को सोख लेते हैं और खेतों व बस्तियों को नुकसान से बचाते हैं। हरियाणा में अब तक सरस्वती के 3 हजार किलोमीटर से अधिक पुराने नदी मार्गों की पहचान हो चुकी है। ये मार्ग प्राकृतिक जल निकासी का मजबूत नेटवर्क बनाते हैं।

अगर इनकी खुदाई करके मिट्टी और मलबा हटा दिया जाए, तो इनकी जल सोखने और बहने की क्षमता फिर से बहाल हो सकती है। इससे बाढ़ का पानी तेजी से निकाला जा सकेगा। बाढ़ और सूखे से बचाव के लिए सरकार इस पर कार्य योजना तैयार कर सकती है।

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पुराने नदी मार्ग कैसे शुरू होंगे?

प्रो. एआर चौधरी ने बताया कि सबसे पहले सेटेलाइट डेटा और स्थल सर्वेक्षण से पुराने नदी मार्ग का नक्शा तैयार किया जाता है। इसके बाद आमतौर पर 4 मीटर या उससे अधिक गहराई तक खुदाई की जाती है। पुराने नदी मार्ग को चालू रखने के लिए समय-समय पर सिल्ट यानी मिट्टी की ऊपरी परत को हटाना जरूरी होता है। कई जगहों पर इन्हें मानसूनी जल भंडारण के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है।

इससे बाढ़ और सूखे दोनों समय में ये मार्ग काम आएंगे। प्रो. चौधरी ने कहा कि सरस्वती नदी के कई पुराने मार्गों का संबंध अच्छे भूजल स्रोतों से भी है। खुदाई करने पर इनमें पीने योग्य पानी भी मिला है। ऐसे में ये न केवल बाढ़ नियंत्रण में मदद करेंगे, बल्कि सूखे के समय ग्रामीण इलाकों में पेयजल उपलब्ध कराने में भी उपयोगी साबित होंगे।

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खेत और घर बचेंगे नुकसान से

प्रो. एआर चौधरी ने कहा कि पुराने नदी मार्गों को पुनर्जीवित करने से बाढ़ का पानी नियंत्रित दिशा में बहाकर खेतों और घरों को नुकसान से बचाया जा सकता है। ये मार्ग प्राकृतिक जल प्रवाह को बनाए रखते हैं और ग्रामीण इलाकों में बाढ़ के पानी को दूर-दराज तक फैलाकर राहत देते हैं। सबसे अच्छी बात ये है कि सूखे के समय ये जल स्रोत बन जाते हैं, जिससे कृत्रिम ड्रेनेज सिस्टम पर निर्भरता कम हो जाती है।

आधुनिक तकनीक से लगाया जाता है पता

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प्रो. एआर चौधरी ने बताया कि पुराने नदी मार्गों को खोजने के लिए रिमोट सेंसिंग, डिजिटल एलिवेशन मॉडल्स और फील्ड सर्वेक्षण की मदद ली जाती है। इससे इन मार्गों की सटीक स्थिति का पता चल जाता है। ताकि बाढ़ प्रभावित जिलों के लिए बेहतर आपदा प्रबंधन और कृषि योजनाएं तैयार की जा सकें।

मौलिक गुप्ता

मौलिक गुप्ता एक प्रतिभाशाली और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 8 वर्षों से एंटरटेनमेंट और ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर आकर्षक और ताज़ा खबरें लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ बॉलीवुड, टीवी, सेलिब्रिटी अपडेट्स, वायरल ट्रेंड्स और सोशल मीडिया की हलचल को कवर करती हैं, जो पाठकों को मनोरंजन की दुनिया से जोड़े रखती हैं। मौलिक का लेखन शैली जीवंत, रोचक और समयानुकूल है, जो युवा और विविध पाठकों को आकर्षित करता है। वे Haryananewspost.com न्यूज़ प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय हैं, जहाँ उनके लेख ट्रेंडिंग विषयों पर गहरी अंतर्दृष्टि और मनोरंजक जानकारी प्रदान करते हैं।

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