Oldest Highway: Grand Trunk Road: India’s oldest highway, which connects two countries: भारत आज हाईवे और एक्सप्रेसवे निर्माण में तेजी से आगे बढ़ रहा है। नए-नए मार्ग बन रहे हैं, जो हजारों किलोमीटर की दूरी को कुछ ही घंटों में तय करने का मौका दे रहे हैं।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत का सबसे पुराना हाईवे (oldest highway) कौन सा है, जिसने न केवल शहरों को, बल्कि दो देशों को जोड़ा और सदियों से इतिहास की गवाही दी? यह है ग्रैंड ट्रंक रोड (Grand Trunk Road), जिसकी कहानी उतनी ही रोमांचक है जितनी इसकी लंबाई। लगभग 2400 किलोमीटर लंबा यह मार्ग बांग्लादेश से अफगानिस्तान तक फैला है और भारतीय उपमहाद्वीप की सांस्कृतिक और व्यापारिक धड़कन रहा है।
ग्रैंड ट्रंक रोड: एक ऐतिहासिक शुरुआत Oldest Highway
ग्रैंड ट्रंक रोड को भारत का सबसे पुराना हाईवे (ancient road) माना जाता है, जिसकी नींव चंद्रगुप्त मौर्य के शासनकाल में पड़ी। माना जाता है कि इस मार्ग का प्रारंभिक स्वरूप उस समय बनाया गया था, जब व्यापार और संपर्क के लिए मजबूत सड़कों की जरूरत थी।
16वीं शताब्दी में दिल्ली के सुल्तान शेरशाह सूरी ने इसे पक्का करवाकर और व्यवस्थित करवाकर इसे नया जीवन दिया। उनकी दूरदर्शिता ने इस मार्ग को दक्षिण एशिया के सबसे महत्वपूर्ण और लंबे रास्तों में से एक बना दिया। यह सड़क न केवल व्यापारियों और यात्रियों के लिए, बल्कि इतिहासकारों और संस्कृति प्रेमियों के लिए भी एक अनमोल धरोहर है।
कहां से शुरू, कहां तक फैली?
ग्रैंड ट्रंक रोड दक्षिण एशिया के सबसे पुराने और लंबे मार्गों में से एक है। यह बांग्लादेश के चटगांव से शुरू होकर पश्चिम बंगाल के हावड़ा, बर्धमान, और आसनसोल से गुजरता है। फिर यह बिहार के सासाराम, उत्तर प्रदेश के प्रयागराज, कानपुर, कन्नौज, एटा, अलीगढ़, बुलंदशहर, और गाजियाबाद होते हुए दिल्ली पहुंचता है।
दिल्ली से यह हरियाणा के पानीपत, करनाल, और अंबाला, पंजाब के लुधियाना, जलंधर, और अमृतसर से गुजरकर पाकिस्तान के लाहौर और रावलपिंडी तक जाता है। अंत में, यह अफगानिस्तान के काबुल में जाकर समाप्त होता है। इस तरह, यह मार्ग भारत, पाकिस्तान, और अफगानिस्तान (cross-border connectivity) को जोड़ता है, जो इसे एक अनूठा ऐतिहासिक महत्व देता है।
ग्रैंड ट्रंक रोड के नाम और पहचान
इस सड़क को समय के साथ कई नामों से जाना गया। प्राचीन काल में इसे ‘उत्तरापथ’ कहा जाता था, क्योंकि यह उत्तर भारत के प्रमुख शहरों को जोड़ता था।
शेरशाह सूरी के समय इसे ‘सड़क-ए-आजम’ और ‘बादशाही सड़क’ के नाम से पुकारा गया। बाद में अंग्रेजों ने इसे ‘द लॉन्ग रोड’ और अंततः ‘ग्रैंड ट्रंक रोड’ (GT Road) का नाम दिया। हर नाम इस सड़क की भव्यता और इसके ऐतिहासिक महत्व को दर्शाता है। आज भी यह सड़क भारतीय उपमहाद्वीप की सांस्कृतिक और आर्थिक धरोहर का प्रतीक है।
राष्ट्रीय राजमार्गों का हिस्सा
आधुनिक भारत में ग्रैंड ट्रंक रोड कई राष्ट्रीय राजमार्गों (national highways) का हिस्सा है। हावड़ा से कानपुर तक का खंड राष्ट्रीय राजमार्ग 2 (NH-2) के रूप में जाना जाता है।
कानपुर से गाजियाबाद तक यह NH-91 के रूप में पहचाना जाता है। दिल्ली से हरियाणा और पंजाब के रास्ते अमृतसर तक का हिस्सा NH-1 और NH-5 के तहत आता है। इन राजमार्गों ने ग्रैंड ट्रंक रोड को और भी आधुनिक और सुगम बनाया है, जिससे यात्रा (travel connectivity) पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गई है।
सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व
ग्रैंड ट्रंक रोड सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि संस्कृतियों, व्यापार, और इतिहास का संगम है। इस मार्ग ने सदियों से व्यापारियों, यात्रियों, और तीर्थयात्रियों को जोड़ा। यह सड़क मौर्य साम्राज्य से लेकर मुगल काल और ब्रिटिश शासन तक के इतिहास की साक्षी रही है।
आज भी यह भारत के प्रमुख शहरों को जोड़कर आर्थिक गतिविधियों (economic connectivity) को बढ़ावा देती है। दिल्ली, कानपुर, और अमृतसर जैसे शहरों के बाजार इस सड़क के कारण ही फलते-फूलते हैं। साथ ही, यह सड़क बांग्लादेश और अफगानिस्तान के बीच व्यापारिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का भी माध्यम रही है।
आधुनिक भारत में इसकी प्रासंगिकता
आज जब भारत नए एक्सप्रेसवे और हाईवे बना रहा है, ग्रैंड ट्रंक रोड की प्रासंगिकता कम नहीं हुई है। यह सड़क न केवल इतिहास का हिस्सा है, बल्कि आधुनिक भारत की विकास यात्रा का भी प्रतीक है। इसके कई हिस्सों को चौड़ा किया गया है और इसे और सुरक्षित व सुगम बनाने के लिए कार्य चल रहे हैं। यह सड़क हमें यह भी सिखाती है कि कैसे प्राचीन इंजीनियरिंग और आधुनिक तकनीक का मेल भविष्य को बेहतर बना सकता है।
ग्रैंड ट्रंक रोड सिर्फ एक मार्ग नहीं, बल्कि भारत की आत्मा है। यह हमें अपने गौरवशाली अतीत से जोड़ता है और भविष्य की ओर ले जाता है। अगली बार जब आप इस सड़क पर यात्रा करें, इसके इतिहास और महत्व को जरूर याद करें। क्या आपने कभी ग्रैंड ट्रंक रोड पर सफर किया है? अपनी कहानी हमारे साथ साझा करें!








