Indoor Saffron Farming In Gujarat : गुजरात के अमरेली में किसान बिपिनभाई पटेल ने एक इमारत की दूसरी मंजिल पर महज 200 वर्ग फीट जगह में केसर की इनडोर खेती शुरू की है। उन्होंने नियंत्रित वातावरण तकनीक पर करीब 20 लाख रुपये का निवेश किया है। 10 से 12 डिग्री सेल्सियस तापमान बनाए रखकर वे अगले तीन महीनों में 1 किलो केसर उत्पादन का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं।
Kesar ki kheti kaise kare : गुजरात के अमरेली शहर के प्रगतिशील किसान बिपिनभाई पटेल ने परंपरागत खेती से अलग हटकर एक अनूठा प्रयोग शुरू किया है। उन्होंने अपनी इमारत की दूसरी मंजिल पर सिर्फ 200 वर्ग फीट (10×20 फीट) क्षेत्र में नियंत्रित वातावरण तैयार कर कश्मीरी केसर की इनडोर खेती की नींव रखी है। इस पूरे हाईटेक इंफ्रास्ट्रक्चर पर उन्होंने करीब 20 लाख रुपये खर्च किए हैं। कश्मीर की ठंडी वादियों में उगने वाली इस महंगी फसल को गुजरात के गर्म मौसम में तकनीक के दम पर उगाना देश के कृषि क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है।
सामान्य किसानों के लिए यह मॉडल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह बिना खेती योग्य जमीन के भी अधिक मूल्य वाली फसलों की संभावना दिखाता है। हालांकि उच्च लागत और बिजली पर निरंतर निर्भरता के कारण छोटे किसानों को इस मॉडल के नफा-नुकसान को समझना बेहद जरूरी है।
200 वर्ग फीट में इनडोर सेटअप
बिपिनभाई पटेल ने खुले खेतों पर निर्भर रहने के बजाय बंद कमरे में वर्टिकल और कंट्रोल्ड क्लाइमेट फार्मिंग का रास्ता चुना। 10 गुणा 20 फीट के छोटे से कमरे में उन्होंने इंसुलेशन, विशेष रैक और ऑटोमैटिक कूलिंग सिस्टम लगाया है। यह सेटअप बाहरी मौसम के प्रभाव को पूरी तरह बेअसर कर देता है, जिससे पौधों को कश्मीर जैसी आवश्यक ठंडक मिलती है।
10 से 12 डिग्री तापमान का नियंत्रण
केसर की फसल के लिए सबसे जरूरी कारक अनुकूल तापमान, नमी और हवा का संतुलन बनाए रखना है। इस सेटअप में एयर कंडीशनिंग और ऑटोमेशन सिस्टम के जरिए कमरे का तापमान 10 से 12 डिग्री सेल्सियस पर स्थिर रखा जा रहा है। बिजली की लगातार आपूर्ति और मशीनों की मॉनिटरिंग इस प्रक्रिया की सबसे बड़ी तकनीकी चुनौती है, क्योंकि तापमान में थोड़ा सा बदलाव भी फसल को नुकसान पहुंचा सकता है।
20 लाख का निवेश और प्रशिक्षण
इस प्रयोग को शुरू करने से पहले बिपिनभाई ने इंटरनेट से तकनीकी जानकारी जुटाई और जम्मू-कश्मीर जाकर विशेषज्ञों से बाकायदा प्रशिक्षण लिया। इसके अतिरिक्त उन्होंने भावनगर के एक अनुभवी किसान से भी इनडोर केसर उगाने के व्यावहारिक गुर सीखे। इसके बाद उन्होंने आवश्यक मशीनों, बल्बों और कमरे की संरचना पर लगभग 20 लाख रुपये का पूंजी निवेश किया।
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3 महीने में 1 किलो उत्पादन का लक्ष्य
बिपिनभाई को उम्मीद है कि अगले तीन महीनों में उन्हें पहली फसल हासिल हो जाएगी। उन्होंने एक चक्र में लगभग एक किलोग्राम सूखा केसर तैयार करने का लक्ष्य तय किया है। फूलों से लाल रंग के वर्तिकाग्र (स्टिग्मा) को तोड़ना और सही विधि से सुखाना इसकी शुद्धता व ग्रेडिंग तय करता है, जिस पर आगे की कमाई निर्भर करेगी।
लागत और बाजार मूल्य का गणित
बाजार में कश्मीरी केसर की गुणवत्ता और शुद्धता के आधार पर थोक व खुदरा मूल्य 9 लाख से 12 लाख रुपये प्रति किलो तक रहता है। 20 लाख रुपये के शुरुआती पूंजी निवेश, भारी बिजली बिल और नियमित रखरखाव के बाद वास्तविक लाभ का सही आकलन पहली फसल की बिक्री के बाद ही संभव होगा। यदि यह प्रयोग सफल रहता है तो सीमित जमीन वाले शहरी व ग्रामीण युवाओं के लिए यह इनडोर फार्मिंग का एक नया मॉडल बन सकता है। #SaffronFarming #AgricultureInnovation #KesarKiKheti













