Medicinal Plants Farming In Hindi : सर्दियों की शुरुआत के साथ किसान गेहूं और गन्ने की पारंपरिक खेती के बजाय औषधीय पौधों की खेती से बंपर मुनाफा कमा सकते हैं। विशेषज्ञों और अनुभवी किसानों के मुताबिक शतावर, मेंथा, अश्वगंधा और सफेद मूसली जैसी फसलें 25 से 50 हजार रुपये की प्रति एकड़ लागत में लाखों रुपये का शुद्ध लाभ देती हैं।
Shatavari ki kheti kaise kare : सर्दियों के आगाज के साथ ही खेतों में पारंपरिक रबी फसलों की तैयारी तेज हो गई है। कृषि विशेषज्ञों का स्पष्ट आकलन है कि गेहूं और गन्ने जैसी पारंपरिक फसलों के मुकाबले औषधीय पौधों (मेडिसिनल प्लांट्स) की खेती किसानों की आय को कई गुना बढ़ा सकती है। मझौलिया प्रखंड सहित देश के कई इलाकों में किसान शतावर, मेंथा, अश्वगंधा, गिलोय, तुलसी, एलोवेरा और सर्पगंधा उगाकर अपनी आर्थिक स्थिति पूरी तरह बदल रहे हैं।
शतावर की बाजार में भारी मांग
प्रगतिशील किसान रमाशंकर पिछले एक दशक से लगातार शतावर की खेती कर रहे हैं। रमाशंकर बताते हैं कि इससे होने वाली कमाई पारंपरिक फसलों की तुलना में बहुत अधिक है। न्यूट्रिशनल फूड और आयुर्वेदिक दवाओं में बड़े पैमाने पर उपयोग होने के कारण खुले बाजार में इसकी मांग पूरे साल बनी रहती है।
कटाई (हार्वेस्टिंग) के बाद रमाशंकर शतावर की सूखी जड़ों को बाजार में 1000 रुपये प्रति किलो के भाव से बेचते हैं। थोक बाजार में शतावर का भाव लगभग 40 हजार रुपये प्रति क्विंटल तक आसानी से मिल जाता है। कम पानी और सामान्य देखभाल में भी यह फसल बंपर पैदावार देती है।
मेंथॉल तेल से लाखों का मुनाफा
इसी तरह अनुभवी किसान परशुराम पिछले दो दशकों से मेंथा, पामा रोजा और मूसली की सफल खेती कर रहे हैं। परशुराम के मुताबिक इन औषधीय पौधों में लागत का अनुपात बेहद कम है, जबकि मुनाफा कई गुना अधिक मिलता है।
परशुराम मेंथा की फसल तैयार होने के बाद उससे प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) के जरिए मेंथॉल तेल निकालते हैं। वे घर बैठे ही एक स्वयं सहायता समूह के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय बाजार में 2000 से 2500 रुपये प्रति लीटर की दर से मेंथॉल बेचते हैं। वे हर साल करीब 1000 लीटर मेंथॉल की प्रोसेसिंग कर सीधा मुनाफा कमाते हैं।
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प्रति एकड़ लागत और बाजार भाव
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार एक एकड़ खेत में अश्वगंधा, मूसली, मेंथा, मोरिंगा और शतावरी की खेती करने पर कुल लागत मात्र 25 से 50 हजार रुपये के बीच आती है। इसके मुकाबले तैयार उपज के बाजार भाव किसानों को भारी बचत कराते हैं।
वर्तमान थोक दरों के मुताबिक सफेद मूसली 65 हजार रुपये प्रति क्विंटल और सर्पगंधा 35 हजार रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर बिक रही है। वहीं अश्वगंधा की सूखी जड़ें 15 हजार रुपये प्रति क्विंटल और मेंथॉल 2000 से 2500 रुपये प्रति लीटर बिकता है। सीमित जोत वाले छोटे किसान भी इन फसलों को अपनाकर अपनी खेती को बेहद लाभदायक उद्यम बना सकते हैं। #KisanNews #MedicinalFarming #KrishiVigyan
डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य कृषि पद्धतियों और किसानों के अनुभवों पर आधारित है। हरियाणा न्यूज पोस्ट इसकी पुष्टि नहीं करता है। खेती या निवेश से पूर्व कृषि वैज्ञानिक से सलाह अवश्य लें।












