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Sonipat News: अशोका यूनिवर्सिटी प्रोफेसर अली खान को सशर्त जमानत, सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख

On: May 21, 2025 12:51 PM
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Sonipat News: अशोका यूनिवर्सिटी प्रोफेसर अली खान को सशर्त जमानत, सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख
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Sonipat News Ashoka University conditional bail to Professor Ali Khan: हरियाणा के सोनीपत स्थित अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद (Ali Khan Mahmudabad) को सुप्रीम कोर्ट ने ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) पर विवादित सोशल मीडिया पोस्ट (social media post) के मामले में सशर्त जमानत (conditional bail) दी है।

कोर्ट ने साफ निर्देश दिए हैं कि प्रोफेसर इस मामले या भारत के आतंकी हमलों (terrorist attacks) और जवाबी कार्रवाइयों पर कोई टिप्पणी या भाषण नहीं देंगे। साथ ही, कोर्ट ने हरियाणा पुलिस को 24 घंटे के भीतर तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT investigation) गठित करने का आदेश दिया, जिसमें एक महिला अधिकारी शामिल होगी।

यह मामला न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा (national security) से जुड़ा है, बल्कि सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (freedom of expression) और जिम्मेदारी के बीच संतुलन को भी उजागर करता है। आइए इस मामले को विस्तार से समझें।

Sonipat News: ऑपरेशन सिंदूर पर विवादित टिप्पणी

प्रोफेसर अली खान ने ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के संबंध में फेसबुक पर पोस्ट की थी, जिसमें उन्होंने कर्नल सोफिया कुरैशी (Colonel Sofia Qureshi) और विंग कमांडर व्योमिका सिंह (Wing Commander Vyomika Singh) पर कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। इन दोनों महिला अधिकारियों ने पाकिस्तान के खिलाफ इस ऑपरेशन की प्रेस ब्रीफिंग की थी।

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पोस्ट में प्रोफेसर ने भारत की सैन्य रणनीति (military strategy), पाकिस्तान की दोहरी नीति, और युद्ध के सामाजिक-आर्थिक प्रभावों पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने दक्षिणपंथी समर्थकों पर भी सवाल उठाए, जो इन महिला अधिकारियों की तारीफ तो करते हैं, लेकिन देश में मॉब लिंचिंग (mob lynching) और बुलडोजर कार्रवाइयों पर चुप रहते हैं। इन टिप्पणियों को हरियाणा महिला आयोग की चेयरपर्सन रेणु भाटिया और स्थानीय सरपंच ने आपत्तिजनक माना, जिसके बाद प्रोफेसर के खिलाफ दो FIR दर्ज की गईं।

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और सख्त टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने प्रोफेसर की पोस्ट को गंभीरता से लिया। कोर्ट ने कहा कि ऐसी टिप्पणियां, जो जानबूझकर अपमानजनक (offensive remarks) हों या सांप्रदायिक तनाव (communal tension) पैदा करें, स्वीकार्य नहीं हैं। जस्टिस सूर्यकांत ने इसे “डॉग व्हिसलिंग” करार दिया, जो कानून की नजर में गंभीर है।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (freedom of expression) का अधिकार असीमित नहीं है, खासकर जब यह राष्ट्रीय हितों (national interests) को प्रभावित करता हो। प्रोफेसर के वकील कपिल सिब्बल ने दलील दी कि पोस्ट देशभक्ति से भरी थी और इसका मकसद किसी का अपमान नहीं था, लेकिन कोर्ट ने जांच पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि SIT investigation इस मामले की तह तक जाएगी और सच्चाई सामने लाएगी।

SIT गठन और जमानत की शर्तें

सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा के DGP को 24 घंटे के भीतर तीन सदस्यीय SIT गठन का आदेश दिया, जिसमें हरियाणा या दिल्ली का कोई अधिकारी शामिल नहीं होगा। इस दल में एक महिला अधिकारी को शामिल करना अनिवार्य किया गया है। प्रोफेसर को सशर्त जमानत (conditional bail) दी गई, जिसमें उन्हें सोनीपत के CJM की संतुष्टि के लिए जमानत बांड जमा करना होगा।

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साथ ही, कोर्ट ने सख्त हिदायत दी कि प्रोफेसर ऑपरेशन सिंदूर, आतंकी हमलों (terrorist attacks), या जवाबी कार्रवाइयों पर कोई ऑनलाइन लेख या भाषण नहीं देंगे। कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी कि किसी भी तरह का हंगामा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, और ऐसे लोगों से निपटने का तरीका कोर्ट को अच्छे से आता है।

प्रोफेसर की गिरफ्तारी और रिमांड

7 मई 2025 को प्रोफेसर अली खान की पोस्ट के बाद सोनीपत के राई थाने में दो FIR दर्ज की गईं। पहली FIR जठेड़ी गांव के सरपंच की शिकायत पर, और दूसरी रेणु भाटिया की शिकायत पर दर्ज हुई। इसके बाद, दिल्ली के ग्रेटर कैलाश से प्रोफेसर को गिरफ्तार (arrest) किया गया और दो दिन की पुलिस रिमांड पर लिया गया। 20 मई को कोर्ट में पेशी के बाद उन्हें सात दिन की न्यायिक हिरासत (judicial custody) में भेजा गया। इस मामले ने सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा छेड़ दी, जहां कुछ लोग प्रोफेसर के समर्थन में हैं, तो कुछ उनकी टिप्पणियों को गैर-जिम्मेदाराना मानते हैं।

विवाद का कारण

प्रोफेसर की पोस्ट में भारत की सैन्य रणनीति (military strategy) की तारीफ थी, जिसमें कहा गया कि भारत ने आतंकवादी संगठनों और पाकिस्तानी सेना के बीच कोई अंतर नहीं रखा। उन्होंने पाकिस्तान की दोहरी नीति (Pakistan’s dual policy) की आलोचना की, जो आतंकियों को संरक्षण देती है।

हालांकि, विवाद तब शुरू हुआ जब उन्होंने दक्षिणपंथी समर्थकों पर सांप्रदायिकता (communal tension) को बढ़ावा देने का आरोप लगाया और कर्नल सोफिया कुरैशी जैसे अधिकारियों की तारीफ को पाखंड करार दिया।

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पोस्ट में युद्ध के दुष्परिणामों और गरीबों पर इसके प्रभाव की भी चर्चा थी, जिसे कुछ लोगों ने युद्ध-विरोधी (anti-war stance) माना। प्रोफेसर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस को भारत की विविधता का प्रतीक बताया, लेकिन जमीन पर मुसलमानों की स्थिति को लेकर सवाल उठाए, जिसने विवाद को और हवा दी।

यह मामला केवल एक प्रोफेसर की पोस्ट तक सीमित नहीं है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा (national security), अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (freedom of expression), और सोशल मीडिया की जिम्मेदारी का सवाल उठाता है। ऑपरेशन सिंदूर जैसे संवेदनशील मुद्दों पर टिप्पणी करते समय शब्दों का चयन बेहद महत्वपूर्ण है। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला दिखाता है कि कानून अभिव्यक्ति की आजादी का सम्मान करता है, लेकिन राष्ट्रीय हितों (national interests) के साथ कोई समझौता नहीं करेगा। SIT investigation से उम्मीद है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच होगी और सच सामने आएगा।

राहुल शर्मा

राहुल शर्मा एक कुशल पत्रकार और लेखक हैं, जो पिछले 8 वर्षों से ब्रेकिंग न्यूज़, हरियाणा न्यूज़ और क्राइम से जुड़ी खबरों पर प्रभावशाली लेख लिख रहे हैं। उनकी खबरें तथ्यपूर्ण, गहन और तेज़ी से पाठकों तक पहुँचती हैं, जो हरियाणा और अन्य क्षेत्रों की महत्वपूर्ण घटनाओं को उजागर करती हैं। राहुल का लेखन शैली आकर्षक और विश्वसनीय है, जो पाठकों को जागरूक और सूचित रखता है। वे Haryananewspost.com और डिजिटल मंचों पर सक्रिय हैं, जहाँ उनकी स्टोरीज़ सामाजिक और आपराधिक मुद्दों पर गहरी छाप छोड़ती हैं।

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