Sonipat Yamuna Flood 2025, सिटी रिपोर्टर, सोनीपत : हथिनी कुंड बैराज से छोड़े गए पानी को सोनीपत पहुंचने में करीब 30 घंटे का समय लगेगा। यानी सोनीपत की सीमा में यमुना के जलस्तर में मंगलवार शाम पांच से छह बजे के बीच उफान शुरू हुआ है। जिसके मद्देनजर जिला प्रशासन अलर्ट हो गया है। आसपास के लोगों के सजग रहने और पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के आदेश जारी किए हैं।
प्रशासन ने सिंचाई विभाग सहित अन्य विभागों के 80 से अधिक कर्मचारियों की तैनाती यमुना के किनारे कर दी है। सभी की छुट्टियां रद्द कर दी गई है। पानी रोकने के लिए विभाग द्वारा करीब 80 हजार बैग, पोकलेन, जेसीबी, बोट आदि सहित तमाम उपकरणों को यमुना किनारे लाया जा रहा है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने आशंका जताई है कि पबनेरा प्वाइंट पर कटाव होने की संभावना है कि यमुना का फ्लो यहां पर आकर टकराता है। इससे यहां पर सतर्कता बढ़ा दी गई है।
फिलहाल यमुना में 50 हजार क्यूसेक पानी चल रहा है। जो सामान्य की श्रेणी से भी कम है। पिछले पांच साल में सोनीपत में सबसे अधिक बरसात इसी वर्ष दर्ज की गई है। हथिनी कुंड बैराज से अलग-अलग समय पर दोपहर दो बजे तक यमुना में करीब 322416 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। पानी धीरे-धीरे सोनीपत की ओर बढ़ रहा है।
प्रशासन की तैयारियां
जिला प्रशासन ने बाढ़ से निपटने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। सिंचाई विभाग सहित अन्य विभागों के 80 से ज्यादा कर्मचारियों को यमुना किनारे तैनात किया गया है, और उनकी छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं। बाढ़ रोकने के लिए 80 हजार बैग, 7 डीजल इंजन, 75 लाइफ जैकेट, 100 वाटरप्रूफ जैकेट, 13 नावें, 187 टॉर्च, 400 मीटर रस्सी और अन्य सामान यमुना किनारे पहुंचाए गए हैं। डीसी सुशील कुमार सारवान ने बताया कि सोमवार को 7 घंटे में 2,72,645 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। गांवों में मुनादी के साथ स्कूलों और चौपालों में ग्रामीणों और पशुओं के लिए ठहरने की व्यवस्था की जा रही है।
गांवों में मुनादी करा दी गई है : एक्सईएन
सिंचाई विभाग के एक्सईएन नितिन भट्ट ने कहा कि गांवों में मुनादी करा दी गई है। लाउडस्पीकर से हर घंटे ग्रामीणों को यमुना किनारे नहीं जाने के लिए अनाउंसमेंट कराया जा रहा है। पानी अधिक पहुंचेगा। लेकिन प्रशासन के सहयोग से विभाग से हर स्थिति में नियंत्रण के लिए तैयार है। किसी को चिंता करने की जरूरत नहीं है।
2021 में कई गांवों के खेत तालाब बन गए थे यमुना का बहाव पबने गांव की तरफ अधिक है। जिसके लिए प्रशासन और सिंचाई विभाग द्वारा यहां पर विशेष निगरानी की जा रही है। पहले आए पानी में यमुना किनारे आधा दर्जन गांवों के खेतों में पानी घुस गया था, जिससे किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ा।
अब सोमवार को छोड़ा गया पानी अब तक के सीजन में सबसे अधिक है। वर्ष 2021 में इसी तरह से यमुना में अलग-अलग समय पर करीब साढ़े लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था।
खेतों में तेज कटाव से किसानों की मुश्किलें बढ़ीं
यमुना किनारे बसे गांवों में कटाव शुरू हो गया है। इस से किसानों की चिंता बढ़ गई है। हलका विधायक देवेंद्र सिंह कादियान ने सोमवार को यमुना किनारे बसे गांवों का दौरा किया और अधिकारियों को जरूरी निर्देश दिए। विधायक ने एसडीएम, सिंचाई, राजस्व और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ यमुना घाट पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया।
उन्होंने कहा कि नदी के किनारे बसे गांवों में ठीकरी पहरा लगवाया जाए और गांवों में मुनादी कराकर लोगों को सतर्क किया जाए। अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन स्थानों पर कटाव तेज हो रहा है, वहां पर पुख्ता प्रबंध किए जाए। गांव बेगा, पबनेरा आदि आसपास के क्षेत्रों में यमुना का बहाव तेज हो चुका है।
सात घंटे में 2.72 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा
डीसी सुशील कुमार सारवान ने बताया कि हथिनी कुंड बैराज से सोमवार को सात घटों में 2 लाख 72 हजार 645 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। उन्होंने यमुना नदी के आस-पास के क्षेत्र में मुनादी करवाने के आदेश जारी कर दिए गए। कोई भी व्यक्ति यमुना बांध के अंदर न रहे। अधिकारियों को निर्देश दिए कि वो गांवों के सरपंचों, नंबरदारों से तालमेल कर स्कूलों, चौपालों अन्य उपयुक्त स्थानों में ग्रामवासियों व पशुधन के ठहराने की व्यवस्था पहले से कर लें।












