Terror of stray dogs in Haryana, 17 people injured in Hisar, 6 children also victims: हरियाणा के हिसार में आवारा कुत्तों का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा। मंगलवार को एक ही दिन में 17 लोगों को कुत्तों ने काट लिया, जिनमें 6 मासूम बच्चे भी शामिल हैं।
घायलों को सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। गर्मी के मौसम में बढ़ते इन हमलों ने स्थानीय लोगों में दहशत पैदा कर दी है, और प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग उठ रही है।
हिसार में कुत्तों का कहर Stray Dogs in Haryana
हिसार के विभिन्न इलाकों में आवारा कुत्तों ने आतंक मचा रखा है। गलियों और मुहल्लों में घूमने वाले लोग, खासकर बच्चे, इनके निशाने पर हैं। मंगलवार को जिंदल फैक्ट्री के पास एक गली में खेल रहे ढाई साल के आयुष को एक कुत्ते ने पैर पर काट लिया। गहरे जख्म के कारण उसके पैर में 10 टांके लगाने पड़े।
आयुष के पिता संजोक ने बताया कि उनका बेटा अन्य बच्चों के साथ खेल रहा था, तभी अचानक कुत्ता आया और उसने हमला कर दिया। काफी देर तक कुत्ते ने बच्चे का पैर नहीं छोड़ा, और आसपास के लोगों की मदद से उसे बचाया गया।
सिविल अस्पताल में रोजाना 8-9 मामले
हिसार के सिविल अस्पताल में कुत्तों के काटने के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। अस्पताल के आपातकालीन कक्ष में हर दिन 8 से 9 लोग रेबीज का इंजेक्शन और मरहम-पट्टी के लिए पहुंच रहे हैं।
कुछ दिन पहले सिरसा मार्ग पर रहने वाली एक 8 साल की बच्ची को कुत्ते ने गर्दन के पास काट लिया था, जिसके लिए माइनर ऑपरेशन करना पड़ा। मंगलवार को घायल हुए 17 लोगों में से कई बच्चे हैं, जिनमें सेक्टर-14 का 3 साल का वंश, मुलतानी चौक की 4 साल की सोहम, और मॉडल टाउन का 6 साल का आशी शामिल हैं।
बच्चों पर सबसे ज्यादा खतरा
आवारा कुत्तों के हमलों का सबसे ज्यादा शिकार बच्चे हो रहे हैं। हिसार के सेक्टर-14, मॉडल टाउन, धान्सू गांव, और ऋषि नगर जैसे इलाकों में बच्चे खेलते समय इन कुत्तों का निशाना बन रहे हैं।
धान्सू गांव की 12 साल की राधिका और उत्तम नगर के 14 साल के श्योकंद जैसे कई बच्चों को गंभीर चोटें आई हैं। इन घटनाओं ने अभिभावकों में डर पैदा कर दिया है, जो अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।
प्रशासन की लापरवाही पर सवाल
आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या के लिए स्थानीय लोग प्रशासन की लापरवाही को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। गर्मी के मौसम में कुत्तों के आक्रामक होने की प्रवृत्ति बढ़ जाती है, लेकिन इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए।
लोग मांग कर रहे हैं कि नगर निगम और पशु कल्याण विभाग आवारा कुत्तों की नसबंदी और उनके लिए आश्रय स्थल बनाने जैसे कदम उठाए। साथ ही, इन हमलों को रोकने के लिए जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है।
क्या है समाधान?
आवारा कुत्तों की समस्या से निपटने के लिए विशेषज्ञ सुझाव दे रहे हैं कि नसबंदी कार्यक्रम को तेज करना और कुत्तों को आबादी वाले इलाकों से दूर रखना जरूरी है।
इसके अलावा, लोगों को कुत्तों के हमलों से बचने के लिए सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है, खासकर बच्चों को अकेले गलियों में खेलने से रोकने की जरूरत है। प्रशासन को चाहिए कि वह इस समस्या को गंभीरता से ले और तत्काल कार्रवाई करे।
समाज की जिम्मेदारी
यह समस्या केवल प्रशासन की ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। आवारा कुत्तों को भोजन देना और उनकी देखभाल न करना उनकी आबादी बढ़ाने का कारण बनता है। समुदाय को एकजुट होकर इस दिशा में काम करना होगा, ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।













