चंडीगढ़। हरियाणा की राजनीति में पिछले कुछ दिनों से एक मुलाकात को लेकर खूब कानाफूसी हो रही थी। सिंचाई मंत्री श्रुति चौधरी के चंडीगढ़ स्थित सरकारी आवास पर केंद्रीय मंत्री एवं हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल पहुंचे तो राजनीतिक गलियारों में सवाल उठने लगे कि आखिर ऐसी क्या बात हुई कि मनोहर लाल को खुद श्रुति के आवास तक जाना पड़ा? अब इस मुलाकात के पीछे की कहानी तोशाम से लेकर भाजपा संगठन के शीर्ष स्तर तक जुड़ती नजर आ रही है।
सूत्रों के मुताबिक, भाजपा संगठन के हरियाणा प्रभारी फणींद्र नाथ तक फीडबैक पहुंचा था कि सिंचाई मंत्री श्रुति चौधरी और उनकी मां एवं पूर्व राज्यसभा सांसद किरण चौधरी अपने राजनीतिक गढ़ तोशाम में अपेक्षित रूप से सक्रिय नहीं हैं। शिकायत में यह भी कहा गया कि दोनों नेताओं की हलके में कम मौजूदगी से स्थानीय कार्यकर्ताओं और लोगों में नाराजगी पैदा हो रही है और यदि समय रहते स्थिति नहीं सुधरी तो इसका असर पार्टी की राजनीतिक जमीन पर पड़ सकता है।
तोशाम की ‘फील्ड रिपोर्ट’ ने बढ़ाई चिंता
तोशाम कोई सामान्य विधानसभा क्षेत्र नहीं है। भिवानी जिले का यह क्षेत्र लंबे समय से चौधरी परिवार की राजनीतिक पहचान और प्रभाव का केंद्र रहा है। ऐसे में संगठन तक तोशाम से जुड़ा नकारात्मक फीडबैक पहुंचना भाजपा के लिए सामान्य शिकायत से ज्यादा महत्वपूर्ण माना गया।
बताया जा रहा है कि मामला संगठन के शीर्ष स्तर तक पहुंचा और भाजपा के राष्ट्रीय संगठन से जुड़े नेताओं को भी इसकी जानकारी दी गई। इसके बाद केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल को पूरे घटनाक्रम से अवगत करवाया गया। सूत्रों के मुताबिक, संदेश साफ था कि श्रुति चौधरी और किरण चौधरी को अपने क्षेत्र में अधिक समय देना चाहिए, कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद बढ़ाना चाहिए और जनता के बीच अपनी मौजूदगी मजबूत करनी चाहिए।
फिर हुई मनोहर की ‘दस्तक’
इसी पृष्ठभूमि में मनोहर लाल का श्रुति चौधरी के सरकारी आवास पर पहुंचना अहम हो गया। मुलाकात को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई गईं, लेकिन सूत्रों के अनुसार बातचीत का केंद्र तोशाम में राजनीतिक सक्रियता और संगठन से तालमेल रहा।
मनोहर लाल ने श्रुति चौधरी और किरण चौधरी से मुलाकात कर उन्हें अपने हलके में नियमित रूप से जाने और कार्यकर्ताओं तथा आम लोगों के साथ संपर्क मजबूत करने का संदेश दिया। यानी चंडीगढ़ में हुई मुलाकात का असली संदेश ‘तोशाम की जमीन पर वापस सक्रिय होइए’ के रूप में देखा जा रहा है।
संगठन का संदेश—हलका नजरअंदाज नहीं चलेगा
भाजपा के अंदरूनी सूत्रों की मानें तो संगठन अब सिर्फ सरकार में मंत्री या पार्टी में बड़े पद पर रहने को पर्याप्त नहीं मान रहा। नेताओं की अपने विधानसभा क्षेत्रों में मौजूदगी, कार्यकर्ताओं से संपर्क और जनता के बीच सक्रियता पर भी नजर रखी जा रही है।
श्रुति चौधरी के मामले में तोशाम की शिकायत को इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि वह खुद इसी क्षेत्र से विधायक हैं और वर्तमान में प्रदेश सरकार में सिंचाई जैसे महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। ऐसे में संगठन चाहता है कि सरकार की योजनाओं और राजनीतिक संदेश की गूंज चंडीगढ़ से निकलकर तोशाम की जमीन तक भी दिखाई दे।
आरके खुल्लर की एंट्री ने बढ़ाया सस्पेंस
इस मुलाकात के दौरान आरके खुल्लर के पहुंचने से भी चर्चाओं को हवा मिली। लेकिन सूत्रों के मुताबिक उनकी एंट्री पहले से तय किसी बैठक का हिस्सा नहीं थी।
बताया जा रहा है कि आरके खुल्लर अपने कार्यालय के लिए निकल रहे थे। इसी दौरान उन्हें जानकारी मिली कि मनोहर लाल पड़ोस में ही आए हुए हैं। इसके बाद वह भी वहां पहुंच गए। यानी उनकी मौजूदगी को किसी अलग राजनीतिक बैठक से जोड़कर देखना फिलहाल उचित नहीं होगा।
एक मुलाकात, कई संदेश
मनोहर लाल की श्रुति चौधरी के आवास पर हुई मुलाकात ने भले ही सियासी गलियारों में कई सवाल खड़े किए हों, लेकिन इसके पीछे की कहानी अब तोशाम की फील्ड रिपोर्ट और भाजपा संगठन की चिंता से जुड़ती नजर आ रही है।
संदेश साफ है—पद चाहे सरकार में हो या संगठन में, अपने हलके से दूरी अब भाजपा में आसानी से स्वीकार नहीं होगी। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि मनोहर लाल की मुलाकात के बाद श्रुति चौधरी और किरण चौधरी की तोशाम में सक्रियता कितनी बढ़ती है और आने वाले दिनों में संगठन की अगली फीडबैक रिपोर्ट क्या तस्वीर पेश करती है।