Unique Wedding in Haryana A bond of love tied for Rs 1, Naveen and Hema’s : हरियाणा के नारनौल में एक ऐसी शादी हुई, जिसने समाज में सकारात्मकता की मिसाल कायम की है। महेंद्रगढ़ के फैजाबाद गांव के नवीन और सलामपुरा की हेमा ने न केवल प्रेम के बंधन में बंधकर अपनी नई जिंदगी शुरू की, बल्कि दहेज जैसी कुप्रथा के खिलाफ एक मजबूत संदेश भी दिया। इस शादी में दूल्हे पक्ष ने शगुन के रूप में मात्र 1 रुपये स्वीकार किया, जिसकी चर्चा अब पूरे इलाके में हो रही है। यह कहानी न केवल प्रेरणादायक है, बल्कि समाज में बदलाव की बयार लाने वाली है।
नारनौल में बनी मिसाल Unique Wedding in Haryana
नारनौल के सलामपुरा गांव की हेमा, एक किसान की बेटी, और फैजाबाद गांव के नवीन, जो एक प्राइवेट कंपनी में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव हैं, की शादी 20 अप्रैल को संपन्न हुई। इस शादी की खासियत यह रही कि नवीन और उनके परिवार ने दहेज के रूप में सिर्फ 1 रुपये स्वीकार किया। 18 अप्रैल को लग्न की रस्मों के दौरान भी उन्होंने यही सांकेतिक शगुन लिया। इस अनोखी पहल ने न केवल दोनों परिवारों को जोड़ा, बल्कि समाज में दहेज के खिलाफ जागरूकता फैलाने का काम भी किया। इस शादी की हर तरफ सराहना हो रही है, और लोग इसे एक प्रेरणा के रूप में देख रहे हैं।
दहेज के खिलाफ नवीन का संकल्प
नवीन के पिता हवा सिंह, जो एक हड्डी अस्पताल में मैनेजिंग डायरेक्टर हैं, ने बताया कि उनका परिवार शुरू से ही दहेज प्रथा का विरोधी रहा है। उन्होंने कहा, “दहेज आज समाज में एक दानव की तरह है, जो कई जिंदगियों को तबाह कर देता है। हमने पहले ही तय कर लिया था कि हमारे बेटे की शादी बिना दहेज के होगी। जब हेमा के साथ रिश्ता तय हुआ, तो हमने साफ कर दिया कि हम शगुन और कन्यादान में सिर्फ 1 रुपये लेंगे।” हवा सिंह का मानना है कि यह छोटा कदम समाज में बड़ा बदलाव ला सकता है।
हेमा की खुशी और संदेश
दुल्हन हेमा ने अपनी शादी को लेकर खुशी जताई और कहा कि वह दहेज प्रथा के सख्त खिलाफ हैं। “मैं बहुत खुश हूं कि मेरे ससुराल वालों ने इतना बड़ा कदम उठाया। यह समाज के लिए एक मजबूत संदेश है कि शादी प्रेम और विश्वास का बंधन है, न कि लेन-देन का सौदा।” हेमा की यह बात उन तमाम लड़कियों के लिए प्रेरणा है, जो दहेज के दबाव में अपनी जिंदगी का फैसला लेने से डरती हैं।
दहेज लोभियों को करारा जवाब
हेमा के दादा ओमप्रकाश ने इस शादी को एक ऐतिहासिक पल बताया। उन्होंने कहा, “जब हमने नवीन को अपनी पोती के लिए चुना, तो हमें उनका परिवार बहुत पसंद आया। जब उन्होंने दहेज में कुछ भी न लेने की बात कही, तो हमें गर्व हुआ। आज के समय में ऐसे लोग कम ही मिलते हैं, जो दहेज लोभियों को आईना दिखाएं।” ओमप्रकाश का मानना है कि यह शादी समाज में जागरूकता फैलाने और दहेज जैसी कुप्रथा को खत्म करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
समाज के लिए प्रेरणा
यह शादी उन तमाम लोगों के लिए एक सबक है, जो दहेज को शादी का अनिवार्य हिस्सा मानते हैं। नवीन और हेमा की यह पहल दर्शाती है कि छोटे-छोटे कदम समाज में बड़े बदलाव ला सकते हैं। यह कहानी न केवल नारनौल के लोगों के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए एक प्रेरणा है। दहेज के खिलाफ ऐसी पहलें समाज को सकारात्मक दिशा में ले जाएंगी और युवाओं को प्रेरित करेंगी कि वे भी इस कुप्रथा को खत्म करने में योगदान दें।
आप भी बनें बदलाव का हिस्सा
यदि आप भी दहेज प्रथा के खिलाफ हैं, तो नवीन और हेमा की तरह अपने परिवार और समाज में जागरूकता फैलाएं। शादी को प्रेम और सम्मान का प्रतीक बनाएं, न कि सामाजिक दबाव का। इस तरह के कदम न केवल आपके परिवार को गर्व का अनुभव कराएंगे, बल्कि समाज में एक नई सोच को जन्म देंगे। नवीन और हेमा की इस अनोखी शादी को सलाम, जिन्होंने साबित किया कि सच्चा प्रेम पैसे से नहीं, दिल से जीता जाता है।












