चंडीगढ़. हरियाणा को वर्ल्ड बैंक से जल संरक्षण के लिए 5700 करोड़ रुपये की मदद मिली है। इस प्रोजेक्ट से नहरों का नवीनीकरण होगा और 2032 तक हर खेत को पानी मिलेगा। जानें किसानों को क्या फायदे होंगे।
हरियाणा के किसानों और आम जनता के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी सामने आई है। प्रदेश में गिरते भूजल स्तर और सिंचाई की चुनौतियों से निपटने के लिए विश्व बैंक ने हरियाणा सरकार का हाथ थामा है। ‘जल संरक्षित हरियाणा प्रोजेक्ट’ के तहत वर्ल्ड बैंक ने राज्य को 5700 करोड़ रुपये की भारी भरकम आर्थिक सहायता देने की मंजूरी दी है।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना का सीधा मकसद हरियाणा को पानी के मामले में आत्मनिर्भर बनाना है। सरकार की योजना है कि आने वाले समय में प्रदेश के हर खेत तक नहरी पानी पहुंचे और भूमिगत जल को बचाया जा सके। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस प्रोजेक्ट को राज्य के कृषि भविष्य के लिए एक मील का पत्थर बताया है।
अगले 6 सालों में बदल जाएगी तस्वीर
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि यह फंड एक साथ नहीं बल्कि चरणों में मिलेगा। यह परियोजना वर्ष 2026 से शुरू होकर 2032 तक चलेगी। इन छह सालों के दौरान मिलने वाली राशि का उपयोग जर्जर हो चुकी नहरों को ठीक करने और नई जल संरक्षण तकनीकों को अपनाने में किया जाएगा।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रोजेक्ट न केवल आज की जरूरतों को पूरा करेगा बल्कि आने वाली पीढ़ी के लिए भी पानी सुरक्षित करेगा। इसका लक्ष्य पानी की बर्बादी को शून्य स्तर पर लाना है।
नहरों का होगा पूर्ण कायाकल्प
हरियाणा की सिंचाई व्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली नहरों को नया जीवन दिया जाएगा। आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में कुल 1570 नहरें हैं। इनमें से करीब 892 नहरों का सुधार पिछले दो दशकों में किया जा चुका है।
अब सरकार का फोकस शेष बची 678 नहरों पर है। अगले पांच सालों के भीतर इन सभी नहरों की मरम्मत की जाएगी। इसके लिए वर्ल्ड बैंक के साथ साथ नाबार्ड और राज्य सरकार के फंड का भी इस्तेमाल होगा। इससे अंतिम छोर यानी टेल तक पानी पहुंचने की समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी।
छोटी माइनर नहरों पर विशेष ध्यान
बड़ी नहरों के अलावा खेतों तक पानी ले जाने वाली छोटी माइनर नहरों की भी सुध ली जाएगी। राज्य में ऐसी लगभग 15 हजार से ज्यादा छोटी नहरें हैं। सरकार ने फैसला लिया है कि अगले 5 वर्षों में बची हुई सभी माइनर नहरों को पक्का किया जाएगा ताकि रास्ते में पानी की लीकेज रोकी जा सके।
कम पानी में ज्यादा खेती का मंत्र
इस योजना का एक बड़ा हिस्सा माइक्रो इरिगेशन यानी सूक्ष्म सिंचाई पर खर्च होगा। इसके लिए 900 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। लक्ष्य यह है कि 70 हजार एकड़ भूमि पर टपक सिंचाई या फव्वारा सिस्टम लगाया जाए। इससे न केवल पानी बचेगा बल्कि फसल की पैदावार भी बढ़ेगी।
सेम की समस्या से मिलेगी मुक्ति
हरियाणा के कई जिलों में जलभराव या सेम की समस्या किसानों के लिए सिरदर्द बनी हुई है। खेत पानी में डूबने से फसलें बर्बाद हो जाती हैं। इस प्रोजेक्ट के तहत जलभराव वाली करीब 2 लाख एकड़ जमीन को खेती योग्य बनाया जाएगा। वहां से पानी निकालने के लिए ड्रेनेज सिस्टम और ट्यूबवेल लगाए जाएंगे।
साउथ हरियाणा में बनेंगे 80 नए तालाब
दक्षिण हरियाणा जहां पानी की सबसे ज्यादा किल्लत रहती है वहां सरकार 80 नए जलाशय बनाएगी। इनका काम बारिश के पानी को इकट्ठा करना होगा। इसके अलावा जींद और गुरुग्राम जैसे शहरों के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से निकले साफ पानी को खेती के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। इससे करीब 28 हजार एकड़ में सिंचाई हो सकेगी।
फसल विविधीकरण पर जोर
सरकार उन किसानों को भी मदद देगी जो धान जैसी ज्यादा पानी वाली फसलों को छोड़कर कम पानी वाली फसलें उगाएंगे। सीधी बिजाई और फसल विविधीकरण के लिए 886 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इससे भूजल पर दबाव कम होगा।













