प्रगति मैदान में आयोजित 53वें विश्व पुस्तक मेले में युवा लेखक विकास बिश्नोई की पुस्तक ‘अनकहे लम्हे’ का विमोचन किया गया। तकनीकी पेशेवर होने के बावजूद विकास ने साहित्य जगत में अपनी पहचान बनाई है।
नई दिल्ली। साहित्य और किताबों के महाकुंभ कहे जाने वाले विश्व पुस्तक मेले में इस बार युवा कलमकारों की धूम मची हुई है। दिल्ली के प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम में चल रहे 53वें विश्व पुस्तक मेले में शनिवार को एक बेहद खास पल देखने को मिला।
यहां के लेखक मंच पर हरियाणा के युवा कहानीकार विकास बिश्नोई की नई पुस्तक ‘अनकहे लम्हे’ का लोकार्पण किया गया। यह पुस्तक प्रयागराज के प्रतिष्ठित इंक पब्लिकेशन द्वारा प्रकाशित की गई है। इस मौके पर साहित्य प्रेमियों की भारी भीड़ मौजूद रही और सबने युवा लेखक की इस उपलब्धि की सराहना की।
तकनीकी दुनिया का प्रोफेशनल और साहित्य का प्रेमी
विकास बिश्नोई की कहानी आज की युवा पीढ़ी के लिए एक मिसाल है। आमतौर पर माना जाता है कि तकनीकी क्षेत्र में काम करने वाले लोग साहित्य से दूर हो जाते हैं लेकिन विकास ने इस भ्रम को तोड़ा है। वे मूल रूप से हिसार के रहने वाले हैं और गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से पढ़ाई पूरी करने के बाद पिछले पांच सालों से पंचकूला में बतौर बिजनेस एनालिस्ट काम कर रहे हैं।
दिन भर कॉर्पोरेट जगत की उलझनों को सुलझाने वाले विकास शाम को शब्दों की दुनिया में सुकून तलाशते हैं। उनके पिता पृथ्वी सिंह बैनीवाल भी एक कवि हैं जिससे लेखन के संस्कार उन्हें विरासत में मिले हैं।
क्या है ‘अनकहे लम्हे’ में खास
किताब के विमोचन के दौरान इंक पब्लिकेशन के प्रतिनिधि दिनेश कुशवाहा ने बताया कि विकास बिश्नोई एक बेहद संवेदनशील लेखक हैं। उनकी किताब ‘अनकहे लम्हे’ मानवीय रिश्तों की उन परतों को खोलती है जिन पर अक्सर हम बात करना भूल जाते हैं।
इसमें रिश्तों की मिठास के साथ साथ एक अजीब सी कसक और आंतरिक द्वंद्व भी है। मंच का संचालन कर रही लेखिका सविता सिंह सैवी ने कहा कि यह किताब पढ़ते समय ऐसा लगता है जैसे हम अपनी ही कहानी पढ़ रहे हों।
खेल के मैदान से लेकर लेखन तक
विकास बिश्नोई केवल कलम के ही धनी नहीं हैं बल्कि वे खेल के मैदान में भी अपना लोहा मनवा चुके हैं। उन्होंने योग प्रतियोगिताओं में राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर कई पदक जीते हैं।
शिक्षा और सामाजिक कार्यों में योगदान के लिए उन्हें पहले भी कई मंचों पर सम्मानित किया जा चुका है। अब तक उनके दो कहानी संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं और देश के विभिन्न अखबारों में उनके लेख छपते रहते हैं।
इन पुस्तकों का भी हुआ विमोचन
इस गरिमामय कार्यक्रम में विकास बिश्नोई की किताब के अलावा कई और रचनाकारों की कृतियों का भी लोकार्पण हुआ।
डॉ हरिवंश राय बच्चन पुरस्कार विजेता कवयित्री मोनिका शर्मा की पुस्तक ‘याद तुम्हारी’
सोनू चौहान के दो कहानी संग्रह ‘शायर का घर’ और ‘वतन की मिट्टी’
सरस आजाद की पुस्तक ‘मनु फिरदौस’
अलंकृता राय का काव्य संग्रह ‘गीली मिट्टी’
सुरभि जैन की ‘रूपांतरा’ और जयंती सेन मीना की ‘सरकती परछाइयाँ’
35 देशों के प्रकाशक हुए शामिल
नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला दुनिया के सबसे बड़े पुस्तक मेलों में गिना जाता है। इस बार 10 जनवरी से 18 जनवरी तक चलने वाले इस मेले में रूस स्पेन जापान फ्रांस और ईरान समेत 35 से ज्यादा देशों के प्रकाशक हिस्सा ले रहे हैं। मेले में लगभग 1000 प्रकाशकों ने अपने स्टॉल लगाए हैं। यहां 3000 से ज्यादा स्टॉल पर किताबों का संसार सजा हुआ है जहां हर रोज साहित्य चर्चा और विमोचन के कार्यक्रम हो रहे हैं।












