गुरुग्राम, 04 अप्रैल (हरियाणा न्यूज पोस्ट)। हरियाणा में रिहायशी प्लॉटों पर ‘स्टिल्ट प्लस 4’ मंजिल बनाने के सपने देख रहे लोगों को बड़ा झटका लगा है। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा 2 अप्रैल को सुनाए गए अंतरिम आदेश के पालन में हरियाणा सरकार ने इस पॉलिसी को तत्काल प्रभाव से रोक दिया है। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग (TCP) के महानिदेशक सीएस खरे ने आज एक आधिकारिक पत्र जारी कर हाउसिंग फॉर ऑल, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) और शहरी स्थानीय निकाय विभाग को सभी संबंधित मंजूरियों को तुरंत निलंबित करने का आदेश दिया है। अब जब तक हाईकोर्ट इस पाबंदी को नहीं हटाता, तब तक प्रदेश में कहीं भी 4 मंजिलों के नए नक्शे पास नहीं होंगे।
बुनियादी ढांचे की बदहाली पर कोर्ट का कड़ा रुख
हाईकोर्ट ने ‘सुनील सिंह बनाम हरियाणा राज्य’ मामले की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को कड़ी चेतावनी दी थी। अदालत ने विशेष रूप से गुरुग्राम का उदाहरण देते हुए कहा कि पर्याप्त सीवरेज, ड्रेनेज और ट्रैफिक प्रबंधन के बिना चौथी मंजिल की अनुमति देना नागरिक सुविधाओं पर भारी बोझ डाल रहा है। कोर्ट ने साफ किया कि बुनियादी ढांचे की क्षमता का ऑडिट किए बिना ऐसी नीतियां लागू करना जनता के लिए खतरा है। इसी के बाद विभाग ने 2 जुलाई 2024 के उस आदेश के संचालन पर रोक लगा दी है, जिसके तहत निर्माण की अनुमति दी जा रही थी।
690 करोड़ रुपये के बजट का हिसाब मांगेगी सरकार
पॉलिसी पर रोक लगाने के साथ ही महानिदेशक सीएस खरे ने HSVP के अधिकारियों पर भी शिकंजा कसा है। उन्होंने 2024 में टीसीपी विभाग द्वारा इंफ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने के लिए ट्रांसफर किए गए 689.80 करोड़ रुपये का ब्यौरा मांगा है। विभाग जानना चाहता है कि इस भारी-भरकम राशि का इस्तेमाल शहरों की सुविधाएं सुधारने में कहां और कैसे किया गया। अभी तक HSVP की ओर से इस फंड के उपयोग की जानकारी नहीं दी गई है, जिसे लेकर सरकार ने अब कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है।
आम जनता और घर मालिकों पर असर
सरकार के इस फैसले का सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा जिन्होंने चौथी मंजिल बनाने के लिए हाल ही में आवेदन किया था। गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे शहरों में पहले से ही बुनियादी ढांचे की कमी के कारण निवासी इस पॉलिसी का विरोध कर रहे थे। आरडब्ल्यूए (RWAs) का मानना है कि इस रोक से अवैध निर्माण और सीवरेज ओवरफ्लो जैसी समस्याओं पर लगाम लगेगी। हालांकि, जिन लोगों के काम बीच में अटक गए हैं, उन्हें अब कोर्ट के अगले फैसले का इंतजार करना होगा।
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