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स्टिल्ट प्लस 4 पॉलिसी पर बड़ा फैसला: गुरुग्राम और फरीदाबाद के निवासियों को मिली बड़ी राहत

On: अप्रैल 3, 2026 2:20 अपराह्न
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स्टिल्ट प्लस 4 पॉलिसी पर बड़ा फैसला: गुरुग्राम और फरीदाबाद के निवासियों को मिली बड़ी राहत
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गुरुग्राम, 03 अप्रैल (हरियाणा न्यूज पोस्ट)। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार की महत्वाकांक्षी ‘स्टिल्ट प्लस 4’ मंजिल नीति पर बड़ा हंटर चलाया है। चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस संजीव बेरी की खंडपीठ ने इस नीति पर रोक लगाते हुए स्पष्ट किया कि राज्य सरकार ने बुनियादी ढांचे की जमीनी हकीकत को पूरी तरह नजरअंदाज किया है। कोर्ट ने तल्ख लहजे में कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि हरियाणा सरकार ने केवल अधिक राजस्व अर्जित करने के लिए आम जनता की सुरक्षा और सुरक्षा को दांव पर लगा दिया है। यह फैसला उन हजारों निवासियों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है जो रिहायशी सेक्टरों में बढ़ती भीड़ और घटती सुविधाओं से परेशान थे।

गुरुग्राम और फरीदाबाद के बुनियादी ढांचे पर बढ़ा दबाव

इस नीति के तहत आवासीय प्लॉटों पर स्टिल्ट के साथ चार मंजिलों के निर्माण की अनुमति दी गई थी, जबकि पहले बिना स्टिल्ट के केवल तीन मंजिलों का प्रावधान था। गुरुग्राम, फरीदाबाद, हिसार और रोहतक की रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) लंबे समय से इसका विरोध कर रही थीं। स्थानीय निवासियों का तर्क है कि पुराने सेक्टरों की सीवरेज लाइन, पानी की सप्लाई और बिजली ग्रिड इस अतिरिक्त आबादी का भार सहने के लिए तैयार नहीं हैं। ऊंची इमारतों के कारण न केवल धूप और ताजी हवा बाधित हो रही है, बल्कि संकरी गलियों में पार्किंग और ट्रैफिक जाम की समस्या विकराल हो गई है।

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एक्सपर्ट पैनल की सिफारिशों की अनदेखी का आरोप

राज्य सरकार द्वारा 2023 में गठित एक विशेषज्ञ समिति ने इस नीति को लेकर कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए थे। समिति ने सिफारिश की थी कि S+4 निर्माण की अनुमति केवल तभी दी जाए जब बुनियादी ढांचे का ऑडिट और सुदृढ़ीकरण (Augmentation) हो चुका हो। पैनल ने इमारतों की ऊंचाई कम करने, केवल पारिवारिक आवास के लिए अनुमति देने और स्टिल्ट पार्किंग के दुरुपयोग को रोकने के लिए क्विक रिस्पांस टीम बनाने की बात कही थी। हाईकोर्ट ने पाया कि सरकार ने इन अनिवार्य पहलुओं और ‘इंफ्रास्ट्रक्चर क्षमता ऑडिट’ को दरकिनार कर गुरुग्राम जैसे शहरों में निर्माण की अनुमति दी, जहां पहले से ही संसाधनों की भारी कमी है।

क्या होगा आम आदमी पर असर?

कोर्ट के इस आदेश के बाद अब नए बिल्डिंग प्लान की मंजूरी पर तलवार लटक गई है। जिन लोगों ने पहले से निर्माण शुरू कर दिया है या जिनके नक्शे पास हो चुके हैं, वहां भी इंफ्रास्ट्रक्चर ऑडिट की अनिवार्यता लागू हो सकती है। आम आदमी के लिए इसका सीधा मतलब है कि अब रिहायशी इलाकों में बेतरतीब कंक्रीट के जंगल खड़ा करना आसान नहीं होगा। कोर्ट का रुख साफ है कि विकास के नाम पर रिहायशी इलाकों के मूल स्वरूप और वहां रहने वाले लोगों की जीवन गुणवत्ता (Quality of Life) से समझौता नहीं किया जा सकता।

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अमित गुप्ता

पत्रकारिता में पिछले 30 वर्षों का अनुभव। दैनिक भास्कर, अमर उजाला में पत्रकारिता की। दैनिक भास्कर में 20 वर्षों तक काम किया। अब अपने न्यूज पोर्टल हरियाणा न्यूज पोस्ट (Haryananewspost.com) पर बतौर संपादक काम कर रहा हूं। खबरों के साथ साथ हरियाणा के हर विषय पर पकड़। हरियाणा के खेत खलियान से राजनीति की चौपाल तक, हरियाणा सरकार की नीतियों के साथ साथ शहर के विकास की बात हो या हर विषयवस्तु पर लिखने की धाकड़ पकड़। म्हारा हरियाणा, जय हरियाणा।

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