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Chhath Puja Vrat Katha: छठी मइया की व्रत कथा, जानें राम-सीता, कर्ण की कहानियां!

On: अक्टूबर 27, 2025 2:53 अपराह्न
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Chhath Puja Vrat Katha: छठी मइया की व्रत कथा, जानें राम-सीता, कर्ण की कहानियां!
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Chhath Puja Vrat Katha in hindi: छठ पूजा उत्तर भारत का सबसे पवित्र और भक्ति से भरा महापर्व है, जिसमें सूर्य देव और छठी मइया की पूजा की जाती है। इस चार दिन के पर्व में हर दिन पूजा के बाद छठी मइया की व्रत कथा पढ़ने की परंपरा है, जो भक्तों को सूर्य और छठी मइया की कृपा दिलाती है।

ये कथाएं भक्ति, श्रद्धा और चमत्कारों से भरी हैं, जो इस पर्व को और भी खास बनाती हैं। अगर आप छठ पूजा 2025 की व्रत कथाओं को हिंदी में पढ़ना चाहते हैं या PDF डाउनलोड करना चाहते हैं, तो ये खबर आपके लिए है। आइए, जानते हैं प्रियंवद, कर्ण, राम-सीता और अन्य पौराणिक कथाओं के बारे में, जो छठ पूजा में पढ़ी जाती हैं।

प्रियंवद और मालिनी की कहानी Chhath Puja Vrat Katha

पुराणों के अनुसार, राजा प्रियंवद और उनकी पत्नी मालिनी को संतान नहीं थी। महर्षि कश्यप ने उनके लिए पुत्र प्राप्ति का यज्ञ करवाया और यज्ञ की खीर मालिनी को खाने को दी।

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खीर के प्रभाव से उन्हें पुत्र तो मिला, लेकिन वह मृत पैदा हुआ। दुखी प्रियंवद श्मशान में पुत्र के साथ प्राण त्यागने जा रहे थे, तभी भगवान की मानस पुत्री देवसेना प्रकट हुईं। उन्होंने बताया कि वह सृष्टि के छठे अंश से उत्पन्न होने के कारण षष्ठी कहलाती हैं। देवी ने राजा को उनकी पूजा करने और दूसरों को प्रेरित करने का आदेश दिया। राजा ने कार्तिक शुक्ल षष्ठी को व्रत किया और जल्द ही उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। तभी से छठी मइया की पूजा की परंपरा शुरू हुई।

कर्ण ने शुरू की सूर्य अर्घ्य की परंपरा

महाभारत काल में दानवीर कर्ण, जो माता कुंती और सूर्य देव के पुत्र थे, नियमित रूप से सुबह सूर्य को अर्घ्य देते थे। सूर्य देव की विशेष कृपा के कारण उनकी भक्ति से ही सूर्य अर्घ्य की परंपरा शुरू हुई। इसके अलावा, कुंती और द्रौपदी ने भी छठ व्रत रखा था। कहते हैं कि द्रौपदी के छठ व्रत के बाद ही पांडवों को उनका खोया हुआ राजपाट वापस मिला।

राम-सीता का छठ व्रत

रामायण में भी छठ पूजा का जिक्र मिलता है। भगवान राम, जो सूर्यवंशी थे, और माता सीता ने राम राज्य की स्थापना से पहले कार्तिक शुक्ल षष्ठी को सूर्य देव की विधि-विधान से पूजा की थी। उनकी भक्ति ने इस पर्व को और भी पवित्र बना दिया।

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महीपाल की कहानी

हिंदू मान्यताओं के अनुसार, बिन्दुसर तीर्थ में वैश्य महीपाल रहता था, जो धर्म और देवताओं में विश्वास नहीं करता था। उसने सूर्य देव की मूर्ति का अपमान किया, जिसके कारण सूर्य देव ने उसे अंधा होने का श्राप दिया।

दुखी महीपाल ने जब गंगा में प्राण त्यागने का फैसला किया, तब नारद मुनि ने उसे सूर्य देव की पूजा और छठ व्रत करने की सलाह दी। व्रत और पूजा के बाद महीपाल की आंखों की रोशनी लौट आई और उसके सारे कष्ट दूर हो गए।

पांडवों की कहानी

महाभारत में जब पांडव जुए में अपना राजपाट हारकर वनवास में थे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने द्रौपदी को छठ व्रत और सूर्य साधना करने की सलाह दी। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से पांडवों को उनका खोया वैभव वापस मिला। ये कथा छठ पूजा की शक्ति और महत्व को दर्शाती है।

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मोनिका गुप्ता

मोनिका गुप्ता एक अनुभवी लेखिका हैं, जो पिछले 10 वर्षों से लाइफस्टाइल, एंटरटेनमेंट, ट्रेंडिंग टॉपिक्स और राशिफल पर हिंदी में आकर्षक और जानकारीपूर्ण लेख लिख रही हैं। उनकी रचनाएं पाठकों को दैनिक जीवन की सलाह, मनोरंजन की दुनिया की झलक, वर्तमान ट्रेंड्स की गहराई और ज्योतिषीय भविष्यवाणियों से जोड़ती हैं। मोनिका जी का लेखन सरल, रोचक और प्रासंगिक होता है, जो लाखों पाठकों को प्रेरित करता है। वे विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और न्यूज़ पोर्टल्स (Haryananewspost.com) पर सक्रिय हैं, जहाँ उनकी कलम से निकले लेख हमेशा चर्चा का विषय बन जाते हैं।

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