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Dev Uthani Ekadashi: भगवान विष्णु जागेंगे, शादियां-मुंडन सब शुरू! क्या आप तैयार?

On: अक्टूबर 30, 2025 6:19 पूर्वाह्न
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Dev Uthani Ekadashi: भगवान विष्णु जागेंगे, शादियां-मुंडन सब शुरू! क्या आप तैयार?
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Dev Uthani Ekadashi Lord Vishnu: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि को भगवान विष्णु की पूजा के लिए सबसे पवित्र माना जाता है।

हर महीने की शुक्ल और कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी में से कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी का स्थान सबसे ऊंचा है। इसे ‘देवउठनी एकादशी’, ‘प्रबोधिनी एकादशी’ या ‘देवोत्थान एकादशी’ के नाम से जाना जाता है। यह वह दिन है जब चार महीने की योगनिद्रा से भगवान विष्णु जागते हैं और संसार में दोबारा शुभ कार्यों की शुरुआत होती है।

Dev Uthani Ekadashi

2025 में यह पावन पर्व 1 नवंबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा। कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 1 नवंबर को सुबह 9 बजकर 11 मिनट से शुरू होकर 2 नवंबर को सुबह 7 बजकर 31 मिनट तक रहेगी।

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अधिकतर लोग 1 नवंबर को ही व्रत और पूजन करेंगे, जबकि वैष्णव संप्रदाय के अनुयायी 2 नवंबर को मनाएंगे। व्रत का पराण 2 नवंबर को सुबह 7:31 बजे के बाद होगा। यह पर्व दीपावली 10 दिन बाद आता है। इस दिन से ही चातुर्मास की समाप्ति हो जाती है।

क्यों मनाई जाती है देवउठनी एकादशी?

देवउठनी एकादशी की कथा पद्म पुराण और विष्णु पुराण में मिलती है। इसके अनुसार भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर दैत्यराज बलि से तीन पग भूमि दान मांगी थी।

पहले पग में उन्होंने स्वर्ग और दूसरे में पृथ्वी को नाप लिया। तीसरे पग के लिए बलि ने अपना सिर आगे कर दिया। भगवान प्रसन्न हुए और बलि को पाताल लोक का स्वामी बनाया। बलि ने विनम्रता से प्रार्थना की कि भगवान उनके द्वार पर सदा निवास करें। इस पर भगवान विष्णु जी ने वरदान दिया कि वे साल के चार महीने में उनके यहां पर रहेंगे।

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इस प्रकार आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी (देवशयनी) से भगवान विष्णु क्षीरसागर में शेषनाग पर योगनिद्रा में लीन हो जाते हैं। इसके चार महीने बाद कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को वे जागते हैं। यही दिन देवउठनी एकादशी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन से चातुर्मास समाप्त होता है और सभी मांगलिक कार्य दोबारा शुरू हो जाते हैं।

क्या है इस दिन का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व?

देवउठनी एकादशी का व्रत रखने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। भगवान विष्णु की कृपा से जीवन में सुख, समृद्धि और शांति की प्राप्ति होती है। चातुर्मास में रुके हुए विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन जैसे संस्कार इसी दिन से फिर शुरू हो जाते हैं। तुलसी विवाह इस पर्व का अभिन्न अंग है।

तुलसी को विष्णु प्रिया माना जाता है और इस दिन विष्णु स्वरूप शालिग्राम से उनका विवाह संपन्न किया जाता है। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और दांपत्य जीवन में मधुरता आती है।

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मोनिका गुप्ता

मोनिका गुप्ता एक अनुभवी लेखिका हैं, जो पिछले 10 वर्षों से लाइफस्टाइल, एंटरटेनमेंट, ट्रेंडिंग टॉपिक्स और राशिफल पर हिंदी में आकर्षक और जानकारीपूर्ण लेख लिख रही हैं। उनकी रचनाएं पाठकों को दैनिक जीवन की सलाह, मनोरंजन की दुनिया की झलक, वर्तमान ट्रेंड्स की गहराई और ज्योतिषीय भविष्यवाणियों से जोड़ती हैं। मोनिका जी का लेखन सरल, रोचक और प्रासंगिक होता है, जो लाखों पाठकों को प्रेरित करता है। वे विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और न्यूज़ पोर्टल्स (Haryananewspost.com) पर सक्रिय हैं, जहाँ उनकी कलम से निकले लेख हमेशा चर्चा का विषय बन जाते हैं।

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