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40 की उम्र के बाद महिलाओं में क्यों बिगड़ता है हार्मोनल संतुलन? एक्सपर्ट ने बताए 5 सुपरफूड्स

On: June 8, 2026 5:19 PM
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40 की उम्र के बाद महिलाओं में क्यों बिगड़ता है हार्मोनल संतुलन? एक्सपर्ट ने बताए 5 सुपरफूड्स
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देशभर में 40 की उम्र पार कर चुकी करोड़ों महिलाएं इन दिनों एक ऐसी खामोश समस्या से जूझ रही हैं, जिसे वे अक्सर बढ़ती उम्र का साधारण असर समझकर दबा देती हैं। महिलाओं के बीच अचानक बिना वजह गुस्सा आना, रातभर नींद न आना, शरीर में अत्यधिक गर्मी लगना (हॉट फ्लैशेस) और लगातार कमजोरी रहने की शिकायतें तेजी से बढ़ी हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक यह कोई सामान्य कमजोरी नहीं, बल्कि मेनोपॉज से ठीक पहले की स्थिति यानी पेरीमेनोपॉज (Perimenopause) के लक्षण हैं। देश की जानी-मानी हेल्थ इन्फ्लुएंसर और हार्मोन व गट हेल्थ डाइटीशियन मनप्रीत कालरा ने इस समस्या के पीछे के वैज्ञानिक कारणों को स्पष्ट करते हुए बताया है कि कैसे सही पोषण के दम पर महिलाएं इस कठिन दौर को बेहद आसान बना सकती हैं।

40 के बाद महिलाओं में हार्मोन असंतुलन का कारण क्या है?

हार्मोन स्पेशलिस्ट मनप्रीत कालरा के अनुसार, 40 वर्ष की आयु के बाद महिलाओं के अंडाशय से एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन नामक हार्मोनों का उत्पादन धीरे-धीरे कम होने लगता है। इसी उतार-चढ़ाव वाले समय को चिकित्सा विज्ञान में पेरीमेनोपॉज कहा जाता है। यह बदलाव शरीर के पूरे मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करता है, जिसके कारण पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं और महिलाओं का मूड पल-पल में बदलने लगता है। इस स्थिति को ठीक करने के लिए किसी कृत्रिम दवाओं या हार्मोन थेरेपी के जाल में फंसने के बजाय अपनी रोजमर्रा की डाइट में छोटे लेकिन जरूरी बदलाव करना सबसे सटीक और सुरक्षित उपाय माना जाता है।

हार्मोन बैलेंस करने के लिए कौन से फूड्स खाएं?

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डाइटीशियन मनप्रीत कालरा ने महिलाओं के शरीर में घटते एस्ट्रोजन स्तर को प्राकृतिक रूप से बढ़ाने और हार्मोन्स को संतुलित करने के लिए 5 सबसे ताकतवर खाद्य पदार्थों की सूची साझा की है।

अलसी के बीज (Flaxseeds): अलसी के छोटे बीजों में प्रचुर मात्रा में लिग्नांस पाए जाते हैं, जो शरीर में जाकर कमजोर एस्ट्रोजन की तरह काम करते हैं और हार्मोनल उतार-चढ़ाव को शांत करते हैं। इसे पीसकर दही, सलाद या रोजाना के आटे में मिलाकर आसानी से खाया जा सकता है।

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सोया प्रोडक्ट्स (Soy Foods): टोफू, सोया चंक्स और सोया मिल्क में फाइटोएस्ट्रोजेन नामक प्राकृतिक तत्व होता है। यह महिलाओं के शरीर में मेनोपॉज के दौरान होने वाली पोषक तत्वों की कमी को पूरा करता है। हालांकि, इसका सीमित और संतुलित मात्रा में ही सेवन करना चाहिए।

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दालें और बीन्स (Pulses & Beans): पेरीमेनोपॉज के दौरान शरीर में ऊर्जा का स्तर बहुत तेजी से गिरता है। ऐसे में राजमा, छोले, मसूर और अन्य दालें शरीर को जरूरी कॉम्प्लेक्स कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन देती हैं, जिससे पेट लंबे समय तक भरा रहता है और थकान दूर होती है।

सफेद तिल और हरी सब्जियां (Sesame Seeds & Green Leafy Vegetables): 40 की उम्र के बाद महिलाओं की हड्डियों का घनत्व (Bone Density) घटने लगता है, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ता है। इससे बचने के लिए पालक, मेथी, बथुआ और तिल का नियमित सेवन करना चाहिए, जो शरीर को भरपूर कैल्शियम और आयरन प्रदान करते हैं।

अखरोट और ओमेगा-3 फूड्स (Walnuts & Omega-3): अखरोट और अलसी में पाया जाने वाला ओमेगा-3 फैटी एसिड शरीर के अंदरूनी अंगों की सूजन (Inflammation) को कम करता है। यह दिल की सेहत को दुरुस्त रखने के साथ-साथ मस्तिष्क की कोशिकाओं को सक्रिय करता है, जिससे मूड स्विंग्स और चिड़चिड़ापन तुरंत ठीक होता है।

पेरीमेनोपॉज के लक्षणों को कम करने के लिए घरेलू उपाय क्या हैं?

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मनप्रीत कालरा स्पष्ट रूप से सचेत करती हैं कि केवल अच्छा खाना खा लेने भर से हार्मोन्स पूरी तरह संतुलित नहीं हो सकते। इसके लिए महिलाओं को अपनी लाइफस्टाइल में भी कुछ बुनियादी सुधार करने होंगे। रोजाना कम से कम 30 मिनट की हल्की शारीरिक गतिविधि जैसे वॉक, योग या प्राणायाम को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। रात में 7 से 8 घंटे की गहरी और आरामदायक नींद लेना शरीर के हार्मोनल हीलिंग प्रोसेस के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है। मानसिक तनाव को कम करने के लिए ध्यान का सहारा लें, क्योंकि अत्यधिक तनाव से कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ता है, जो बाकी सभी अच्छे हार्मोन्स के काम को बिगाड़ देता है। यह जीवन का एक बेहद सामान्य और प्राकृतिक पड़ाव है, जिसे सही जानकारी और सही खानपान की मदद से बेहद स्वस्थ तरीके से जिया जा सकता है।

मोनिका गुप्ता

मोनिका गुप्ता एक अनुभवी लेखिका हैं, जो पिछले 10 वर्षों से लाइफस्टाइल, एंटरटेनमेंट, ट्रेंडिंग टॉपिक्स और राशिफल पर हिंदी में आकर्षक और जानकारीपूर्ण लेख लिख रही हैं। उनकी रचनाएं पाठकों को दैनिक जीवन की सलाह, मनोरंजन की दुनिया की झलक, वर्तमान ट्रेंड्स की गहराई और ज्योतिषीय भविष्यवाणियों से जोड़ती हैं। मोनिका जी का लेखन सरल, रोचक और प्रासंगिक होता है, जो लाखों पाठकों को प्रेरित करता है। वे विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और न्यूज़ पोर्टल्स (Haryananewspost.com) पर सक्रिय हैं, जहाँ उनकी कलम से निकले लेख हमेशा चर्चा का विषय बन जाते हैं।

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