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Dussehra shastra pujan: दशहरा 2025 पर आयुध पूजा का शुभ मुहूर्त और मंत्र, जानें सब!

On: October 1, 2025 10:40 PM
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Dussehra shastra pujan: दशहरा 2025 पर आयुध पूजा का शुभ मुहूर्त और मंत्र, जानें सब!
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Dussehra shastra pujan ka samay kya hai 2025: दशहरा, जिसे विजयादशमी भी कहते हैं, बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इस साल 2025 में यह पवित्र पर्व 2 अक्टूबर, गुरुवार को मनाया जाएगा। यह शारदीय नवरात्रि का समापन दिन है, जब भगवान श्रीराम ने रावण का वध किया था और माता दुर्गा ने महिषासुर को हराया था। इसके बाद माता अपनी मूल शक्ति आदिशक्ति अपराजिता के रूप में हिमालय में अंतर्ध्यान हो गई थीं। इस दिन माता अपराजिता की पूजा के साथ-साथ आयुध पूजा (शस्त्र पूजा) का भी खास महत्व है। उत्तर भारत में यह पूजा दशहरे के दिन होती है, जबकि दक्षिण भारत में इसे अष्टमी या नवमी पर किया जाता है। आइए, जानते हैं आयुध पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और महत्व।

Dussehra shahtra pujan: आयुध पूजा का शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, दशहरा और आयुध पूजा के लिए विजय मुहूर्त सबसे शुभ माना जाता है, क्योंकि यह विजय का प्रतीक है। 2 अक्टूबर, 2025 को आयुध पूजा का मुहूर्त दोपहर 2:09 बजे से 2:56 बजे तक रहेगा। इसके अलावा, अभिजित मुहूर्त सुबह 11:47 बजे से दोपहर 12:34 बजे तक होगा, जो पूजा और शुभ कार्यों के लिए आदर्श है। मान्यता है कि शुभ मुहूर्त में पूजा करने से माता अपराजिता की कृपा मिलती है, जो युद्ध और कार्यों में विजय दिलाती है।

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दशहरा 2025 की पूजा विधि

आयुध पूजा को सात्विक और विधिवत करना जरूरी है ताकि भगवान राम और माता अपराजिता का आशीर्वाद मिले। सुबह स्नान कर लाल या पीले रंग के साफ कपड़े पहनें। पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें और लाल कपड़े पर माता अपराजिता की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। पूजा के लिए गंगाजल, नीले और सफेद फूल तैयार रखें। शस्त्र पूजा के लिए धनुष-बाण, तलवार, रिवॉल्वर या वाहनों जैसे औजारों को साफ कर पूजा स्थल पर रखें। इन पर रोली, फूल और अक्षत चढ़ाएं।

घी का दीपक जलाएं, धूप दिखाएं और शस्त्रों पर मौली बांधें। ‘शस्त्र देवता पूजनम्, रक्षा कर्ता पूजनम्’ मंत्र का जाप करें। माता अपराजिता को नीले या सफेद फूल चढ़ाएं और ‘ॐ अपराजितायै नम:’, ‘ॐ क्रियाशक्तयै नम:’, ‘ॐ उमायै नम:’ मंत्रों का जाप करें। साथ ही ‘अपराजिताय नम:’, ‘जयायै नम:’, ‘विजयायै नम:’ मंत्रों के साथ शोडषोपचार पूजन करें। ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे’ मंत्र का 108 बार रुद्राक्ष माला से जाप करें। अंत में माता की आरती करें और प्रसाद बांटें। वाहनों को फूलों से सजाकर उनकी पूजा करें। इस विधि से पूजा करने से कार्यों में सफलता और सकारात्मकता मिलती है।

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आयुध पूजा का महत्व

आयुध पूजा का संबंध रामायण, देवी भागवत पुराण और महाभारत से है। रामायण के अनुसार, भगवान राम ने रावण पर विजय के लिए अपने हथियारों की पूजा की थी। देवी भागवत पुराण में बताया गया है कि माता दुर्गा ने महिषासुर का वध करने के बाद उनके दिव्य हथियारों की पूजा की गई थी। माता दुर्गा इसके बाद आदिशक्ति अपराजिता के रूप में अंतर्ध्यान हो गईं। महाभारत में पांडवों ने अपने हथियार शमी वृक्ष में छिपाए थे, जिन्हें दशहरे के दिन निकाला गया, इसलिए शमी वृक्ष की भी पूजा की जाती है। आयुध पूजा रोजमर्रा के औजारों, वाहनों और हथियारों को देवतुल्य मानकर उनकी पूजा करने का पर्व है, जो श्रम का सम्मान और कार्यों में कुशलता देता है।

शनि और मंगल का प्रभाव कम करें

आयुध पूजा शनि और मंगल ग्रहों को प्रसन्न करती है, जो मेहनत, साहस और अनुशासन से जुड़े हैं। मान्यता है कि इस दिन पूजा करने से कार्यों में रुकावटें दूर होती हैं, आर्थिक समृद्धि बढ़ती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

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मोनिका गुप्ता

मोनिका गुप्ता एक अनुभवी लेखिका हैं, जो पिछले 10 वर्षों से लाइफस्टाइल, एंटरटेनमेंट, ट्रेंडिंग टॉपिक्स और राशिफल पर हिंदी में आकर्षक और जानकारीपूर्ण लेख लिख रही हैं। उनकी रचनाएं पाठकों को दैनिक जीवन की सलाह, मनोरंजन की दुनिया की झलक, वर्तमान ट्रेंड्स की गहराई और ज्योतिषीय भविष्यवाणियों से जोड़ती हैं। मोनिका जी का लेखन सरल, रोचक और प्रासंगिक होता है, जो लाखों पाठकों को प्रेरित करता है। वे विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और न्यूज़ पोर्टल्स (Haryananewspost.com) पर सक्रिय हैं, जहाँ उनकी कलम से निकले लेख हमेशा चर्चा का विषय बन जाते हैं।

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