Ganesh Chaturthi 2025: गणेश चतुर्थी का त्योहार नजदीक है, और इस शुभ अवसर पर लोग अपने घर में गणपति बप्पा की मूर्ति लाकर स्थापित करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गणेश जी की मूर्ति की सूंड किस दिशा में होनी चाहिए? जी हां, सूंड का दिशा बहुत मायने रखती है! कुछ लोग बाईं ओर मुड़ी सूंड वाली मूर्ति चुनते हैं, तो कुछ की मूर्तियों में सूंड दाईं ओर यानी दक्षिण दिशा में मुड़ी होती है। सवाल ये है कि कौन सी मूर्ति घर के लिए शुभ है? आइए जानते हैं गणपति की मूर्ति का ये खास रहस्य!
बाईं सूंड वाली मूर्ति क्यों है खास?
हिंदू मान्यताओं के अनुसार, गणेश जी की बाईं ओर मुड़ी सूंड वाली मूर्ति घर में स्थापना के लिए सबसे शुभ मानी जाती है। ये मूर्ति शांति, सुख और समृद्धि का प्रतीक है। बाईं सूंड वाली मूर्ति भक्तों के रास्ते से बाधाएं हटाती है और जीवन में खुशहाली लाती है। साथ ही, ये मूर्ति भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करने में भी मदद करती है। अगर आप गणेश चतुर्थी पर अपने घर में गणपति स्थापित करना चाहते हैं, तो बाईं सूंड वाली मूर्ति चुनना सबसे अच्छा रहेगा।
दाईं सूंड वाली मूर्ति: सावधानी जरूरी
दाईं ओर मुड़ी सूंड वाली गणेश जी की मूर्ति को ‘वक्रतुंड’ या ‘जागृत’ माना जाता है। ये मूर्तियां खास तौर पर साधना और विशेष पूजा के लिए होती हैं। इनकी पूजा में सख्त नियम और विधि-विधान का पालन करना पड़ता है, वरना नकारात्मक परिणाम हो सकते हैं। इसलिए आमतौर पर घरों में दाईं सूंड वाली मूर्ति रखने से बचा जाता है। ऐसी मूर्तियों की पूजा ज्यादातर पंडितों या विशेषज्ञों द्वारा ही कराई जाती है, क्योंकि इसके लिए पूरा ज्ञान और समर्पण जरूरी है।
घर के लिए कौन सी मूर्ति है सही?
ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, बाईं ओर मुड़ी सूंड वाली गणेश जी की मूर्ति घर के लिए आदर्श है। ये मूर्ति न सिर्फ सुख-समृद्धि लाती है, बल्कि जीवन के सभी विघ्नों को दूर करती है। इसके उलट, दाईं सूंड वाली मूर्ति को साधना और तंत्र-मंत्र के लिए ज्यादा उपयुक्त माना जाता है। अगर आप गणेश चतुर्थी पर बप्पा को घर ला रहे हैं, तो बाईं सूंड वाली मूर्ति चुनें, जो आपके परिवार के लिए शांति और खुशहाली लेकर आएगी।












