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साल 2026 की पहली गुप्त नवरात्रि 19 जनवरी से, इन उपायों से दूर होंगे सारे ग्रह दोष

On: जनवरी 19, 2026 8:46 पूर्वाह्न
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साल 2026 की पहली गुप्त नवरात्रि 19 जनवरी से, इन उपायों से दूर होंगे सारे ग्रह दोष
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माघ गुप्त नवरात्रि 2026: एक नज़र में वर्ष 2026 के पहले महीने में ही शक्ति उपासना का महापर्व माघ गुप्त नवरात्रि आ रहा है। पंचांग के अनुसार इस वर्ष माघ गुप्त नवरात्रि की शुरुआत 19 जनवरी 2026, सोमवार से होगी। यह पर्व पूरे नौ दिनों तक चलेगा और इसका समापन 28 जनवरी 2026 को नवमी तिथि पर होगा। आध्यात्मिक जगत में इस समय को सिद्धि और तंत्र साधना के लिए स्वर्णिम काल माना जाता है।

गुप्त नवरात्रि का महत्व और रहस्य

भारतीय आध्यात्म में साल भर में चार नवरात्रि आती हैं। इनमें से दो को प्रकट नवरात्रि कहा जाता है जिन्हें गृहस्थ लोग धूमधाम से मनाते हैं। वहीं माघ और आषाढ़ माह में आने वाली नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। धर्म विशेषज्ञों के अनुसार गुप्त नवरात्रि का मूल उद्देश्य आंतरिक ऊर्जा को जागृत करना होता है।

इस दौरान की गई पूजा और साधना को जितना गोपनीय रखा जाता है, उसका फल उतना ही अधिक मिलता है। यह समय उन साधकों के लिए वरदान समान है जो तंत्र विद्या, मंत्र सिद्धि या विशेष मनोकामना पूर्ति की इच्छा रखते हैं। सामान्य पूजा की जगह इसमें मानसिक जप और ध्यान का महत्व ज्यादा होता है।

दस महाविद्याओं की होती है विशेष साधना

प्रकट नवरात्रि में जहाँ मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा होती है, वहीं गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की आराधना का विधान है। यह महाविद्याएं शक्ति का उग्र और सौम्य दोनों रूप हैं।

मुख्य रूप से इनकी होती है पूजा:

  • मां काली

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  • तारा देवी

  • त्रिपुर सुंदरी (षोडशी)

  • भुवनेश्वरी

  • छिन्नमस्ता

  • त्रिपुर भैरवी

  • धूमावती

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  • बगलामुखी

  • मातंगी

  • कमला

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में ग्रह दोष, विष योग या चांडाल योग हो तो इन महाविद्याओं की गुप्त साधना से राहत मिल सकती है। विशेषकर शत्रु बाधा निवारण के लिए मां बगलामुखी और आर्थिक कष्टों के लिए मां कमला की साधना इस दौरान फलदायी मानी जाती है।

पूजा विधि और नियम

गुप्त नवरात्रि में संयम और सात्विकता का पालन अनिवार्य होता है। साधक को ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर पूजा का संकल्प लेना चाहिए।

  1. कलश स्थापना: प्रतिपदा तिथि यानी 19 जनवरी को शुभ मुहूर्त में कलश स्थापित करें।

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  2. मंत्र जाप: अपनी इच्छानुसार किसी एक महाविद्या या नवार्ण मंत्र का जाप रुद्राक्ष की माला से करें।

  3. सात्विक आहार: नौ दिनों तक तामसिक भोजन जैसे लहसुन और प्याज का त्याग करें।

  4. गोपनीयता: अपनी साधना या संकल्प की चर्चा किसी बाहरी व्यक्ति से न करें।

क्यों अलग है यह नवरात्रि

अक्सर लोग चैत्र और शारदीय नवरात्रि से परिचित होते हैं। लेकिन माघ महीने की गुप्त नवरात्रि ऋतु परिवर्तन और आध्यात्मिक चेतना के जागरण का प्रतीक है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस समय ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रवाह बहुत तीव्र होता है। इसलिए साधक कम समय में ही मंत्रों को सिद्ध कर पाते हैं। यह समय आत्मिक शुद्धि और नकारात्मक शक्तियों के नाश के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है।

मोनिका गुप्ता

मोनिका गुप्ता एक अनुभवी लेखिका हैं, जो पिछले 10 वर्षों से लाइफस्टाइल, एंटरटेनमेंट, ट्रेंडिंग टॉपिक्स और राशिफल पर हिंदी में आकर्षक और जानकारीपूर्ण लेख लिख रही हैं। उनकी रचनाएं पाठकों को दैनिक जीवन की सलाह, मनोरंजन की दुनिया की झलक, वर्तमान ट्रेंड्स की गहराई और ज्योतिषीय भविष्यवाणियों से जोड़ती हैं। मोनिका जी का लेखन सरल, रोचक और प्रासंगिक होता है, जो लाखों पाठकों को प्रेरित करता है। वे विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और न्यूज़ पोर्टल्स (Haryananewspost.com) पर सक्रिय हैं, जहाँ उनकी कलम से निकले लेख हमेशा चर्चा का विषय बन जाते हैं।

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