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साल 2026 की पहली मौनी अमावस्या आज, रविवार के दुर्लभ संयोग में ऐसे करें पितरों को प्रसन्न

On: January 18, 2026 8:37 AM
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साल 2026 की पहली मौनी अमावस्या आज, रविवार के दुर्लभ संयोग में ऐसे करें पितरों को प्रसन्न
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आज 18 जनवरी को रविवार के दिन मौनी अमावस्या है। यह दिन पितरों की शांति और आत्मिक शुद्धि के लिए खास है। आज मौन रहकर दान और स्नान करना चाहिए।

आज यानी 18 जनवरी 2026 को माघ महीने की अमावस्या है। हिंदू धर्म में इसे मौनी अमावस्या या माघी अमावस्या के नाम से जाना जाता है। इस बार यह तिथि रविवार को पड़ने के कारण और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है।

शास्त्रों में माघ मास की अमावस्या को साल की सबसे बड़ी और प्रभावशाली अमावस्या माना गया है। यह दिन केवल स्नान और दान का नहीं बल्कि अपनी आत्मा को शुद्ध करने और पितरों का आशीर्वाद पाने का महापर्व है।

मौन का है गहरा वैज्ञानिक और धार्मिक महत्व

मौनी अमावस्या शब्द की उत्पत्ति ‘मुनि’ शब्द से हुई है। इसका अर्थ है मौन धारण करना। धर्म के जानकारों का मानना है कि इस दिन हमारी ऊर्जा को संरक्षित करने के लिए मौन रहना चाहिए।

आज के दिन वाणी पर नियंत्रण रखने से मानसिक तनाव कम होता है और आंतरिक शक्ति जागृत होती है। यदि पूरे दिन चुप रहना संभव न हो तो कम से कम कड़वे वचन बोलने से बचें और ज्यादा समय ईश्वर के ध्यान में बिताएं।

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रविवार और अमावस्या का अद्भुत मिलन

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार रविवार का दिन भगवान सूर्य को समर्पित है जबकि अमावस्या पितरों की तिथि है। सूर्य को पिता का कारक माना जाता है। ऐसे में आज के दिन सूर्य देव की उपासना और पितरों का तर्पण करने से कुंडली में मौजूद पितृ दोष और सूर्य दोष दोनों एक साथ शांत हो सकते हैं। यह संयोग कई सालों में एक बार बनता है जब मौनी अमावस्या रविवार के दिन आती है।

ब्रह्म मुहूर्त में स्नान का विशेष फल

आज के दिन गंगा स्नान का महत्व अश्वमेध यज्ञ के बराबर बताया गया है। अगर आप किसी पवित्र नदी पर नहीं जा सकते तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल और काले तिल मिला लें। स्नान करते समय मन ही मन ‘हर हर गंगे’ का जाप करें।

मान्यता है कि आज के दिन देवतागण भी अदृश्य रूप में संगम या पवित्र नदियों में स्नान करने आते हैं। इससे पुराने पापों का नाश होता है और शरीर निरोगी बनता है।

पितृ दोष निवारण के अचूक उपाय

अगर किसी की कुंडली में पितृ दोष है या परिवार में कलह रहती है तो आज दोपहर के समय दक्षिण दिशा की ओर मुख करके अपने पूर्वजों को जल अर्पित करें। लोटे में जल, काले तिल, थोड़ा सा गुड़ और सफेद फूल डालकर तर्पण करें।

साथ ही ‘ओम पितृभ्यो नमः’ मंत्र का जाप करें। इससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और वंश वृद्धि में आ रही बाधाएं दूर होती हैं।

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दान से भरेगा धन का भंडार

मौनी अमावस्या पर दान का फल कई गुना बढ़ जाता है। चूंकि अभी सर्दी का मौसम है इसलिए गर्म कपड़े, कंबल, ऊन या जूते चप्पल का दान सबसे उत्तम माना गया है। इसके अलावा काले तिल, गुड़, घी, अनाज और गौ सेवा के लिए धन का दान करना चाहिए। यह उपाय आर्थिक तंगी को दूर करने में बहुत कारगर साबित होता है।

रविवार है इसलिए रखें ये सावधानी

आज रविवार होने के कारण कुछ विशेष सावधानियां बरतनी जरूरी हैं।

  • तुलसी पूजन: आज के दिन तुलसी के पौधे को जल न चढ़ाएं और न ही स्पर्श करें। रविवार को तुलसी को छूना वर्जित माना गया है।

  • पीपल पूजा: रविवार को पीपल के पेड़ की पूजा करने का विधान नहीं है इसलिए आज पीपल को जल अर्पित न करें।

  • सात्विक भोजन: आज के दिन पूरी तरह सात्विक रहें। मांस मदिरा या तामसिक भोजन का सेवन भूलकर भी न करें।

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  • क्रोध पर काबू: मौन व्रत का पालन करें और घर में किसी भी तरह के वाद विवाद से बचें।

भगवान विष्णु और शिव की आराधना

आज के दिन भगवान विष्णु और भगवान शिव दोनों की पूजा फलदायी है। आप भगवान विष्णु के मंत्र ‘ओम नमो भगवते वासुदेवाय’ का जाप मानसिक रूप से कर सकते हैं। इसके अलावा शिवलिंग पर कच्चा दूध और जल चढ़ाना भी शुभ रहेगा। यह दिन मन की शांति और ग्रहों की अनुकूलता के लिए सर्वश्रेष्ठ है।

मोनिका गुप्ता

मोनिका गुप्ता एक अनुभवी लेखिका हैं, जो पिछले 10 वर्षों से लाइफस्टाइल, एंटरटेनमेंट, ट्रेंडिंग टॉपिक्स और राशिफल पर हिंदी में आकर्षक और जानकारीपूर्ण लेख लिख रही हैं। उनकी रचनाएं पाठकों को दैनिक जीवन की सलाह, मनोरंजन की दुनिया की झलक, वर्तमान ट्रेंड्स की गहराई और ज्योतिषीय भविष्यवाणियों से जोड़ती हैं। मोनिका जी का लेखन सरल, रोचक और प्रासंगिक होता है, जो लाखों पाठकों को प्रेरित करता है। वे विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और न्यूज़ पोर्टल्स (Haryananewspost.com) पर सक्रिय हैं, जहाँ उनकी कलम से निकले लेख हमेशा चर्चा का विषय बन जाते हैं।

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