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शनिवार के दिन करें ये खास उपाय, शनि की वक्र दृष्टि से मिलेगा छुटकारा, रंक भी बन जाएगा राजा

On: जनवरी 17, 2026 9:42 पूर्वाह्न
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शनिवार के दिन करें ये खास उपाय, शनि की वक्र दृष्टि से मिलेगा छुटकारा, रंक भी बन जाएगा राजा
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शनिदेव हनुमान जी और शिवजी के भक्तों को अपनी वक्र दृष्टि से दूर रखते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार हनुमान जी ने शनि का अहंकार तोड़ा था और शिवजी ने उन्हें सही मार्ग दिखाया था।

अंबाला. सनातन धर्म में शनिवार का दिन न्याय के देवता शनिदेव को समर्पित माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनिदेव कर्मफल दाता हैं जो व्यक्ति को उसके अच्छे और बुरे कर्मों के हिसाब से फल देते हैं। आम तौर पर लोग शनि का नाम सुनते ही घबरा जाते हैं।

साढ़ेसाती और ढैय्या का डर लोगों के मन में बैठा रहता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ब्रह्मांड में दो ऐसे देवता हैं जिनके भक्तों की तरफ शनिदेव आंख उठाकर भी नहीं देखते। जी हां हम बात कर रहे हैं संकटमोचन हनुमान और देवाधिदेव महादेव की। आइए जानते हैं आखिर क्यों शनिदेव इन दोनों से इतना डरते हैं और इनका सम्मान करते हैं।

शनिदेव और हनुमान जी का लंका कनेक्शन

पौराणिक कथाओं के अनुसार त्रेतायुग में जब हनुमान जी माता सीता की खोज में लंका पहुंचे तो वहां उन्होंने देखा कि रावण ने अपने अहंकार में नवग्रहों को बंदी बना रखा है। शनिदेव भी रावण के कारागार में उल्टे लटके हुए थे। हनुमान जी ने ही शनिदेव को रावण की कैद से आजाद करवाया था।

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इस उपकार से प्रसन्न होकर शनिदेव ने हनुमान जी को वचन दिया था कि वह कभी भी उनके भक्तों को नहीं सताएंगे। यही वजह है कि जब भी किसी पर शनि की महादशा चलती है तो ज्योतिषाचार्य उसे हनुमान चालीसा पढ़ने की सलाह देते हैं।

जब पूंछ में लपेटकर तोड़ा था अहंकार

एक अन्य प्रचलित कथा के अनुसार एक बार शनिदेव को अपनी शक्ति पर घमंड हो गया था। वे हनुमान जी के पास पहुंचे जो उस समय प्रभु श्रीराम के ध्यान में लीन थे। शनिदेव ने हनुमान जी को अपनी वक्र दृष्टि का भय दिखाकर डराने की कोशिश की और उनके ध्यान में बाधा डाली।

जब हनुमान जी ने उन्हें नजरअंदाज किया तो शनिदेव ने उन्हें युद्ध की चुनौती दे दी। इसके बाद बजरंगबली ने अपनी पूंछ बढ़ाकर शनिदेव को उसमें लपेट लिया। इसके बावजूद शनिदेव ने उन्हें ललकारना नहीं छोड़ा।

गुस्से में आकर हनुमान जी ने उन्हें पत्थरों पर पटकना शुरू कर दिया जिससे शनिदेव का हाल बेहाल हो गया। दर्द से कराहते हुए शनिदेव ने माफी मांगी और वचन दिया कि भविष्य में वे कभी भी राम और हनुमान के भक्तों के पास नहीं फटकेंगे।

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महादेव ने जब खोला तीसरा नेत्र

शनिदेव भगवान शिव के भी परम भक्त माने जाते हैं लेकिन एक समय ऐसा भी आया था जब शिवजी को शनिदेव को दंड देना पड़ा था। कथाओं के मुताबिक सूर्यदेव ने शनिदेव को विभिन्न लोकों का अधिपत्य दिया था लेकिन शनिदेव ने अपनी शक्ति का दुरुपयोग करते हुए दूसरे लोकों पर भी कब्जा करना शुरू कर दिया।

जब सूर्यदेव की शिकायत पर शिवजी के गण शनिदेव को समझाने गए तो उन्होंने गणों को ही हरा दिया। अंत में स्वयं महादेव को युद्ध के लिए आना पड़ा। युद्ध के दौरान जब शनिदेव ने शिवजी पर अपनी वक्र दृष्टि डाली तो महादेव ने अपना तीसरा नेत्र खोल दिया।

19 साल तक पीपल पर उल्टा लटके रहे शनि

कहा जाता है कि भगवान शिव के त्रिशूल के प्रहार से शनिदेव संज्ञाशून्य हो गए थे। दंड स्वरूप महादेव ने उन्हें 19 वर्षों तक पीपल के वृक्ष पर उल्टा लटका दिया था।

इन 19 सालों में शनिदेव ने अपनी गलती का प्रायश्चित किया और शिवजी की कठोर तपस्या की। तभी से यह माना जाता है कि जो व्यक्ति पीपल के पेड़ की पूजा करता है या भगवान शिव की आराधना करता है शनिदेव उसे कभी कष्ट नहीं देते। यही कारण है कि शनिवार को पीपल के नीचे दीपक जलाना शुभ माना जाता है।

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प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित रमेश शास्त्री के अनुसार शनिदेव न्याय प्रिय हैं। वे केवल उन्हीं को दंड देते हैं जो अधर्म के मार्ग पर चलते हैं। अगर कोई व्यक्ति हनुमान जी या शिव जी की पूजा करता है तो उसका मन शांत रहता है और वह गलत कार्यों से बचता है।

इसलिए शनिदेव स्वतः ही ऐसे लोगों पर प्रसन्न रहते हैं। शनि को क्रूर नहीं बल्कि एक सख्त शिक्षक माना जाना चाहिए जो हमें जीवन का पाठ पढ़ाते हैं।

मोनिका गुप्ता

मोनिका गुप्ता एक अनुभवी लेखिका हैं, जो पिछले 10 वर्षों से लाइफस्टाइल, एंटरटेनमेंट, ट्रेंडिंग टॉपिक्स और राशिफल पर हिंदी में आकर्षक और जानकारीपूर्ण लेख लिख रही हैं। उनकी रचनाएं पाठकों को दैनिक जीवन की सलाह, मनोरंजन की दुनिया की झलक, वर्तमान ट्रेंड्स की गहराई और ज्योतिषीय भविष्यवाणियों से जोड़ती हैं। मोनिका जी का लेखन सरल, रोचक और प्रासंगिक होता है, जो लाखों पाठकों को प्रेरित करता है। वे विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और न्यूज़ पोर्टल्स (Haryananewspost.com) पर सक्रिय हैं, जहाँ उनकी कलम से निकले लेख हमेशा चर्चा का विषय बन जाते हैं।

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