Munshi Premchand Quotes in Hindi: हिंदी साहित्य की दुनिया में अगर किसी लेखक का नाम सबसे पहले ज़हन में आता है, तो वो हैं मुंशी प्रेमचंद। एक ऐसा नाम जिसने समाज की सच्चाइयों को अपनी कलम से शब्द दिए। चाहे गरीबी हो, अन्याय हो या फिर रिश्तों की उलझन, प्रेमचंद ने हर पहलू को गहराई से छुआ।
उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने उनके समय में थे। प्रेमचंद के कोट्स न सिर्फ जीवन को बेहतर समझने में मदद करते हैं, बल्कि सोचने की दिशा भी बदलते हैं।
Munshi Premchand Quotes in Hindi
कुल की प्रतिष्ठा भी विनम्रता और सदव्यवहार से होती है, हेकड़ी और रुआब दिखाने से नहीं।
दुखियारों को हमदर्दी के आँसू भी कम प्यारे नहीं होते।
अनुराग, यौवन, रूप या धन से उत्पन्न नहीं होता। अनुराग, अनुराग से उत्पन्न होता है।
अधिकार में स्वयं एक आनंद है, जो उपयोगिता की परवाह नहीं करता।
अनाथ बच्चों का हृदय उस चित्र की भांति होता है जिस पर एक बहुत ही साधारण परदा पड़ा हुआ हो। पवन का साधारण झकोरा भी उसे हटा देता है।
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आलस्य वह राजरोग है जिसका रोगी कभी संभल नहीं पाता।
आलोचना और दूसरों की बुराइयां करने में बहुत फ़र्क़ है। आलोचना क़रीब लाती है और बुराई दूर करती है।
आशा उत्साह की जननी है। आशा में तेज है, बल है, जीवन है। आशा ही संसार की संचालक शक्ति है।
अगर मूर्ख, लोभ और मोह के पंजे में फंस जाएं तो वे क्षम्य हैं, परंतु विद्या और सभ्यता के उपासकों की स्वार्थांधता अत्यंत लज्जाजनक है।
अपमान का भय क़ानून के भय से किसी तरह कम क्रियाशील नहीं होता।
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कोई वाद जब विवाद का रूप धारण कर लेता है तो वह अपने लक्ष्य से दूर हो जाता है।
कुल की प्रतिष्ठा भी नम्रता और सद्व्यवहार से होती है, हेकड़ी और रुखाई से नहीं।
क्रांति बैठे-ठालों का खेल नहीं है। वह नई सभ्यता को जन्म देती है।
कभी-कभी हमें उन लोगों से शिक्षा मिलती है, जिन्हें हम अभिमानवश अज्ञानी समझते हैं।
क्रोध और ग्लानि से सद्भावनाएं विकृत हो जाती हैं। जैसे कोई मैली वस्तु निर्मल वस्तु को दूषित कर देती है।
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कायरता की भांति वीरता भी संक्रामक होती है।
जीवन का सुख दूसरों को सुखी करने में है, उनको लूटने में नहीं।
जवानी जोश है, बल है, साहस है, दया है, आत्मविश्वास है, गौरव है और वह सब कुछ है जो जीवन को पवित्र, उज्ज्वल और पूर्ण बना देता है।
जब दूसरों के पांवों तले अपनी गर्दन दबी हुई हो, तो उन पांवों को सहलाने में ही कुशल है।
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जो शिक्षा हमें निर्बलों को सताने के लिए तैयार करे, जो हमें धरती और धन का ग़ुलाम बनाए, जो हमें भोग-विलास में डुबाए, जो हमें दूसरों का ख़ून पीकर मोटा होने का इच्छुक बनाए, वह शिक्षा नहीं भ्रष्टता है।
संतान वह सबसे कठिन परीक्षा है जो ईश्वर ने मनुष्य को परखने के लिए गढ़ी है।
सफलता में अनंत सजीवता होती है, विफलता में असह्य अशक्ति।
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समानता की बात तो बहुत से लोग करते हैं, लेकिन जब उसका अवसर आता है तो खामोश रह जाते हैं।
स्वार्थ में मनुष्य बावला हो जाता है।
सोई हुई आत्मा को जगाने के लिए भूलें एक प्रकार की दैविक यंत्रणाएं जो हमें सदा के लिए सतर्क कर देती हैं।
मनुष्य बराबर वालों की हंसी नहीं सह सकता, क्योंकि उनकी हंसी में ईर्ष्या, व्यंग्य और जलन होती है।
मुहब्बत रूह की खुराक है। यह वह अमृत की बूंद है जो मरे हुए भावों को जिंदा कर देती है। मुहब्बत आत्मिक वरदान है। यह ज़िंदगी की सबसे पाक, सबसे ऊंची, सबसे मुबारक बरकत है।
प्रेम एक बीज है, जो एक बार जमकर फिर बड़ी मुश्किल से उखड़ता है।
प्रेम की रोटियों में अमृत रहता है, चाहे वह गेहूं की हों या बाजरे की।
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वीरात्माएं सत्कार्य में विरोध की परवाह नहीं करतीं और अंत में उस पर विजय ही पाती हैं।
विचार और व्यवहार में सामंजस्य न होना ही धूर्तता है, मक्कारी है।
वर्तमान ही सब कुछ है। भविष्य की चिंता हमें कायर बना देती है और भूत का भार हमारी कमर तोड़ देता है।
विलास सच्चे सुख की छाया मात्र है।
धन खोकर अगर हम अपनी आत्मा को पा सकें तो यह कोई महंगा सौदा नहीं।
धर्म सेवा का नाम है, लूट और कत्ल का नहीं।
मुंशी प्रेमचंद कौन थे?
मुंशी प्रेमचंद का जन्म 31 जुलाई 1880 को हुआ था। वे एक ऐसे साहित्यकार थे जिन्होंने उपन्यास, कहानी, नाटक और लेख जैसे कई विधाओं में हिंदी और उर्दू में अद्वितीय योगदान दिया। उनकी कहानियाँ जैसे ‘कफन’, ‘ईदगाह’ और ‘पूस की रात’ आज भी लोगों की जुबां पर हैं।
प्रेमचंद के विचार जो दिल को छू जाएं
मुंशी प्रेमचंद के कोट्स सिर्फ प्रेरणादायक नहीं हैं, बल्कि जीवन का असली अर्थ समझाते हैं। आइए जानें कुछ ऐसे अनमोल विचार जो आपकी सोच में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं:
1. “जो पानी में गिरकर नहीं डूबते, वही इंसान ज़िन्दगी में कामयाब होते हैं।”
यह कोट्स हमें सिखाता है कि हालात चाहे जैसे भी हों, अगर हौसला मजबूत हो तो कोई भी मुश्किल पार की जा सकती है।
2. “सच्ची सेवा वही है जो बदले में कुछ न मांगे।”
यह विचार निस्वार्थ सेवा के महत्व को दर्शाता है।
3. “प्रेम वही जो त्याग सिखाए, और घृणा वही जो अन्याय से लड़े।”
प्रेमचंद की लेखनी में प्रेम और न्याय का गहरा जुड़ाव है।
क्यों आज भी ज़रूरी हैं प्रेमचंद के विचार?
आज की तेज़ रफ्तार और व्यावसायिक दुनिया में इंसान अक्सर भावनाओं से कटता जा रहा है। ऐसे समय में प्रेमचंद जैसे साहित्यकारों के विचार इंसानियत की याद दिलाते हैं। उनकी बातें न केवल मार्गदर्शक हैं, बल्कि आत्ममंथन का जरिया भी हैं।












