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Navratri 2025: अष्टमी-नवमी की तारीख, पूजा विधि और महत्व, माता की कृपा का सुनहरा मौका!

On: September 29, 2025 6:19 AM
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Navratri 2025: अष्टमी-नवमी की तारीख, पूजा विधि और महत्व, माता की कृपा का सुनहरा मौका!
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Navratri 2025 Date of Ashtami-Navami: दिल्ली: शारदीय नवरात्रि 2025 हिंदू धर्म का एक खास और उत्साह से भरा पर्व है, जो माता दुर्गा के नौ रूपों की भक्ति को समर्पित है। यह पर्व आश्विन मास के शुक्ल पक्ष में मनाया जाता है और इस साल 22 सितंबर से शुरू होकर 2 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ खत्म होगा।

नवरात्रि के नौ दिन माता के हर स्वरूप की पूजा के लिए खास हैं, लेकिन अष्टमी और नवमी तिथियां सबसे ज्यादा शुभ मानी जाती हैं। इन दिनों माता महागौरी और सिद्धिदात्री की पूजा के साथ कन्या पूजन और हवन से माता की विशेष कृपा मिलती है।

अष्टमी और नवमी की तारीखें Navratri 2025

शारदीय नवरात्रि 2025 में अष्टमी और नवमी तिथियां हिंदू पंचांग के अनुसार उदया तिथि से तय होती हैं। इस बार नवरात्रि 10 दिनों की है, क्योंकि तृतीया तिथि दो दिन रही। इस वजह से कुछ तिथियों को लेकर थोड़ा असमंजस हो सकता है। पंचांग के मुताबिक, महाष्टमी 30 सितंबर 2025 को मंगलवार के दिन होगी।

यह तिथि 29 सितंबर 2025 को शाम 4:31 बजे शुरू होकर 30 सितंबर को शाम 6:06 बजे तक रहेगी। इस दिन माता महागौरी की पूजा होती है, जो शांति और पवित्रता की प्रतीक हैं। वहीं, महानवमी 1 अक्टूबर 2025 को बुधवार के दिन मनाई जाएगी। यह तिथि 30 सितंबर को शाम 6:06 बजे शुरू होकर 1 अक्टूबर को शाम 7:01 बजे तक रहेगी। इस दिन माता सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है, जो सिद्धियां और मोक्ष देती हैं।

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अष्टमी और नवमी का महत्व

महाष्टमी और महानवमी नवरात्रि के सबसे शक्तिशाली दिन हैं। ‘दुर्गा सप्तशती’ के अनुसार, अष्टमी पर माता महागौरी की पूजा से मन की शांति, सौभाग्य और पापों से मुक्ति मिलती है। इस दिन संधि पूजा का भी खास महत्व है, जो अष्टमी और नवमी के संधिकाल में की जाती है।

इस पूजा में माता के चंडिका स्वरूप की आराधना और हवन से नकारात्मक शक्तियां नष्ट होती हैं। वहीं, नवमी पर माता सिद्धिदात्री की पूजा से आध्यात्मिक और भौतिक सिद्धियां मिलती हैं। इस दिन की पूजा से करियर, स्वास्थ्य और धन की समस्याएं दूर होती हैं। कन्या पूजन इन दोनों तिथियों का अहम हिस्सा है, क्योंकि कन्याएं माता के नौ स्वरूपों का प्रतीक हैं।

शुभ मुहूर्त में करें पूजा

शुभ मुहूर्त में पूजा करने से माता की कृपा जल्दी मिलती है और पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है। महाष्टमी 30 सितंबर 2025 को माता महागौरी की पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 9:12 बजे से दोपहर 1:40 बजे तक रहेगा। संधि पूजा का मुहूर्त शाम 5:42 बजे से 6:30 बजे तक है।

कन्या पूजन और हवन के लिए सुबह 10:41 बजे से दोपहर 12:11 बजे तक का समय शुभ है। महानवमी 1 अक्टूबर 2025 को माता सिद्धिदात्री की पूजा का मुहूर्त सुबह 10:41 बजे से दोपहर 12:10 बजे तक रहेगा। आयुध पूजा का विजय मुहूर्त दोपहर 2:09 बजे से 2:57 बजे तक और हवन का मुहूर्त सुबह 6:14 बजे से शाम 6:07 बजे तक रहेगा।

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महाष्टमी की पूजा विधि

महाष्टमी के दिन माता महागौरी की पूजा की जाती है। सुबह स्नान कर सफेद या गुलाबी वस्त्र पहनें। पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें और लाल कपड़े पर माता की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। गंगाजल, दूध और शहद से अभिषेक करें। अक्षत, लाल चंदन, सफेद या गुलाबी फूल और लाल चुनरी चढ़ाएं।

माता को नारियल, खीर या सूजी का हलवा भोग लगाएं। घी का दीपक और धूप जलाएं। ‘दुर्गा सप्तशती’ के अष्टम अध्याय का पाठ करें और ‘ॐ देवी महागौर्यै नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करें। हवन में कपूर और आम की लकड़ी का उपयोग करें और ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे’ मंत्र से आहुति दें। कन्या पूजन और आरती के बाद प्रसाद बांटें।

महानवमी की पूजा विधि

महानवमी पर माता सिद्धिदात्री की पूजा होती है। सुबह स्नान कर लाल या पीले वस्त्र पहनें। पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें और माता की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। गंगाजल और दूध से अभिषेक करें। अक्षत, लाल फूल, कुमकुम और चुनरी चढ़ाएं। माता को तिल, सूजी का हलवा या खीर भोग लगाएं।

घी का दीपक और धूप जलाएं। ‘दुर्गा सप्तशती’ के नवम अध्याय या ‘सिद्धिदात्री कवच’ का पाठ करें। ‘ॐ देवी सिद्धिदात्यै नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करें। हवन में ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं सिद्धिदात्यै नमः’ मंत्र से आहुति दें। कन्या पूजन और आरती के बाद प्रसाद बांटें।

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कन्या पूजन की विधि

कन्या पूजन अष्टमी और नवमी का खास हिस्सा है। 2 से 10 साल की 9 कन्याओं और एक बटुक भैरव को आमंत्रित करें। उनके पैर गंगाजल से धोएं, माथे पर कुमकुम और अक्षत लगाएं और लाल चुनरी ओढ़ाएं। उन्हें स्वच्छ आसन पर बिठाकर पूरी, काला चना, सूजी का हलवा या खीर परोसें।

भोजन को पहले माता को भोग लगाएं। भोजन के बाद कन्याओं को दक्षिणा, नए वस्त्र या श्रृंगार सामग्री दें। प्लास्टिक या चमड़े की चीजें देने से बचें। कन्याओं का सम्मान कर प्रेम से विदा करें।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी ज्योतिष शास्त्रों पर आधारित है और केवल सूचना के लिए है। हम इसकी पुष्टि नहीं करते।

मोनिका गुप्ता

मोनिका गुप्ता एक अनुभवी लेखिका हैं, जो पिछले 10 वर्षों से लाइफस्टाइल, एंटरटेनमेंट, ट्रेंडिंग टॉपिक्स और राशिफल पर हिंदी में आकर्षक और जानकारीपूर्ण लेख लिख रही हैं। उनकी रचनाएं पाठकों को दैनिक जीवन की सलाह, मनोरंजन की दुनिया की झलक, वर्तमान ट्रेंड्स की गहराई और ज्योतिषीय भविष्यवाणियों से जोड़ती हैं। मोनिका जी का लेखन सरल, रोचक और प्रासंगिक होता है, जो लाखों पाठकों को प्रेरित करता है। वे विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और न्यूज़ पोर्टल्स (Haryananewspost.com) पर सक्रिय हैं, जहाँ उनकी कलम से निकले लेख हमेशा चर्चा का विषय बन जाते हैं।

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