नवरात्रि के नौ दिनों में श्रद्धा और भक्ति के साथ व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए सेहत का ध्यान रखना एक बड़ी चुनौती बन जाता है। अक्सर देखा गया है कि व्रत शुरू होते ही लोगों को कब्ज, गैस और खट्टी डकारों की शिकायत होने लगती है। इसका सबसे बड़ा कारण हमारी रोजमर्रा की रोटी-सब्जी को छोड़कर अचानक कुट्टू, सिंघाड़ा और साबूदाना जैसे भारी खाद्य पदार्थों पर शिफ्ट होना है। शरीर को इस नए डाइट पैटर्न में ढलने का समय नहीं मिलता, जिससे पाचन क्रिया सुस्त पड़ जाती है।
फाइबर की कमी और तली-भुनी चीजों का वार
व्रत के दौरान हम अक्सर साबूदाना वड़ा या कुट्टू की पूड़ी जैसे अधिक तेल वाले व्यंजनों का चुनाव करते हैं। ये चीजें स्वाद में तो अच्छी लगती हैं, लेकिन इनमें फाइबर की मात्रा न के बराबर होती है। फाइबर कम होने से पेट साफ होने में दिक्कत आती है और कब्ज की समस्या जड़ पकड़ लेती है। उत्तर प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर जैसे क्षेत्रों में व्रत के दौरान आलू और घी का अत्यधिक प्रयोग भी एसिडिटी और पेट में जलन को बढ़ावा देता है।
डिहाइड्रेशन और एसिड का खतरनाक मेल
अक्सर लोग व्रत के काम-काज में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि पानी पीना ही भूल जाते हैं। कम पानी पीने से शरीर के टॉक्सिन्स बाहर नहीं निकल पाते, जिससे डाइजेशन धीमा हो जाता है। इसके अलावा, कई लोग घंटों तक कुछ नहीं खाते, जिससे पेट में एसिड का स्तर बढ़ जाता है। यह बढ़ा हुआ एसिड न केवल गैस बनाता है बल्कि पेट दर्द और सिरदर्द का कारण भी बनता है।
कैसे रखें व्रत में पेट को फिट?
अगर आप नवरात्रि का व्रत बिना किसी परेशानी के पूरा करना चाहते हैं, तो अपनी डाइट में तरल पदार्थों की मात्रा बढ़ाएं। सादे पानी के साथ नारियल पानी, नींबू पानी और छाछ का सेवन रामबाण साबित होता है। भारी पूड़ियों की जगह भुना हुआ मखाना या उबले हुए आलू का सेवन करें। दिनभर थोड़ा-थोड़ा खाते रहें ताकि एसिड न बने और फल व दही को अपनी थाली का अनिवार्य हिस्सा बनाएं। सुबह उठकर एक गिलास गुनगुना पानी पीना और शाम को हल्की सैर करना आपके पेट को हल्का रखेगा।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह न समझें। किसी भी फिटनेस प्रोग्राम को शुरू करने से पहले डॉक्टर से परामर्श करें। डाइट में बदलाव करने से पहले भी अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।











