Navratri Maa Shayari Hindi Poetry: दिल्ली: नवरात्रि का पावन पर्व दस्तक दे चुका है। सोमवार 22 सितंबर से शारदीय नवरात्रि का शुभारंभ हो जाएगा। यह नवरात्रि का मौका मां दुर्गा की आराधना का होता है। इस पर्व में मां शक्ति के नौ स्वरूपों की पूरे विधि-विधान से पूजा अर्चना की जाती है।
मां की महिमा के गीत गाए जाते हैं। कन्याओं को पूजा जाता है। बात जब भी मां की होती है तो इस धरती पर देवी का दूसरा रूप हमारी मां ही होती है। इस इंसान रूपी मां की महिमा पर बहुत कुछ लिखा और कहा गया है। आइए यहां पढ़ते हैं धरती पर देवी के
दूसरे रूप मां पर लिखे चंद खूबसूरत शेर: Navratri Maa Shayari
मां की अनमोल महिमा: दिल को छू लेंगी ये शायरी
मांगने पर जहां पूरी हर मन्नत होती है,
मां के पैरों में ही तो वो जन्नत होती है
एक दुनिया है जो समझाने से भी नहीं समझती,
एक मां थी बिन बोले सब समझ जाती थी
गम हो, दुःख हो या खुशियां
मां जीवन के हर किस्से में साथ देती है,
खुद सो जाती है भूखी
पर और बच्चों में रोटी अपने हिस्से की बांट देती है
कल अपने-आप को देखा था मां की आंखों में
ये आईना हमें बूढ़ा नहीं बताता है
-मुनव्वर राना
एक मुद्दत से मेरी मां नहीं सोई ‘ताबिश’
मैंने इक बार कहा था मुझे डर लगता है
-अब्बास ताबिश
वो लम्हा जब मेरे बच्चे ने मां पुकारा मुझे
मैं एक शाख़ से कितना घना दरख़्त हुई
-हुमैरा रहमान
मुझे मालूम है मां की दुआएं साथ चलती हैं,
सफ़र की मुश्किलों को हाथ मलते मैंने देखा है
-आलोक श्रीवास्तव
चलती फिरती हुई आंखों से अज़ां देखी है
मैंने जन्नत तो नहीं देखी है मां देखी है
-मुनव्वर राना
किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकां आई
मैं घर में सब से छोटा था मेरे हिस्से में मां आई
-मुनव्वर राना
मैं रोया परदेस में भीगा माँ का प्यार
दुख ने दुख से बातें की बिन चिट्ठी बिन तार
-निदा फ़ाज़ली
स्याही खत्म हो गयी “मां” लिखते-लिखते
उसके प्यार की दास्तान इतनी लंबी थी
न जाने क्यों आज अपना ही घर मुझे अनजान सा लगता है,
तेरे जाने के बाद ये घर-घर नहीं खली मकान सा लगता है
घर में झीने रिश्ते मैंने लाखों बार उधड़ते देखे,
चुपके चुपके कर देती है जाने कब तुरपाई अम्मा
-आलोक श्रीवास्तव
इस तरह मेरे गुनाहों को वो धो देती है
मां बहुत ग़ुस्से में होती है तो रो देती है
-मुनव्वर राना
मेरी ख़्वाहिश है कि मैं फिर से फ़रिश्ता हो जाऊं
मां से इस तरह लिपट जाऊं कि बच्चा हो जाऊं
-मुनव्वर राना
मुर्ग़े की आवाज़ से खुलती घर की कुंडी जैसी मां
बेसन की सोंधी रोटी पर खट्टी चटनी जैसी मां
-निदा फाजली
हालात बुरे थे मगर अमीर बनाकर रखती थी,
हम गरीब थे, ये बस हमारी माँ जानती थी…
-मुनव्वर राना
भारी बोझ पहाड़ सा कुछ हल्का हो जाए
जब मेरी चिंता बढ़े मां सपने में आए
-अख़्तर नज़्मी
नवरात्रि में देवी मां की आराधाना के साथ ही जन्म देने वाली अपनी मां को भी बताएं कि आप उनसे कितना प्यार करते हैं। आपको अपने जज्बात बताने में ये शेर काम आएंगे।












