Poem on Friendship in Hindi: दोस्ती… एक ऐसा रिश्ता जो खून का न होकर भी सबसे करीब होता है। ये वो साथी होते हैं जो हमारे हर सुख-दुख के गवाह बनते हैं, बिना शर्त साथ निभाते हैं और ज़िंदगी को हँसी और यादों से भर देते हैं।
ऐसे ही खास रिश्ते को समर्पित हैं ये खूबसूरत हिंदी कविताएं, जो दोस्ती की गहराई को शब्दों में पिरोती हैं।
Poem on Friendship in Hindi
क्योंकि दोस्ती सिर्फ रिश्ता नहीं, एक एहसास है। इसमें न कोई स्वार्थ होता है और न दिखावा। एक सच्चा दोस्त वही होता है जो आपकी खामोशी को भी समझे और बिना कहे साथ खड़ा रहे।
इसी भाव को बयां करने के लिए कई शायरों और कवियों ने अपनी कलम उठाई और दोस्ती को अमर बना देने वाली कविताएं रच डालीं।
पढ़िए ये दिल छू लेने वाली दोस्ती की कविताएं
1. सच्ची दोस्ती का असर
सच्चे रिश्ते जब दिल से बनते हैं,
तो दूरियां कोई मायने नहीं रखतीं।
हर मोड़ पर साथ चलने वाले दोस्त,
जिंदगी को जश्न बना देते हैं।
2. मित्र वही जो वक्त पर काम आए
वक्त बदले, हालात बदलें,
पर जो साथ न छोड़े, वही सच्चा दोस्त कहलाए।
बिना कहे जो समझ जाए बात,
ऐसी दोस्ती पर हर दिल लुट जाए।
3. बचपन की दोस्ती
वो स्कूल की छुट्टी, वो टिफिन की लड़ाई,
वो साथ बैठकर खाई गई मिठाई।
ना कोई झूठ, ना कोई छलावा,
बस बचपन की दोस्ती थी सच्चा रिश्ता प्यारा।
4. दोस्ती एक मुस्कान जैसी
दोस्ती वो मुस्कान है, जो ग़म में भी साथ देती है,
वो रोशनी है जो अंधेरे में भी राह दिखा देती है।
हर मोड़ पर जो थामे हाथ,
ऐसी दोस्ती ही तो बनाती है जीवन को खास।
5. कभी ना टूटे ये डोर
जैसे धागा बांधता है कलाई पर रक्षा का वचन,
वैसे ही दोस्ती बंधती है विश्वास के धागे में।
ना टूटे कभी ये प्यारा बंधन,
दोस्ती बनी रहे यूं ही हर जन्म।
6. दोस्त: विष्णु खरे
एक नौजवान पुलिस सब-इंस्पैक्टर से दोस्ती करो।
तुम देखोगे कि यह कठिन नहीं है—अपने सिद्धांतों की रक्षा करते हुए भी
यह संभव है। तुम पाओगे कि तुम्हारी ही तरह
वह गेहुँआ और छरहरा है, उसे टोपी लगाना और वर्दी पहनना
पसंद नहीं है
और वह हॉस्टलों, पिकनिकों और बचपन के क़िस्से सुनाता है—
तुम्हें इसका भी पता चलेगा कि उसने सर्किल इंस्पैक्टर से कहकर
अपनी ड्यूटी वहाँ लगा ली है जहाँ लड़कियों के कॉलिज हैं
और हरचंद कोशिश करता है कि बुश्शर्ट पहनकर वहाँ जाए
और रोज़ संयोगवश बीच रास्ते में उसी स्पैशल को रुकवाकर बैठे
जिसमें नौजवान गर्म शरीर सुबह पढ़ने पहुँचते हैं। उससे हाथ मिलाने पर
तुम्हें उसकी क़रीब-क़रीब लड़कीनुमा कोमलता पर आश्चर्य होगा।
ज़िला सरहद पर
तैनात किए जाने से पहले एकाध बियर के बाद
जब वह अपनी किशोर आवाज़ में
दो आरजू में कट गए तो इंतज़ार में नुमा कोई चीज़ पढ़ेगा
तो तुम कहोगे—कुछ भी कहो, तुम इस लाइन में ग़लत फँस गए हो।
लेकिन दो तीन-बरस बाद तुम अचानक पहचानोगे
कि सड़क जहाँ पर रस्से लगाकर बंद कर दी गई है
और लोग साइकिलों पर से उतरकर जल्दी-जल्दी जा रहे हैं
और तमाशबीनों की क़िस्तों को बार-बार तितर-बितर किया जा रहा है
पास एक की दूकान से बैंच उठवा कर वह वर्दी में बैठा हुआ है
टेबिल पर टोपी और पैर रखकर।
तुम कहोगे कि उसकी हैल्थ शानदार हो गई है
जबकि ऊपर उठ आए गलों के ऊपर स्याह हलक़े पड़ गए हैं
और पेट और पुट्ठों के अप्रत्याशित उभारों पर कसी हुई पोशाक में
वह यत्नपूर्वक साँस ले रहा है। उसकी बग़लें
कलफ़ और पसीने से चिपचिपा रही हैं
और माचिस की सींक से दाँत कुरेदते हुए वह
उसे बार-बार नाक की तरफ़ ले जा रहा है। सियासत
और बड़े लोगों की रंगीन रातों की कुछ अत्यंत
गोपनीय बातें बताते हुए वह उस समय एकाएक चुप हो जाता है
जब सड़क के उस ओर दूर पर भीड़नुमा
कुछ नज़र आता है
और मेहनत के साथ वह उठते हुए कहता है
अच्छा, अब तुम बढ़ लो, ये आ रहे हैं।
शाम रात में बदल रही होती है जब तुम मुड़कर देखते हो
कि वह तुम्हें बिल्कुल भूल चुका है
पेट से निकली हुई गैस या दाँत से निकले हुए रेशे की तरह
और कुछ कह रहा है
पिछले हफ़्ते धुली हुई वर्दियों में तैनात एक से चेहरे वाले अपने मातहतों से
जिनके हाथों में बाँस के हथियार कभी-कभी काँपते हैं
उस एरियल की तरह
जो दाईं और कुछ दूर उस पेड़ के नीचे अदृश्य होने की कोशिश करती हुई
नीली मोटर पर हिलता है।
7. सहेलियां: देवयानी भारद्वाज
अब भी एक-दूसरी के जीवन में
बनी हुई है उनकी ज़रूरत
बीते समय के पन्नों को पलटते हुए कभी
झाँक जाता है जब
किशोरपने का वह जाना-पहचाना चेहरा
मुस्कान की एक रेखा
देर तक पसरी रहती है होंठों पर
अनेक बार
मन ही मन
अनेक लंबे पत्र लिखे उन्होंने
इच्छाओं की उड़ानों में
कई बार हो आती हैं एक-दूसरी के घर
खो जाती हैं
एक-दूसरी के काल्पनिक सुखों के संसार में
सचमुच के मिलने से बचती हैं
एक-दूसरी के सुख के भ्रम में रहना
कहीं थोड़ी-सी उम्मीद को बचा लेना भी तो है।












