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Sawan Bhojpuri Songs: सावन भोजपुरी गीत, बारिश की फुहारों में डूबे ये 5 अनमोल लोकगीत

On: July 11, 2025 11:52 AM
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Sawan Bhojpuri Songs: सावन भोजपुरी गीत, बारिश की फुहारों में डूबे ये 5 अनमोल लोकगीत
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Sawan Bhojpuri Songs These 5 priceless folk songs drenched in the rain showers sawan bhojpuri geet bhojpuri lokgeet sawan: सावन भोजपुरी गीत हर बारिश की बूंद के साथ दिल को छू जाते हैं। सावन का महीना आते ही जैसे पूरी प्रकृति गुनगुनाने लगती है। हरियाली, झूलों की मस्ती, और मंदिरों में भोलेनाथ की भक्ति का रंग चारों ओर बिखर जाता है। और इस माहौल को और खास बनाते हैं भोजपुरी के वो लोकगीत, जो पीढ़ियों से हमारी जुबान पर चढ़े हैं।

पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के गांवों की गलियों में सावन के ये गीत हर दिल को झकझोर देते हैं। आइए, इस सावन के मौसम में हम आपको ले चलें उन 5 भोजपुरी लोकगीतों की दुनिया में, जो इस महीने की रौनक को दोगुना कर देते हैं।

Sawan Geet in Bhojpuri

आयो सावन को महीना सखी डालो री झूला

आयो सावन को महीना सखी डालो री झूला
सावन की देखो बहार बहार राधा प्यारी-2
बादल भी गरजे बिजली भी चमके,
आती है नन्हीं फुहार, फुहार राधा प्यारी,
सावन की देखो….
बेला चमेली निबोरी भी फूली,
फुले हैं नींबू अनार, अनार राधा प्यारी,
सावन की देखो…..
मोर पपीहा कोयल भी बोले
झींगुर की झीनी पुकार, पुकार राधा प्यारी
सावन की देखो…..
झूला झूले श्याम मन मन में फूले,

सावन का रंग, भोजपुरी की संग

सावन का महीना सिर्फ बारिश और हरियाली का नहीं, बल्कि भावनाओं का भी मेला है। भोजपुरी लोकगीतों में सावन का जिक्र कुछ इस अंदाज में होता है कि सुनने वाला खुद को झूले पर झूलता या भोले बाबा की भक्ति में डूबा पाता है।

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इन गीतों में प्रेम, विरह, और प्रकृति का अनोखा संगम देखने को मिलता है। जैसे ही बादल गरजते हैं, गांव की औरतें और बच्चे सावन भोजपुरी गीत गुनगुनाने लगते हैं। ये गीत सिर्फ गाने नहीं, बल्कि एक पूरी संस्कृति को जिंदा रखते हैं।

Sawan bhojpuri geet

सावन का महीना

सावन का महीना, झुलावे चित चोर, धीरे झूलो राधे पवन करे शोर,
मनवा घबराये मोरा बहे पूरवैया, झूला डाला है नीचे कदम्ब की छैयां…
कारी अंधियारी घटा है घनघोर, धीरे झूलो राधे पवन करे शोर,
सखियां करे क्या जाने हमको इशारा, मन्द मन्द बहे जल यमुना की धारा…
श्री राधेजी के आगे चले ना कोई जोर, धीरे झूलो राधे, पवन करे शोर,
मेघवा तो गरजे देखो बोले कोयल कारी, पाछवा में पायल बाजे नाचे बृज की नारी…
श्री राधे परती वारो हिमरवाकी और, धीरे झूलो राधे पवन करे शोर,
सावन का महीना झूलावे चित चोर…

अनमोल भोजपुरी लोकगीत

इस सावन, हम आपके लिए लाए हैं 5 ऐसे भोजपुरी लोकगीत, जो हर बारिश के साथ और रंगीन हो उठते हैं। इनमें से कुछ गीत प्रेम की मिठास लिए हैं, तो कुछ भक्ति की गहराई। हर गीत के बोल इतने सरल और मधुर हैं कि ये सीधे दिल में उतर जाते हैं।

चाहे आप शहर में हों या गांव में, इन गीतों को सुनकर सावन का मजा दोगुना हो जाता है। इनके लिरिक्स हिंदी में उपलब्ध हैं, ताकि हर कोई इस मिठास को समझ सके।

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Bhojpuri lokgeet sawan

सावन झड़ी लागे, हो धीरे-धीरे

सावन झड़ी लागे, हो धीरे-धीरे -२
कि मोरो पिया हो, कहमाँ से आये बदरिया -२
कहमाँ झड़ी लागे हो धीरे-धीरे -२
सावन झड़ी लागे, हो धीरे-धीरे -२
कि मोरो धानि हो, पूरब से आईल बदरिया -२
पश्चिम झड़ी लागे हो धीरे-धीरे -२
सावन झड़ी लागे, हो धीरे-धीरे -२
कि मोरो पिया हो, खोल न बज्र केमरिया -२
चुनर मोरा भींजे हो धीरे-धीरे -२

क्यों खास हैं सावन के भोजपुरी गीत?

भोजपुरी लोकगीतों का जादू उनकी सादगी और गहराई में छिपा है। ये गीत सिर्फ मनोरंजन नहीं करते, बल्कि हमारी जड़ों से जोड़ते हैं। सावन के गीतों में बारिश की ठंडक, प्रेम की गर्मी, और भक्ति का सुकून एक साथ मिलता है।

Sawan songs in bhojpuri

कच्ची नीम की निवौरी सावन जल्दी अइयो रे

कच्ची नीम की निवौरी सावन जल्दी अइयो रे।
बाबा दूर मति ब्यहियो दादी नहीं बुलायेगी।
कच्ची नीम की निबौरी …
बाबुल दूर मति ब्यहियो अम्मा नहीं बुलायेगी।
कच्ची नीम की निबौरी …
भइया दूर मति ब्यहियो भाभी नहीं बुलायेगी।
कच्ची नीम की निबौरी …
चाचा दूर मति ब्यहियो चाची नहीं बुलायेगी।
कच्ची नीम की निबौरी …
मामा दूर मति ब्यहियो मामी नहीं बुलायेगी।
कच्ची नीम की निबौरी …

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ये गीत गांव की उस औरत की कहानी कहते हैं, जो अपने साजन के लिए झूला झूलती है, या उस भक्त की, जो भोलेनाथ की भक्ति में लीन है। इन गीतों को सुनकर आपको अपने बचपन की गलियां और सावन की मस्ती याद आ जाएगी।

Sawan bhojpuri songs

हो कैसे खेलन जइहो सावन में कजरिया

हो कैसे खेलन जइहो सावन में कजरिया, बदरिया घिर आई ननदी।
तू तो जात है अकेली, कोई संग न सहेली,
हो छैला (कान्हा) रोक लिहैं तोहरी डगरिया, बदरिया घिर आई ननदी।
बिजली चम-2 चम-2 चमके, मेघा रिमझिम-2 बरसे,
हो काली नागिन जैसी रात अँधियारी, बदरिया घिर आई ननदी।
बादल गरज रहा घनघोर, घर में सैंया नाहीं मोर,
मैं तो ताकत रहिली पिय की डगरिया, बदरिया घिर आई ननदी।
कितने आशिक घायल होइहैं, कितने डामल फांसी पइहैं,
कितने पीसत होइहैं जेल में चकरिया, बदरिया घेरे आई ननदी।
हो कैसे खेलन जइहो सावन में कजरिया, बदरिया घिर आई ननदी।

मोनिका गुप्ता

मोनिका गुप्ता एक अनुभवी लेखिका हैं, जो पिछले 10 वर्षों से लाइफस्टाइल, एंटरटेनमेंट, ट्रेंडिंग टॉपिक्स और राशिफल पर हिंदी में आकर्षक और जानकारीपूर्ण लेख लिख रही हैं। उनकी रचनाएं पाठकों को दैनिक जीवन की सलाह, मनोरंजन की दुनिया की झलक, वर्तमान ट्रेंड्स की गहराई और ज्योतिषीय भविष्यवाणियों से जोड़ती हैं। मोनिका जी का लेखन सरल, रोचक और प्रासंगिक होता है, जो लाखों पाठकों को प्रेरित करता है। वे विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और न्यूज़ पोर्टल्स (Haryananewspost.com) पर सक्रिय हैं, जहाँ उनकी कलम से निकले लेख हमेशा चर्चा का विषय बन जाते हैं।

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