ब्रेकिंग न्यूज़मौसमक्रिकेटऑटोमनोरंजनअपराधट्रेंडिंगकृषिलाइफस्टाइलराशिफलहरियाणा

Shitala Satam Vrat Katha: शीतला सातम व्रत कथा इस कहानी को पढ़े बिना अधूरा है आपका व्रत, जानिए माता की महिमा!

On: अगस्त 15, 2025 9:55 पूर्वाह्न
Follow Us:
Shitala Satam Vrat Katha: शीतला सातम व्रत कथा इस कहानी को पढ़े बिना अधूरा है आपका व्रत, जानिए माता की महिमा!
Join WhatsApp Group

Shitala Satam Vrat Katha story in Hindi (नई दिल्ली) : शीतला सातम का पवित्र पर्व भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है। यह त्योहार आमतौर पर रक्षाबंधन के बाद और श्रावण पूर्णिमा के बाद आने वाली सप्तमी को पड़ता है। इस दिन लोग एक दिन पहले बना हुआ बासी खाना (बैसाणु) खाते हैं, क्योंकि इस व्रत में आग का उपयोग करना वर्जित माना जाता है। कई जगहों पर नीम के पत्तों से शीतला माता की पूजा की जाती है। महिलाएं इस दिन व्रत रखती हैं और अपने परिवार की सुख-शांति और अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना करती हैं। शीतला सातम का व्रत बिना कथा सुने अधूरा माना जाता है। आइए जानते हैं शीतला सातम की पौराणिक और प्रेरणादायक कथा।

Shitala Satam Vrat Katha: शीतला सातम की व्रत कथा

कहानी बहुत पुराने समय की है। एक गाँव में एक बूढ़ी सास और उसकी दो बहुओं ने शीतला माता का व्रत रखा था। लेकिन दोनों बहुओं ने सुबह उठकर ताजा खाना बना लिया, जो इस व्रत की परंपरा के खिलाफ था। इस व्रत में बासी भोजन खाने और माता को चढ़ाने की प्रथा है। जब सास को इस बात का पता चला, तो वह बहुत नाराज हुईं।

दिवाली पर तिजोरी में रखें हल्दी की यह पोटली, साल भर बनी रहेगी धन की बरकत | diwali-puja-haldi-totka-tijori-wealth-remedy
दिवाली पर तिजोरी में रखें हल्दी की यह पोटली, साल भर बनी रहेगी धन की बरकत

कुछ समय बाद दोनों बहुओं के बच्चों की अचानक मृत्यु हो गई। यह देख सास का गुस्सा और बढ़ गया और उन्होंने दोनों बहुओं को घर से निकाल दिया। सास ने कहा, “जब तक तुम्हारे बच्चे जीवित नहीं हो जाते, तब तक तुम घर नहीं लौट सकतीं।” दोनों बहुएं अपने बच्चों के शव लेकर घर से निकल पड़ीं।

रास्ते में विश्राम के लिए रुकने पर दोनों बहुओं की मुलाकात शीतला और ओरी नाम की दो बहनों से हुई। ये दोनों अपने सिर में जूँ की समस्या से परेशान थीं। बहुओं को उनकी हालत पर दया आई और उन्होंने शीतला और ओरी के सिर को साफ किया, जिससे उन्हें बहुत राहत मिली। इस मदद के बदले शीतला और ओरी ने बहुओं को आशीर्वाद दिया कि “तुम्हारी गोद हरी हो जाए।”

अहोई अष्टमी 1 नवंबर को: पूजा के लिए मिलेगा सिर्फ 1 घंटा 18 मिनट, नोट करें शुभ समय | ahoi-ashtami-2026-date-puja-muhurat-vidhi-timings
अहोई अष्टमी 1 नवंबर को: पूजा के लिए मिलेगा सिर्फ 1 घंटा 18 मिनट, नोट करें शुभ समय

यह सुनकर बहुएं अपने बच्चों के शव को देखकर रोने लगीं। तब शीतला माता ने उन्हें बताया कि ताजा खाना बनाने की उनकी गलती की वजह से यह दुख भोगना पड़ा। दोनों बहुओं ने अपनी गलती स्वीकारी और माता से माफी मांगी। उन्होंने वचन दिया कि वे भविष्य में कभी ऐसी गलती नहीं करेंगी। माता शीतला प्रसन्न हुईं और उन्होंने दोनों बच्चों को जीवित कर दिया। इसके बाद पूरे गाँव में शीतला सातम का व्रत और उत्सव धूमधाम से मनाया जाने लगा।

करवा चौथ की पूजा में कलश के अंदर क्या रखा जाता है? नोट कर लें ये जरूरी बातें | karwa-chauth-kalash-samagri-rules-karwa-vs-lota-difference
करवा चौथ की पूजा में कलश के अंदर क्या रखा जाता है? नोट कर लें ये जरूरी बातें

अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment