Varaha Jayanti 2025: Lord Vishnu’s boar incarnation! Know the date, auspicious time and method of worship: नई दिल्ली: भगवान विष्णु के तीसरे अवतार, वराह जयंती का पर्व हर साल बड़े उत्साह से मनाया जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार, जब दैत्यराज हिरण्याक्ष ने पृथ्वी को समुद्र में डुबो दिया था, तब भगवान विष्णु ने वराह (सूअर) रूप में अवतार लिया और पृथ्वी को बचाया। यह पर्व धर्म की रक्षा और बुराई के नाश का प्रतीक है।
साल 2025 में वराह जयंती कब है और इसकी पूजा कैसे करें? आइए जानते हैं तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और कथा की पूरी जानकारी।
वराह जयंती 2025 की तिथि
वराह जयंती 2025 में 25 अगस्त, सोमवार को मनाई जाएगी। भाद्रपद शुक्ल तृतीया तिथि 25 अगस्त को दोपहर 12:35 बजे शुरू होगी और 26 अगस्त को दोपहर 1:54 बजे खत्म होगी। पूजा का सबसे शुभ समय 25 अगस्त को दोपहर 1:40 बजे से शाम 4:15 बजे तक रहेगा।
पूजा की विधि
वराह जयंती के दिन सुबह स्नान कर स्वच्छ हो जाएं। भगवान वराह की मूर्ति को गंगाजल से स्नान कराएं। इसके बाद धूप-दीप जलाकर आरती करें और भोग चढ़ाएं। हिरण्याक्ष वध की कथा का पाठ जरूर करें। ब्राह्मणों को भोजन कराएं और दक्षिणा दें। साथ ही, वराह स्तोत्र और कवच का पाठ करने से विशेष फल मिलता है।
वराह जयंती की पौराणिक कथा
पौराणिक कथा के अनुसार, दैत्यराज हिरण्याक्ष ने अपनी मायावी शक्तियों से पृथ्वी देवी को समुद्र में छिपा दिया था। इससे ब्रह्मांड का संतुलन बिगड़ गया और देवता असहाय हो गए। तब भगवान विष्णु ने विशालकाय शूकर (वराह) का रूप लिया।
उन्होंने समुद्र में उतरकर पहले हिरण्याक्ष का वध किया और फिर अपने दांतों पर पृथ्वी को उठाकर उसे वापस उसकी जगह स्थापित किया। इस तरह भगवान वराह ने धर्म और मानवता की रक्षा की।













