दैनिक जीवन में हम दवाइयों का इस्तेमाल तो करते हैं, लेकिन अक्सर उन्हें घर में कहीं भी रख देते हैं। वास्तु के विशेषज्ञ मानते हैं कि दवाइयों का स्थान स्वास्थ्य सुधार की प्रक्रिया पर सीधा प्रभाव डाल सकता है। इसलिए घर में दवाइयां किस दिशा में रखी जाएं और किन जगहों से बचा जाए, यह समझना जरूरी है।
वास्तु शोधकर्ताओं का कहना है कि दवाइयों का गलत दिशा में रखा जाना कई बार बीमारी को लंबा खींच सकता है, जबकि उचित स्थान पर रखने से रोगी का मनोबल और स्वास्थ्य दोनों तेजी से सुधारते हैं।
घर में दवाइयां कहां न रखें
दक्षिण पूर्व दिशा से बचें
वास्तु के अनुसार अग्नि तत्व की दिशा मानी जाने वाली दक्षिण पूर्व दिशा दवाइयां रखने के लिए अशुभ मानी जाती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह दिशा मानसिक अस्थिरता और चिंता बढ़ा सकती है। इससे रोगी को ठीक होने में अपेक्षित लाभ नहीं मिलता।
पश्चिम दिशा भी ठीक नहीं
पश्चिम दिशा को वास्तु में स्थिरता और धीमी प्रगति से जोड़ा गया है। दवाइयों को यहां रखने से बीमारी का समय बढ़ सकता है या उपचार का प्रभाव धीमा पड़ सकता है।
दवाइयों के लिए कौन सी दिशा शुभ है
उत्तर पूर्व दिशा सबसे बेहतर
वास्तु शास्त्र उत्तर पूर्व दिशा को पवित्र और सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र मानता है।
इस दिशा में दवाइयां रखने से:
रोगी में सकारात्मकता बढ़ती है
उपचार का प्रभाव बेहतर होता है
मानसिक और शारीरिक दोनों स्तरों पर सुधार महसूस होता है
कई वास्तु विशेषज्ञ इस दिशा को दवाइयों के लिए सबसे लाभदायक स्थान बताते हैं।
ईशान कोण भी शुभ माना गया
उत्तर और पूर्व का जो मिलन बिंदु है उसे ईशान कोण कहा जाता है।
यह स्थान मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।
दवाइयां यहां रखने से रोगी का मनोबल बढ़ता है और स्वास्थ्य सुधार तेज हो सकता है।
क्या सिरहाने दवाइयां रखना सही है
बिस्तर के पास दवाइयां रखने से बचें
आधुनिक मनोविज्ञान भी मानता है कि जिस चीज़ की हम लगातार उपस्थिति महसूस करते हैं, उसका असर हमारी मानसिक स्थिति पर पड़ता है।
ठीक यही बात वास्तु भी कहता है।
सिरहाने दवाइयां रखने से:
रोगी बार बार बीमार होने का एहसास करता है
मन में बीमारी का डर बना रहता है
शरीर लगातार नकारात्मक ऊर्जा ग्रहण करता है
एक रोग ठीक होने के बाद दूसरा रोग उभर सकता है
इसलिए दवाइयां हमेशा बेडरूम से बाहर किसी बंद अलमारी या कवर वाले बॉक्स में रखने की सलाह दी जाती है।
यह सुझाव क्यों महत्वपूर्ण हैं
कई वास्तु विशेषज्ञों और स्वास्थ्य मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि घर का वातावरण रोगी के स्वास्थ्य पर 30 से 40 प्रतिशत तक प्रभाव डाल सकता है।
अच्छा माहौल, सकारात्मक दिशा और व्यवस्थित चीजें शरीर की स्वाभाविक हीलिंग क्षमता को मजबूत करती हैं।













