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Yogini Ekadashi 2025: योगिनी एकादशी पर लक्ष्मी चालीसा पाठ से बरसेगी मां की कृपा!

On: June 19, 2025 9:04 PM
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Yogini Ekadashi 2025: योगिनी एकादशी पर लक्ष्मी चालीसा पाठ से बरसेगी मां की कृपा!
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Laxmi Chalisa on Yogini Ekadashi 2025: योगिनी एकादशी 2025 (Yogini Ekadashi 2025) का नाम सुनते ही मन में भक्ति की लहर और मां लक्ष्मी के आशीर्वाद की आस जाग उठती है। 21 जून को पड़ने वाली ये पवित्र तिथि आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी है, जो पापों का नाश और सुख-समृद्धि का वरदान देती है। कहते हैं, इस दिन का व्रत 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने जितना पुण्य देता है। और अगर आप मां लक्ष्मी को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो योगिनी एकादशी पर लक्ष्मी चालीसा (Lakshmi Chalisa) का पाठ ज़रूर करें। आइए, जानते हैं इस व्रत का महत्व और चालीसा की महिमा, जो आपके घर में धन-धान्य की बरसात कर सकती है!

Yogini Ekadashi 2025:  योगिनी एकादशी कब और क्यों मनाई जाती है?

योगिनी एकादशी हर साल आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है। 2025 में ये पवित्र दिन 21 जून, शनिवार को आएगा। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा (Ekadashi Vrat Significance) से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि इस व्रत से घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है। सुबह स्नान कर, विष्णु जी और लक्ष्मी माता की मूर्ति के सामने दीप जलाएँ और सात्विक भोजन करें। ये दिन भक्ति और शुद्धता का प्रतीक है।

लक्ष्मी चालीसा का पाठ

योगिनी एकादशी पर लक्ष्मी चालीसा का पाठ करना बेहद शुभ माना जाता है। “मातु लक्ष्मी करि कृपा, करो हृदय में वास” जैसी पंक्तियाँ मां की महिमा गाती हैं। इस चालीसा (Lakshmi Chalisa Benefits) के पाठ से घर की दरिद्रता दूर होती है, धन लाभ होता है और मनोकामनाएँ पूरी होती हैं। खासकर शुक्रवार और एकादशी के दिन ये पाठ शुक्र ग्रह के दोष भी दूर करता है। चालीसा में मां लक्ष्मी को सिंधु सुता और विश्व की स्वामिनी कहकर पुकारा जाता है, जो भक्तों के हर दुख हरती हैं।

लक्ष्मी चालीसा (Lakshmi Chalisa)

॥ दोहा ॥

मातु लक्ष्मी करि कृपा करो हृदय में वास।

मनोकामना सिद्ध कर पुरवहु मेरी आस॥

सिंधु सुता विष्णुप्रिये नत शिर बारंबार।

ऋद्धि सिद्धि मंगलप्रदे नत शिर बारंबार॥

सोरठा

यही मोर अरदास, हाथ जोड़ विनती करुं।

सब विधि करौ सुवास, जय जननि जगदंबिका॥

चौपाई

सिन्धु सुता मैं सुमिरौ तोही। ज्ञान बुद्घि विघा दो मोही॥

जय जय जगत जननि जगदंबा सबकी तुम ही हो अवलंबा॥1॥

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तुम ही हो सब घट घट वासी। विनती यही हमारी खासी॥

जगजननी जय सिन्धु कुमारी। दीनन की तुम हो हितकारी॥2॥

विनवौं नित्य तुमहिं महारानी। कृपा करौ जग जननि भवानी॥

केहि विधि स्तुति करौं तिहारी। सुधि लीजै अपराध बिसारी॥3॥

कृपा दृष्टि चितववो मम ओरी। जगजननी विनती सुन मोरी॥

ज्ञान बुद्घि जय सुख की दाता। संकट हरो हमारी माता॥4॥

क्षीरसिन्धु जब विष्णु मथायो। चौदह रत्न सिन्धु में पायो॥

चौदह रत्न में तुम सुखरासी। सेवा कियो प्रभु बनि दासी॥5॥

जब जब जन्म जहां प्रभु लीन्हा। रुप बदल तहं सेवा कीन्हा॥

स्वयं विष्णु जब नर तनु धारा। लीन्हेउ अवधपुरी अवतारा॥6॥

तब तुम प्रगट जनकपुर माहीं। सेवा कियो हृदय पुलकाहीं॥

अपनाया तोहि अन्तर्यामी। विश्व विदित त्रिभुवन की स्वामी॥7॥

तुम सम प्रबल शक्ति नहीं आनी। कहं लौ महिमा कहौं बखानी॥

मन क्रम वचन करै सेवकाई। मन इच्छित वांछित फल पाई॥8॥

तजि छल कपट और चतुराई। पूजहिं विविध भांति मनलाई॥

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और हाल मैं कहौं बुझाई। जो यह पाठ करै मन लाई॥9॥

ताको कोई कष्ट नोई। मन इच्छित पावै फल सोई॥

त्राहि त्राहि जय दुःख निवारिणि। त्रिविध ताप भव बंधन हारिणी॥10॥

जो चालीसा पढ़ै पढ़ावै। ध्यान लगाकर सुनै सुनावै॥

ताकौ कोई न रोग सतावै। पुत्र आदि धन सम्पत्ति पावै॥11॥

पुत्रहीन अरु संपति हीना। अन्ध बधिर कोढ़ी अति दीना॥

विप्र बोलाय कै पाठ करावै। शंका दिल में कभी न लावै॥12॥

पाठ करावै दिन चालीसा। ता पर कृपा करैं गौरीसा॥

सुख सम्पत्ति बहुत सी पावै। कमी नहीं काहू की आवै॥13॥

बारह मास करै जो पूजा। तेहि सम धन्य और नहिं दूजा॥

प्रतिदिन पाठ करै मन माही। उन सम कोइ जग में कहुं नाहीं॥14॥

बहुविधि क्या मैं करौं बड़ाई। लेय परीक्षा ध्यान लगाई॥

करि विश्वास करै व्रत नेमा। होय सिद्घ उपजै उर प्रेमा॥15॥

जय जय जय लक्ष्मी भवानी। सब में व्यापित हो गुण खानी॥

तुम्हरो तेज प्रबल जग माहीं। तुम सम कोउ दयालु कहुं नाहिं॥16॥

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मोहि अनाथ की सुधि अब लीजै। संकट काटि भक्ति मोहि दीजै॥

भूल चूक करि क्षमा हमारी। दर्शन दजै दशा निहारी॥17॥

बिन दर्शन व्याकुल अधिकारी। तुमहि अछत दुःख सहते भारी॥

नहिं मोहिं ज्ञान बुद्घि है तन में। सब जानत हो अपने मन में॥18॥

रुप चतुर्भुज करके धारण। कष्ट मोर अब करहु निवारण॥

केहि प्रकार मैं करौं बड़ाई। ज्ञान बुद्घि मोहि नहिं अधिकाई॥19॥

॥ दोहा॥

त्राहि त्राहि दुख हारिणी, हरो वेगि सब त्रास। जयति जयति जय लक्ष्मी, करो शत्रु को नाश॥

रामदास धरि ध्यान नित, विनय करत कर जोर। मातु लक्ष्मी दास पर, करहु दया की कोर॥

व्रत और पूजा की सही विधि

योगिनी एकादशी का व्रत रखने के लिए कुछ नियम ज़रूरी हैं। सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और भगवान विष्णु की मूर्ति के सामने व्रत का संकल्प लें। तामसिक भोजन, चावल और तुलसी तोड़ने से बचें। लक्ष्मी चालीसा का पाठ सुबह या शाम करें। रात में भजन-कीर्तन करें और अगले दिन पारण समय (Ekadashi Paran Time) में व्रत तोड़ें। दान-पुण्य करें, खासकर अन्न या वस्त्र का दान। इन नियमों का पालन कर योगिनी एकादशी का व्रत (Vishnu Lakshmi Puja) मां लक्ष्मी और विष्णु जी की कृपा दिलाता है।

मोनिका गुप्ता

मोनिका गुप्ता एक अनुभवी लेखिका हैं, जो पिछले 10 वर्षों से लाइफस्टाइल, एंटरटेनमेंट, ट्रेंडिंग टॉपिक्स और राशिफल पर हिंदी में आकर्षक और जानकारीपूर्ण लेख लिख रही हैं। उनकी रचनाएं पाठकों को दैनिक जीवन की सलाह, मनोरंजन की दुनिया की झलक, वर्तमान ट्रेंड्स की गहराई और ज्योतिषीय भविष्यवाणियों से जोड़ती हैं। मोनिका जी का लेखन सरल, रोचक और प्रासंगिक होता है, जो लाखों पाठकों को प्रेरित करता है। वे विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और न्यूज़ पोर्टल्स (Haryananewspost.com) पर सक्रिय हैं, जहाँ उनकी कलम से निकले लेख हमेशा चर्चा का विषय बन जाते हैं।

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