Yogini Ekadashi Vrat Katha Observe fast and story on June 21 to get freedom from sins: योगिनी एकादशी (Yogini Ekadashi) का नाम सुनते ही मन में भक्ति और श्रद्धा की लहर दौड़ पड़ती है। सनातन धर्म में एकादशी का व्रत हर मनोकामना को पूरा करने वाला माना जाता है, और जब बात आषाढ़ माह की योगिनी एकादशी की हो, तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है।
21 जून 2025 को पड़ने वाली इस एकादशी का व्रत न केवल आपके पापों का नाश करता है, बल्कि जीवन में सुख-समृद्धि (prosperity) की बरसात भी लाता है।
इस दिन भगवान विष्णु की पूजा और व्रत कथा (vrat katha) सुनने से हर दुख-दरिद्रता दूर हो जाती है। तो आइए, इस पौराणिक कथा की गहराइयों में डूबते हैं और जानते हैं कि कैसे एक माली ने इस व्रत से अपनी किस्मत पलट दी!
Yogini Ekadashi Vrat Katha: योगिनी एकादशी
सनातन धर्म में हर एकादशी का अपना अलग महत्व है, लेकिन योगिनी एकादशी (Yogini Ekadashi) को पापों से मुक्ति (salvation from sins) दिलाने वाला व्रत माना जाता है। आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की इस एकादशी का व्रत करने से न केवल पिछले जन्मों के पाप धुल जाते हैं, बल्कि जीवन में सुख, शांति, और समृद्धि भी आती है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा से भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती है। इस व्रत की कथा सुनने और विधि-विधान से पूजा करने से व्यक्ति को श्रापों से भी मुक्ति मिल सकती है। 21 जून को ये व्रत रखकर आप भी अपने जीवन में नई रोशनी ला सकते हैं!
योगिनी एकादशी व्रत कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, स्वर्ग की अलकापुरी नगरी में कुबेर नाम का एक राजा रहता था, जो भगवान शिव का परम भक्त था। उसकी पूजा के लिए हेम नाम का माली रोज फूल लाया करता था। एक दिन हेम अपनी पत्नी विशालाक्षी के साथ रमण में इतना मग्न हो गया कि वह राजा को फूल देना भूल गया।
गुस्साए कुबेर ने उसे श्राप दे दिया कि उसे पत्नी का वियोग सहना पड़ेगा और पृथ्वी पर कोढ़ी बनकर भटकना होगा। श्राप के प्रभाव से हेम पृथ्वी पर कोढ़ी हो गया और उसकी पत्नी भी भिखारिन बन गई। दुखी हेम एक दिन मार्कंडेय ऋषि के आश्रम पहुंचा और अपनी आपबीती सुनाई।
ऋषि ने उसे योगिनी एकादशी (Yogini Ekadashi) का व्रत रखने की सलाह दी। व्रत के प्रभाव से हेम श्राप से मुक्त हो गया और अपनी पत्नी के साथ स्वर्ग लौटकर सुखी जीवन जिया।
योगिनी एकादशी का व्रत (fasting) करने से भक्तों को न केवल आध्यात्मिक शांति मिलती है, बल्कि उनके जीवन से हर तरह की नकारात्मकता भी दूर होती है। इस व्रत को रखने वाले को उपवास के दौरान भगवान विष्णु की पूजा, मंत्र जाप, और कथा सुनने का विधान है।
कहते हैं कि इस व्रत से 88,000 ब्राह्मणों को भोजन कराने जितना पुण्य मिलता है। ये व्रत उन लोगों के लिए खास है जो अपने जीवन में किसी श्राप, बीमारी, या दुख से मुक्ति चाहते हैं। इस दिन दान-पुण्य और गरीबों की मदद करने से भी पुण्य कई गुना बढ़ जाता है। 21 जून को ये व्रत रखकर आप भी अपने जीवन को सुखमय बना सकते हैं!
कैसे करें योगिनी एकादशी का व्रत?
योगिनी एकादशी (Yogini Ekadashi) का व्रत रखना बेहद सरल है, लेकिन इसके नियमों का पालन जरूरी है। सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र के सामने दीप जलाएं। विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें और फल-फूल अर्पित करें। दिनभर निराहार रहें या फलाहार लें।
शाम को व्रत कथा (vrat katha) पढ़ें या सुनें। अगले दिन द्वादशी तिथि पर ब्राह्मणों को भोजन कराकर दान दें। इस व्रत को श्रद्धा और विश्वास के साथ करने से आपके जीवन में चमत्कार हो सकता है। तो इस 21 जून को योगिनी एकादशी का व्रत जरूर रखें और अपने पापों से मुक्ति पाएं!













