Akshaya Tritiya Aarti lyrics mata laxmi aarti, kuber devta aarti in Hindi: 30 अप्रैल 2025 को देशभर में अक्षय तृतीया का पवित्र पर्व धूमधाम और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। यह दिन हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ माना जाता है, जब भक्तजन माता लक्ष्मी, भगवान विष्णु, श्री गणेश और धनाध्यक्ष कुबेर की पूजा-अर्चना कर अपने जीवन में सुख, समृद्धि और स्थायी खुशहाली की कामना करते हैं। इस लेख में हम आपको इस पर्व के महत्व, आरती के लाभ और इसे करने के सरल तरीकों के बारे में बताएंगे, ताकि आप इस शुभ अवसर का पूरा लाभ उठा सकें।
Akshaya Tritiya Aarti lyrics: अक्षय तृतीया: एक अविनाशी पर्व का महत्व
अक्षय तृतीया का नाम ही इसके महत्व को दर्शाता है ‘अक्षय’ यानी जो कभी नष्ट न हो। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किए गए पुण्य कार्य, दान, और पूजा-पाठ का फल जन्म-जन्मांतर तक प्राप्त होता है। पौराणिक कथाओं में उल्लेख है कि एक गरीब वैश्य ने इस दिन भक्ति और दान के बल पर अगले जन्म में राजा का सुख प्राप्त किया था।
यह पर्व न केवल आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक समृद्धि का भी आधार माना जाता है। इस दिन लोग नई शुरुआत करते हैं, जैसे कि सोना-चांदी की खरीदारी, नए व्यवसाय की शुरुआत, या फिर घर में मंगल कार्यों का आयोजन।
Ganesh Ji Ki Aarti
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
‘सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
भगवान गणेश की जय, पार्वती के लल्ला की जय
पूजा और आरती का विशेष महत्व
अक्षय तृतीया पर माता लक्ष्मी, भगवान विष्णु, श्री गणेश और कुबेर देवता की पूजा का विशेष विधान है। इन देवी-देवताओं की आरती करने से न केवल घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, बल्कि धन-धान्य और सुख-शांति की प्राप्ति भी होती है। माता लक्ष्मी धन और समृद्धि की देवी हैं, भगवान विष्णु विश्व के पालनकर्ता हैं, श्री गणेश विघ्नहर्ता हैं, और कुबेर धन के अधिपति हैं। इन सभी की एक साथ आरती करने से जीवन के हर क्षेत्र में सफलता और स्थिरता प्राप्त होती है।
Laxmi Mata Ki Aarti Lyrics
ओम जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता। मैया तुम ही जग-माता।।
सूर्य-चंद्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥
दुर्गा रुप निरंजनी, सुख सम्पत्ति दाता। मैया सुख सम्पत्ति दाता॥
जो कोई तुमको ध्याता, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥
तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता। मैया तुम ही शुभदाता॥
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनी, भवनिधि की त्राता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥
जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता। मैया सब सद्गुण आता॥
सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता। मैया वस्त्र न कोई पाता॥
खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥
शुभ-गुण मंदिर सुंदर, क्षीरोदधि-जाता। मैया क्षीरोदधि-जाता॥
रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥
महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई जन गाता। मैया जो कोई जन गाता॥
उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥
ओम जय लक्ष्मी माता॥
ऊं जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता। तुमको निशदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता। ऊं जय लक्ष्मी माता।।
क्यों खास है इस दिन का दान-पुण्य?
अक्षय तृतीया पर दान-पुण्य का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दिन किया गया दान कई गुना फल देता है। आप भोजन, वस्त्र, या धन का दान कर सकते हैं। यह न केवल आपके पुण्य को बढ़ाता है, बल्कि समाज में सकारात्मकता भी फैलाता है। इस दिन गरीबों की मदद करने से माता लक्ष्मी और कुबेर देवता प्रसन्न होते हैं, जिससे आपके जीवन में धन और समृद्धि का आगमन होता है।
Kuber Ji Ki Aarti
ॐ जय यक्ष कुबेर हरे,
स्वामी जय यक्ष जय यक्ष कुबेर हरे।
शरण पड़े भगतों के,
भण्डार कुबेर भरे।
॥ ॐ जय यक्ष कुबेर हरे…॥
शिव भक्तों में भक्त कुबेर बड़े,
स्वामी भक्त कुबेर बड़े।
दैत्य दानव मानव से,
कई-कई युद्ध लड़े ॥
॥ ॐ जय यक्ष कुबेर हरे…॥
स्वर्ण सिंहासन बैठे,
सिर पर छत्र फिरे,
स्वामी सिर पर छत्र फिरे।
योगिनी मंगल गावैं,
सब जय जय कार करैं॥
॥ ॐ जय यक्ष कुबेर हरे…॥
गदा त्रिशूल हाथ में,
शस्त्र बहुत धरे,
स्वामी शस्त्र बहुत धरे।
दुख भय संकट मोचन,
धनुष टंकार करे॥
॥ ॐ जय यक्ष कुबेर हरे…॥
भांति भांति के व्यंजन बहुत बने,
स्वामी व्यंजन बहुत बने।
मोहन भोग लगावैं,
साथ में उड़द चने॥
॥ ॐ जय यक्ष कुबेर हरे…॥
यक्ष कुबेर जी की आरती,
जो कोई नर गावे,
स्वामी जो कोई नर गावे ।
कहत प्रेमपाल स्वामी,
मनवांछित फल पावे।
॥ इति श्री कुबेर आरती ॥
अपने परिवार के साथ बनाएं यह पर्व यादगार
अक्षय तृतीया केवल पूजा और खरीदारी तक सीमित नहीं है; यह परिवार और प्रियजनों के साथ एकजुट होने का भी अवसर है। आप अपने परिवार के साथ मिलकर पूजा समारोह आयोजित कर सकते हैं। बच्चों को इस पर्व से जुड़ी कथाएं सुनाएं, जैसे कि कुबेर को धनाध्यक्ष बनाए जाने की कहानी या भगवान परशुराम के जन्म की कथा। इसके अलावा, इस दिन अपने आसपास के लोगों के साथ खुशियां बांटें। चाहे वह शुभकामना संदेश हो या छोटा-सा दान, हर प्रयास इस पर्व को और भी खास बनाता है।
आरती करने का सरल और प्रभावी तरीका
अक्षय तृतीया की पूजा और आरती को सरलता के साथ किया जा सकता है। सबसे पहले सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें और भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी, श्री गणेश और कुबेर की मूर्ति या चित्र को स्थापित करें। दीप प्रज्वलन करें, फूलों की माला चढ़ाएं, और चंदन का तिलक लगाएं।
इसके बाद ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’, ‘ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं महालक्ष्म्यै नम:’, ‘ॐ गं गणपतये नम:’ और ‘ॐ कुबेराय नम:’ मंत्रों का जाप करें। फिर माता लक्ष्मी, भगवान विष्णु, श्री गणेश और कुबेर की आरती उतारें। आरती के लिरिक्स आप ऑनलाइन या धार्मिक पुस्तकों से प्राप्त कर सकते हैं। पूजा के अंत में प्रसाद बांटें और जरूरतमंदों को दान दें।












