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Anant Chaturdashi 2025: अनंत चतुर्दशी पर बप्पा की विदाई का शुभ मुहूर्त और परंपराएं, जानें सबकुछ!

On: September 1, 2025 7:53 PM
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Anant Chaturdashi 2025: अनंत चतुर्दशी पर बप्पा की विदाई का शुभ मुहूर्त और परंपराएं, जानें सबकुछ!
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Anant Chaturdashi 2025: गणेश उत्सव की शुरुआत इस साल 27 अगस्त 2025 को धूमधाम से हुई थी। अब बप्पा को विदा करने का समय नजदीक है। 6 सितंबर 2025, शनिवार को गणेश उत्सव का समापन होगा और इसी दिन अनंत चतुर्दशी मनाई जाएगी। यह दिन गणेश विसर्जन के लिए सबसे खास माना जाता है। इस दिन भक्त “गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ” के जयकारों के साथ बप्पा को भावपूर्ण विदाई देंगे और अगले साल फिर आने की प्रार्थना करेंगे। आइए जानते हैं शुभ मुहूर्त और विसर्जन की परंपराओं के बारे में।

गणेश विसर्जन 2025 शुभ मुहूर्त

अनंत चतुर्दशी का दिन गणेश विसर्जन के लिए सबसे शुभ होता है। इस दिन कई शुभ मुहूर्त हैं, जिनमें आप बप्पा की विदाई कर सकते हैं।

सुबह का मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत)

सुबह 07:44 से 09:18 तक

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सुबह 09:18 से 10:52 तक

सुबह 10:52 से 12:26 तक

दोपहर का मुहूर्त

दोपहर 01:59 से 03:33 तक

शाम का मुहूर्त

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शाम 06:41 से 08:07 तक

गणेश विसर्जन की परंपराएं

गणेश विसर्जन से पहले भक्त कुछ खास रीति-रिवाज निभाते हैं ताकि विदाई शुभ और पूरी तरह से पवित्र हो। विसर्जन से पहले बप्पा की मूर्ति की अंतिम पूजा की जाती है। उन्हें लड्डू, मोदक और उनके पसंदीदा व्यंजन चढ़ाए जाते हैं। परिवार के सभी सदस्य मिलकर गणपति की आरती करते हैं और “ॐ गं गणपतये नमः” जैसे मंत्रों का जाप करते हैं।

पूजा के दौरान अक्षत (चावल) और दही को लाल कपड़े में बांधकर मूर्ति के पास रखा जाता है, जो समृद्धि और शुभता का प्रतीक है। विसर्जन के समय भक्त प्रार्थना करते हैं कि बप्पा उनके साथ सारी नकारात्मकता ले जाएं और अगले साल फिर आएं। मूर्ति को सम्मान के साथ जल में विसर्जित किया जाता है। पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए मिट्टी की इको-फ्रेंडली मूर्तियों का विसर्जन करना बेहतर है।

गणेश विसर्जन का महत्व

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गणेश चतुर्थी का पर्व भगवान गणेश के जन्म का उत्सव है। इन दस दिनों में भक्त अपने घरों में गणपति की मूर्ति स्थापित करते हैं, उनकी पूजा करते हैं और तरह-तरह के भोग चढ़ाते हैं। मान्यता है कि इस दौरान बप्पा अपने भक्तों के सारे दुख और कष्ट हर लेते हैं। अनंत चतुर्दशी का दिन गणेशजी की विदाई का दिन होता है।

इस दिन मूर्ति को पवित्र जल में विसर्जित किया जाता है, जो यह दर्शाता है कि बप्पा अपने लोक लौट रहे हैं। यह प्रक्रिया जीवन चक्र को दर्शाती है कि हर शुरुआत का एक अंत होता है, लेकिन भक्ति का यह चक्र हर साल नई उम्मीद के साथ शुरू होता है।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है। इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।

मोनिका गुप्ता

मोनिका गुप्ता एक अनुभवी लेखिका हैं, जो पिछले 10 वर्षों से लाइफस्टाइल, एंटरटेनमेंट, ट्रेंडिंग टॉपिक्स और राशिफल पर हिंदी में आकर्षक और जानकारीपूर्ण लेख लिख रही हैं। उनकी रचनाएं पाठकों को दैनिक जीवन की सलाह, मनोरंजन की दुनिया की झलक, वर्तमान ट्रेंड्स की गहराई और ज्योतिषीय भविष्यवाणियों से जोड़ती हैं। मोनिका जी का लेखन सरल, रोचक और प्रासंगिक होता है, जो लाखों पाठकों को प्रेरित करता है। वे विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और न्यूज़ पोर्टल्स (Haryananewspost.com) पर सक्रिय हैं, जहाँ उनकी कलम से निकले लेख हमेशा चर्चा का विषय बन जाते हैं।

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